लखनऊ उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में 22 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में पशुपालन को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने, कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने, जल परिवहन को व्यवस्थित करने और कंपनियों के विलय से जुड़े नियमों को स्पष्ट करने जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सरकार का जोर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में सुविधाओं को बेहतर बनाने पर रहा।कैबिनेट के फैसलों में पशुपालकों के लिए प्रति गाय 50 हजार रुपये अनुदान और पशु बीमा की लागत का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार की ओर से वहन करने का प्रावधान खास है। इसके अलावा, हजारों शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा देने और बेसिक शिक्षा क्षेत्र के 1.22 लाख से अधिक कर्मचारियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने से जुड़े प्रस्ताव भी मंजूर किए गए।
- 1. पशुपालकों को प्रति गाय 50 हजार रुपये का अनुदान
- 2. पशु बीमा की 85 प्रतिशत राशि देगी सरकार
- 3. 48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज
- 4. बेसिक शिक्षा के 1.22 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ
- 5. कंपनियों के मर्जर पर स्टांप ड्यूटी के नियम होंगे स्पष्ट
- 6. नावों का पंजीकरण, यात्रियों और नाविकों को बीमा
- 7. सैनिक स्कूल मैनपुरी के विस्तार का रास्ता साफ
- क्या है कैबिनेट के फैसलों का बड़ा संदेश?

1. पशुपालकों को प्रति गाय 50 हजार रुपये का अनुदान
कैबिनेट बैठक में पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सहायता देने पर जोर दिया गया। प्रस्ताव के अनुसार, एक गाय पर 50 हजार रुपये का अनुदान देने का प्रावधान है। इसके साथ पशुओं की नस्ल सुधारने, उत्पादकता बढ़ाने और पशुपालन को रोजगार का बेहतर माध्यम बनाने की योजना है।सरकार का उद्देश्य उन्नत नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देकर दूध उत्पादन में वृद्धि करना है। इसके तहत प्रति गाय प्रतिदिन 10 लीटर तक दूध उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। पशुपालन के साथ मुर्गी और बकरी पालन को भी प्रोत्साहित करने की बात कही गई है।योजना के तहत पशु उत्पादों के लिए बेहतर बाजार व्यवस्था, आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्रबंधन पर भी ध्यान दिया जाएगा। इससे किसानों और पशुपालकों को उत्पादन के साथ अपने उत्पादों के विपणन में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।


2. पशु बीमा की 85 प्रतिशत राशि देगी सरकार
पशुपालन में बीमारी, दुर्घटना या अन्य कारणों से पशुओं को होने वाला नुकसान किसानों के लिए आर्थिक परेशानी का कारण बनता है। इसे ध्यान में रखते हुए पशु बीमा योजना को भी बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा गया है। पशु बीमा की कुल लागत का 85 प्रतिशत हिस्सा सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 15 प्रतिशत राशि पशुपालक को देनी होगी। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक पशुपालकों को बीमा सुरक्षा के दायरे में लाना है, ताकि पशुओं को नुकसान होने की स्थिति में किसानों पर पूरा आर्थिक बोझ न पड़े।योजना का लाभ लेने की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और अनुदान जारी करने से जुड़ी विस्तृत शर्तों की जानकारी संबंधित विभाग की आधिकारिक गाइडलाइन से स्पष्ट होगी।


3. 48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस इलाज
कैबिनेट ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा का रास्ता साफ किया है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इस फैसले से कुल 48,062 कर्मचारी लाभान्वित होंगे।इसमें अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के 23,989 कर्मचारी, वित्तविहीन विद्यालयों के 22,541 कर्मचारी और अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों के लगभग 110 शिक्षणेत्तर कर्मचारी शामिल हैं।सरकार प्रत्येक कर्मचारी के बीमा प्रीमियम के लिए 3,000 रुपये देगी। इस पर कुल 14.41 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की कैशलेस सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।इस फैसले से पात्र कर्मचारियों को इलाज के दौरान होने वाले खर्च का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।
4. बेसिक शिक्षा के 1.22 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ
बेसिक शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों के कुल 1,22,305 कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा।इसमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, लिपिक, वित्तविहीन संस्थानों के कर्मचारी और जिला परियोजना से जुड़े कर्मी शामिल हैं। इस फैसले का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक सुरक्षा देना है।
5. कंपनियों के मर्जर पर स्टांप ड्यूटी के नियम होंगे स्पष्ट
उत्तर प्रदेश में कंपनियों के विलय यानी मर्जर और विभाजन यानी डी-मर्जर से जुड़ी स्टांप ड्यूटी की व्यवस्था को स्पष्ट करने के लिए भी प्रस्ताव मंजूर किया गया है।स्टांप मंत्री रविंद्र जायसवाल के मुताबिक, प्रस्ताव में शेयर वैल्यू पर 0.50 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी लगाने का प्रावधान है। यदि संबंधित मामले में संपत्ति शामिल होती है, तो उस पर दो प्रतिशत स्टांप ड्यूटी प्रस्तावित है।अब तक स्पष्ट प्रावधानों की कमी के कारण कंपनियों के विलय के मामलों में सर्किल रेट के आधार पर स्टांप ड्यूटी को लेकर कठिनाइयां आने की बात कही गई थी। नई व्यवस्था से प्रक्रिया में स्पष्टता आने की उम्मीद है।इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक बताई गई है। मंजूरी मिलने के बाद ही इसे प्रदेश में लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
6. नावों का पंजीकरण, यात्रियों और नाविकों को बीमा
कैबिनेट ने प्रदेश में जल परिवहन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने से जुड़ी व्यवस्था को भी मंजूरी दी है। इसके तहत मोटर चालित और गैर-मोटर चालित नावों के पंजीकरण की व्यवस्था की जाएगी।जल परिवहन की निगरानी के लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव है। नावों को उनकी श्रेणी और यात्रियों की क्षमता के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा। गैर-यात्री नावों के पंजीकरण के लिए 50 रुपये शुल्क प्रस्तावित है।नई व्यवस्था में यात्रियों और नाविकों के बीमा का प्रावधान भी शामिल है। इसके अलावा, गंगा और यमुना समेत प्रदेश की 11 नदियों पर जल परिवहन की संभावनाओं को विकसित करने की योजना है।इस पहल का उद्देश्य नाव संचालन का रिकॉर्ड तैयार करना, सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनाना और जल परिवहन को व्यवस्थित रूप देना है।
7. सैनिक स्कूल मैनपुरी के विस्तार का रास्ता साफ
कैबिनेट ने सैनिक स्कूल मैनपुरी के विस्तार के लिए ग्रामीण क्षेत्र में निःशुल्क जमीन उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। यह स्कूल 22 जुलाई 2019 से संचालित है। जमीन मिलने से स्कूल के विस्तार की योजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
क्या है कैबिनेट के फैसलों का बड़ा संदेश?
योगी सरकार की इस बैठक में पशुपालन, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और परिवहन जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े प्रस्तावों पर निर्णय लिया गया। पशुपालकों के लिए आर्थिक सहायता और बीमा, कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा तथा जल परिवहन के पंजीकरण और सुरक्षा की व्यवस्था इन फैसलों के प्रमुख हिस्से हैं।
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