अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भव्य निर्माण से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक प्रक्रिया और मुआवजा वितरण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। श्रीराम जन्मभूमि परिसर विस्तार योजना के तहत वर्ष 2021 में अधिग्रहित किए गए एक परिवार के पैतृक मकान और भूमि का मुआवजा आज तक नहीं मिल पाया है। करीब छह वर्ष बीत जाने के बाद भी परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है। अब पीड़ित परिवार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव कृष्ण मोहन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए लिखित प्रार्थना-पत्र सौंपा है।मामला रामकोट क्षेत्र के अहिराना मोहल्ले का है, जहां रहने वाले राजन यादव, संतोष यादव और राम आधार यादव ने ट्रस्ट से गुहार लगाई है कि उनके लंबित भूमि एवं मुआवजा/प्रतिफल की राशि का जल्द से जल्द भुगतान कराया जाए। परिवार का कहना है कि उन्होंने प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण को राष्ट्र और सनातन समाज की आस्था का प्रतीक मानते हुए बिना किसी विरोध के अपना पैतृक मकान प्रशासन को सौंप दिया था। लेकिन निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद आज तक उन्हें उनका वैधानिक प्रतिफल नहीं मिल सका।पीड़ित परिवार के अनुसार 7 सितंबर 2021 को श्रीराम जन्मभूमि परिसर विस्तार योजना के अंतर्गत उनका मकान ध्वस्त कर अधिग्रहित कर लिया गया था। उस समय उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि नियमानुसार भूमि और मकान का प्रतिफल शीघ्र उपलब्ध करा दिया जाएगा। परिवार का आरोप है कि कई वर्षों के इंतजार, संबंधित अधिकारियों के चक्कर और अनेक बार आवेदन देने के बावजूद अब तक भुगतान नहीं हुआ।राजन यादव ने अपने प्रार्थना-पत्र में परिवार की गंभीर परिस्थितियों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। घर की पूरी जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है। परिवार में वृद्ध और गंभीर रूप से बीमार मां हैं, जिनका इलाज लगातार चल रहा है। इसके अलावा तीन अविवाहित छोटी बहनों की शादी की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर है। स्थायी घर न होने और आर्थिक तंगी के कारण विवाह के रिश्ते भी प्रभावित हो रहे हैं।

राजन यादव का कहना है कि मकान अधिग्रहित होने के बाद से पूरा परिवार किराये के मकान में रहने को मजबूर है। हर महीने किराये का भारी बोझ उठाना पड़ रहा है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। उनका कहना है कि यदि समय पर मुआवजा मिल जाता, तो वे छोटा-सा घर बनाकर अपने परिवार को सुरक्षित आश्रय दे सकते थे और बहनों के विवाह की तैयारी भी सम्मानपूर्वक कर पाते।परिवार ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का आंदोलन, विरोध या विवाद खड़ा करना नहीं है। वे केवल अपने वैधानिक अधिकार के तहत मिलने वाले मुआवजे और भूमि प्रतिफल की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने हमेशा प्रशासन और ट्रस्ट का सम्मान किया है तथा मंदिर निर्माण में पूरा सहयोग दिया। अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी पीड़ा को समझते हुए न्याय किया जाएगा।
इस संबंध में परिवार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव से व्यक्तिगत स्तर पर मामले की समीक्षा कराने और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि वर्षों से लंबित इस मामले का शीघ्र समाधान कराया जाए, ताकि परिवार आर्थिक संकट से बाहर निकल सके।पीड़ित परिवार के समर्थन में महंत संत दास राजेश सिंह ‘मानव’ भी सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि जो परिवार श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए अपना घर और जमीन सौंप चुका है, उसके साथ न्याय होना चाहिए। यदि किसी कारणवश मुआवजा लंबित है तो संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को उसका अधिकार दिलाना चाहिए।राजन यादव, संतोष यादव और राम आधार यादव का कहना है कि उन्हें आज भी श्रीराम के दरबार और न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। उनका मानना है कि जिस मंदिर के निर्माण के लिए उन्होंने अपना घर छोड़ा, उसी प्रभु के आशीर्वाद से उन्हें न्याय अवश्य मिलेगा। परिवार ने कहा कि मुआवजे की राशि मिलने से उनकी वर्षों पुरानी परेशानी दूर होगी, बीमार मां का बेहतर इलाज संभव हो सकेगा और तीनों बहनों का विवाह सम्मानपूर्वक कराया जा सकेगा।फिलहाल यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि विकास और धार्मिक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित परिवारों को समयबद्ध तरीके से उनका वैधानिक प्रतिफल मिलना कितना आवश्यक है। अब सभी की निगाहें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस प्रकरण में क्या निर्णय लेते हैं और पीड़ित परिवार को कब तक राहत मिलती है। यदि परिवार के दावों के अनुसार मुआवजा वास्तव में लंबित है, तो उसका शीघ्र निस्तारण न केवल एक परिवार को राहत देगा, बल्कि व्यवस्था के प्रति लोगों के विश्वास को भी मजबूत करेगा।
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