युवा दिवस पर मिसाल बने विजाधरपुर के शिवम दुबे, नौकरी छोड़ अगरबत्ती कारोबार से लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी

Editorial
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रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित

फर्रुखाबाद  युवा दिवस के मौके पर फतेहगढ़ के विजाधरपुर निवासी शिवम दुबे की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है, जो नौकरी को ही सफलता का एकमात्र रास्ता मानते हैं। शिवम ने अपनी मेहनत, प्रशिक्षण और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर यह साबित किया कि अगर सही दिशा, मेहनत और अवसर मिले तो युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले भी बन सकते हैं।कभी उड़ीसा में सहायक अभियंता के पद पर कार्य कर चुके शिवम दुबे ने पारिवारिक परिस्थितियों के चलते वर्ष 2014 में नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर कई काम किए, लेकिन उन्हें वह सफलता नहीं मिल सकी जिसकी उन्हें तलाश थी। परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण थीं, लेकिन शिवम ने हार नहीं मानी। इसी संघर्ष के बीच उन्हें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के बारे में जानकारी मिली और यहीं से उनकी जिंदगी में एक नई दिशा की शुरुआत हुई।

नौकरी छूटी तो नहीं छोड़ी हिम्मत

शिवम दुबे की कहानी की शुरुआत एक अच्छी नौकरी से हुई थी। उड़ीसा में सहायक अभियंता के पद पर काम करने के दौरान उन्होंने तकनीकी और व्यावसायिक अनुभव हासिल किया। लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वर्ष 2014 में उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी।नौकरी छोड़ने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने लिए नए रोजगार का रास्ता तलाशना था। उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने की कोशिश की, लेकिन मनचाही सफलता नहीं मिली। ऐसे समय में भी उन्होंने अपनी कोशिशें जारी रखीं और किसी नए अवसर की तलाश करते रहे।

सरकारी योजना ने दिखाई नई राह

शिवम को जब मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की जानकारी मिली तो उन्होंने इसे केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं माना, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने के अवसर के रूप में देखा।उन्होंने एफएफडीसी कन्नौज से अगरबत्ती निर्माण का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने अगरबत्ती बनाने की प्रक्रिया, उत्पादन, गुणवत्ता और कारोबार से जुड़ी बारीकियों को समझा।प्रशिक्षण पूरा करने के बाद शिवम ने योजना के तहत अपना आवेदन किया। इसके बाद जनवरी 2026 में उन्हें ऋण स्वीकृत हुआ। ऋण मिलने के बाद उन्होंने अपने सपने को जमीन पर उतारने की दिशा में तेजी से काम शुरू किया।

कानपुर और अहमदाबाद से मंगाईं मशीनें

ऋण स्वीकृत होने के बाद शिवम ने अगरबत्ती निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए मशीनों की व्यवस्था की। इसके लिए उन्होंने कानपुर और अहमदाबाद से मशीनें मंगाईं।मशीनें स्थापित करने के बाद उत्पादन शुरू किया गया। शुरुआती दौर में किसी भी नए कारोबार की तरह शिवम के सामने भी कई चुनौतियां थीं। बाजार में अपनी जगह बनाना, उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखना और ग्राहकों का भरोसा जीतना आसान नहीं था।लेकिन शिवम ने चुनौतियों को बाधा मानने के बजाय सीखने का अवसर बनाया। उन्होंने अपने उत्पाद की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया और धीरे-धीरे कारोबार को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया।

गुणवत्ता को बनाया कारोबार की पहचान

किसी भी कारोबार को लंबे समय तक सफल बनाए रखने में उत्पाद की गुणवत्ता और ग्राहकों का भरोसा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिवम ने इस बात को समझते हुए अपने अगरबत्ती उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया।मेहनत और बेहतर गुणवत्ता के चलते उनके उत्पादों को स्थानीय बाजार में पहचान मिलने लगी। धीरे-धीरे उनके अगरबत्ती उत्पाद फर्रुखाबाद और आसपास के जनपदों में पहुंचने लगे।यह शिवम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी, क्योंकि इससे उन्हें अपने कारोबार को और विस्तार देने का विश्वास मिला।

ऑनलाइन बाजार में भी बनाई पहचान

आज के डिजिटल दौर में किसी भी छोटे कारोबार के लिए ऑनलाइन बाजार एक बड़ा अवसर बनकर सामने आया है। शिवम ने भी अपने कारोबार को केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रखा।उन्होंने जीएसटी पंजीकरण कराया और अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराया। वर्तमान में उनके अगरबत्ती उत्पाद फ्लिपकार्ट, अमेजन और मीशो जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।ऑनलाइन बाजार में पहुंच बनने से उनके उत्पादों को स्थानीय क्षेत्र से बाहर भी ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिला है। यह बदलाव उनके कारोबार के विस्तार की दिशा में अहम कदम माना जा सकता है।

नौकरी से ज्यादा मिली आत्मसंतुष्टि

शिवम दुबे का कहना है कि अपना व्यवसाय स्थापित करने के बाद उन्हें नौकरी की अपेक्षा अधिक आत्मसंतुष्टि मिल रही है। उनके लिए कारोबार सिर्फ आमदनी का जरिया नहीं है, बल्कि अपने फैसले खुद लेने और अपनी मेहनत का परिणाम देखने का अवसर भी है।उनकी कहानी यह बताती है कि रोजगार का अर्थ केवल किसी संस्थान में नौकरी करना नहीं है। यदि किसी युवा के पास इच्छाशक्ति, सही प्रशिक्षण और उपलब्ध अवसरों का उपयोग करने की क्षमता हो तो वह अपना कारोबार भी खड़ा कर सकता है।

युवाओं के लिए क्या है शिवम का संदेश?

शिवम की सफलता खास तौर पर उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण संदेश देती है जो सरकारी या निजी नौकरी के इंतजार में अपने दूसरे विकल्पों को नजरअंदाज कर देते हैं।उनकी कहानी से यह सीख मिलती है कि कौशल प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं और उद्यमिता को भी करियर के विकल्प के रूप में देखा जा सकता है। किसी व्यवसाय की शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन सही योजना और लगातार मेहनत से उसे बड़ा बनाया जा सकता है।शिवम ने भी एक प्रशिक्षण कार्यक्रम से शुरुआत की और धीरे-धीरे उत्पादन, पंजीकरण, बाजार और ऑनलाइन बिक्री तक अपने कारोबार का विस्तार किया।

रोजगार देने का है सपना

शिवम दुबे का सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। उनका लक्ष्य भविष्य में अपने उद्योग का और विस्तार करना है। वह चाहते हैं कि उनका कारोबार इतना बढ़े कि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार दिया जा सके।यानी जिस युवा ने कभी नौकरी खोने के बाद संघर्ष किया, आज वह खुद दूसरों के लिए रोजगार का अवसर पैदा करने का सपना देख रहा है। यही बदलाव उनकी कहानी को और खास बनाता है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में युवाओं की भूमिका

देश में युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। ऐसी योजनाओं का उद्देश्य युवाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और कारोबार शुरू करने के अवसर उपलब्ध कराना है।शिवम दुबे का उदाहरण बताता है कि जब सरकारी योजना के साथ युवा की मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति जुड़ती है, तो उसके परिणाम सकारात्मक हो सकते हैं।उनकी कहानी यह भी बताती है कि छोटे शहरों और कस्बों के युवा भी आधुनिक बाजार और ई-कॉमर्स का इस्तेमाल कर अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचा सकते हैं।

युवा दिवस पर प्रेरणा बनी शिवम की कहानी

युवा दिवस पर शिवम दुबे की कहानी इसलिए खास है क्योंकि यह केवल एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष से आत्मनिर्भरता तक के सफर की कहानी है।वर्ष 2014 में नौकरी छोड़ने के बाद कई उतार-चढ़ाव देखने वाले शिवम ने हार नहीं मानी। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने प्रशिक्षण लिया, ऋण प्राप्त किया, मशीनें लगाईं और अगरबत्ती निर्माण का कारोबार शुरू किया। इसके बाद गुणवत्ता और मेहनत के बल पर उन्होंने अपने उत्पादों को स्थानीय बाजार से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंचाया।आज शिवम का लक्ष्य सिर्फ अपना कारोबार बढ़ाना नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करना है। उनकी कहानी युवा पीढ़ी को यह संदेश देती है कि सही अवसर मिलने पर मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ कोई भी युवा आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ सकता है।

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