Varuthini Ekadashi 2026: व्रत तिथि, पूजा विधि और महत्व

Editorial
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हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है और इन्हीं में से एक है वरुथिनी एकादशी, जो वैशाख मास के कृष्ण पक्ष में आती है। वर्ष 2026 में यह व्रत अप्रैल महीने में रखा जाएगा और धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका फल दस हजार वर्षों की तपस्या के समान बताया गया है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे उत्तर भारत में इस व्रत को लेकर विशेष आस्था देखने को मिलती है।

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यह व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्रदान करता है। विशेष रूप से जो लोग आर्थिक, मानसिक या पारिवारिक परेशानियों से जूझ रहे होते हैं, उनके लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है।

व्रत की सही तिथि

साल 2026 में वरुथिनी एकादशी का व्रत 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि का प्रारंभ 23 अप्रैल की रात से होगा और 24 अप्रैल तक रहेगा, इसलिए उदया तिथि के अनुसार व्रत 24 अप्रैल को मान्य होगा।

पारण का समय

व्रत का पारण अगले दिन यानी 25 अप्रैल 2026 को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। पारण का समय प्रातः काल में शुभ मुहूर्त के अनुसार रखा जाता है। इस दौरान सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत पूर्ण किया जाता है।

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वरुथिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुराणों में बताया गया है कि यह व्रत करने से हजारों वर्षों की कठोर तपस्या के बराबर पुण्य मिलता है।

सौभाग्य और समृद्धि का व्रत

यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो जीवन में स्थिरता और आर्थिक उन्नति चाहते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु की कृपा से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

वरुथिनी एकादशी की पूजा विधि

वरुथिनी एकादशी के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ कर दीपक जलाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।

भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके साथ ही विष्णु सहस्रनाम या गीता पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दिनभर उपवास रखें और मन, वचन व कर्म से पवित्रता बनाए रखें।

व्रत के दौरान क्या करें और क्या न करें?

वरुथिनी एकादशी के दिन सत्संग, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यों में समय बिताना चाहिए। जरूरतमंदों को दान देना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। खासकर अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से विशेष फल मिलता है।

इस दिन क्रोध, झूठ, नकारात्मक विचार और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। मांसाहार, शराब और तामसिक भोजन पूरी तरह वर्जित होता है। व्रत के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

उत्तर प्रदेश में वरुथिनी एकादशी की परंपरा

उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों जैसे लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या में वरुथिनी एकादशी का विशेष महत्व है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में भगवान विष्णु के मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस व्रत को लेकर गहरी आस्था देखी जाती है, जहां महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं।

आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्व

वरुथिनी एकादशी केवल धार्मिक व्रत ही नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धि का एक माध्यम भी है। यह व्रत व्यक्ति को संयम, अनुशासन और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करता है। साथ ही, दान और सेवा के माध्यम से समाज में सहयोग और सहानुभूति की भावना को भी बढ़ावा देता है।

वरुथिनी एकादशी 2026 न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का भी एक अवसर है। सही तिथि, विधि और नियमों के साथ किया गया यह व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि ला सकता है।

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