रिपोर्ट:दीपचंद्र दीक्षित
- ‘पेपर लीक ने युवाओं के सपनों को किया बर्बाद’
- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
- सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में SIT गठित करने की मांग
- परीक्षा माफियाओं पर हो सख्त कार्रवाई
- जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ कथित कार्रवाई पर भी सवाल
- भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए बड़ा प्रस्ताव
- जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
- राष्ट्रपति से की त्वरित कार्रवाई की अपील
.NEET पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं को लेकर देशभर में उठ रहे विरोध के बीच फर्रुखाबाद में भी छात्रों की आवाज बुलंद हुई। शुक्रवार को राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। संगठन ने परीक्षा प्रणाली में कथित भ्रष्टाचार, पेपर लीक और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लोकतंत्र और युवाओं के भविष्य पर गंभीर हमला बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल कठोर कदम उठाने की मांग की।मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि देश के लाखों छात्र-छात्राएं वर्षों तक दिन-रात मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन बार-बार सामने आने वाले पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवाद उनकी मेहनत, सपनों और भविष्य पर पानी फेर रहे हैं। उनका कहना था कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो युवाओं का परीक्षा प्रणाली और सरकार पर विश्वास पूरी तरह कमजोर हो जाएगा।
‘पेपर लीक ने युवाओं के सपनों को किया बर्बाद’
ज्ञापन में कहा गया कि NEET सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं ने करोड़ों युवाओं को मानसिक तनाव और असुरक्षा की स्थिति में पहुंचा दिया है। संगठन का आरोप है कि परीक्षा माफिया और सिस्टम की कमजोरियों के कारण ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों के साथ अन्याय हो रहा है। इसलिए अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा ने मांग की कि NEET एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें या भारत सरकार उन्हें मंत्रिमंडल से पदमुक्त करे। संगठन का कहना है कि इतने बड़े विवाद के बाद जवाबदेही तय होना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में SIT गठित करने की मांग
ज्ञापन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र विशेष जांच समिति (SIT) गठित करने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि केवल स्वतंत्र जांच ही पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने ला सकती है और दोषियों को सजा दिला सकती है।
परीक्षा माफियाओं पर हो सख्त कार्रवाई
मोर्चा ने मांग उठाई कि पेपर लीक में शामिल सभी आरोपियों, अधिकारियों, परीक्षा माफियाओं और उनके सहयोगियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उनकी अवैध संपत्तियां जब्त कर विशेष न्यायालय के माध्यम से मामलों का शीघ्र निस्तारण कराया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी परीक्षा माफिया छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।
जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ कथित कार्रवाई पर भी सवाल
ज्ञापन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का भी विरोध किया गया। संगठन ने इसकी न्यायिक जांच कराने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा घायल छात्रों को सरकार के खर्च पर बेहतर इलाज और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग रखी।
भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए बड़ा प्रस्ताव
राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा ने केंद्र सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा सुरक्षा तंत्र (National Examination Security Mechanism) स्थापित करने की मांग की। इसके साथ ही पेपर लीक से प्रभावित विद्यार्थियों के लिए बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ के पुनर्परीक्षा, पारदर्शी मूल्यांकन व्यवस्था और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए निःशुल्क काउंसलिंग सेंटर स्थापित करने की भी मांग की गई।
जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
राष्ट्रपति के नाम संबोधित यह ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपते समय जिला प्रभारी देवेश नारायण अवस्थी, जिलाध्यक्ष अभिषेक दुबे, जिला सचिव एडवोकेट आशुतोष मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष अरुण दुबे, जिला विधिक प्रकोष्ठ अध्यक्ष विनय शुक्ला, शिवम बाजपेई सहित राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
राष्ट्रपति से की त्वरित कार्रवाई की अपील
ज्ञापन के अंत में संगठन ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया कि छात्रों के भविष्य और देश की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। संगठन का कहना है कि देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था पर निर्भर है, इसलिए इस मुद्दे पर त्वरित और ठोस निर्णय समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
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