यूपी 2027: बसपा का ब्राह्मण कार्ड, नई रणनीति

Digital Desk
5 Min Read

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में Bahujan Samaj Party (बसपा) ने ब्राह्मण समाज को फिर से अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सामाजिक समीकरणों को साधने और पुराने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर बैठकों और संवाद कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है।

बसपा का यह कदम प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अहम माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि सोशल इंजीनियरिंग के पुराने फॉर्मूले को नए अंदाज में लागू कर 2027 में बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।

बसपा की राजनीति लंबे समय से ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की रणनीति पर आधारित रही है। दलित-ब्राह्मण समीकरण ने पहले भी पार्टी को सत्ता तक पहुंचाया था। 2007 के विधानसभा चुनाव में इसी रणनीति के तहत पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला था।

अब एक बार फिर पार्टी नेतृत्व उसी मॉडल को नए सिरे से सक्रिय करने की कोशिश में है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बसपा अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक को मजबूत रखते हुए ब्राह्मण समाज में भरोसा बहाल करना चाहती है।

Mayawati की सक्रियता बढ़ी

हाल के महीनों में बसपा प्रमुख Mayawati ने संगठनात्मक बैठकों की रफ्तार बढ़ाई है। पार्टी पदाधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय किया जाए।

सूत्रों के मुताबिक, ब्राह्मण समाज के प्रभावशाली लोगों से संपर्क साधने और क्षेत्रीय स्तर पर सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है। इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपने एजेंडे और नीतियों को सामने रखेगी।

जिला स्तर पर सम्मेलन और संवाद कार्यक्रम

ब्राह्मण समाज से सीधा संवाद

बसपा आगामी महीनों में जिला और मंडल स्तर पर ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित कर सकती है। इन कार्यक्रमों में पार्टी के वरिष्ठ नेता हिस्सा लेंगे और सामाजिक भागीदारी पर जोर देंगे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे सम्मेलनों से पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की इच्छुक है।

बसपा 2027 रणनीति, यूपी राजनीति, ब्राह्मण वोट बैंक, सोशल इंजीनियरिंग, मायावती, यूपी विधानसभा चुनाव 2027

संगठन में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की कवायद

सूत्रों का कहना है कि पार्टी संगठन में ब्राह्मण नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारियां देने पर भी विचार कर रही है। इससे सामाजिक संतुलन का संदेश देने की कोशिश होगी।

2027 के समीकरण और चुनौतियां

उत्तर प्रदेश की राजनीति में फिलहाल मुकाबला बहुकोणीय माना जा रहा है। ऐसे में बसपा के लिए अपने पारंपरिक वोट बैंक को एकजुट रखना और नए वर्गों को जोड़ना दोनों ही जरूरी हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, 2027 के चुनाव में जातीय समीकरण एक बार फिर अहम भूमिका निभा सकते हैं। बसपा की कोशिश है कि दलित-ब्राह्मण गठजोड़ को मजबूत कर वह निर्णायक बढ़त हासिल करे।

हालांकि, पार्टी के सामने चुनौती यह भी है कि पिछले चुनावों में उसका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। ऐसे में संगठनात्मक मजबूती और जमीनी सक्रियता बढ़ाना जरूरी होगा।

विपक्ष की नजर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

बसपा की इस रणनीति पर अन्य दलों की भी नजर है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर सभी प्रमुख दल सक्रिय हैं।

हालांकि, बसपा की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया है कि पार्टी सर्व समाज की राजनीति करती है और उसका उद्देश्य सामाजिक न्याय और संतुलन कायम करना है।

2007 में बसपा ने जिस सोशल इंजीनियरिंग मॉडल से सत्ता हासिल की थी, वह भारतीय राजनीति में एक मिसाल माना जाता है। अब देखना होगा कि बदले हुए राजनीतिक माहौल में वही रणनीति कितना असर दिखाती है।

फिलहाल, पार्टी संगठन को मजबूत करने, बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने और सामाजिक समीकरण साधने में जुटी है। 2027 विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन बसपा ने अपनी तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में आने वाले महीनों में यह रणनीति किस हद तक असर डालती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

read more:https://news7hindi.com/ai-summit-case-three-accused-now-appear-in-delhi-on-transit-remand/

for advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

Share This Article
Leave a Comment