रिपोर्ट:दीपचंद्र दीक्षित
फर्रुखाबाद में पांचाल घाट स्थित ऐतिहासिक गंगा पुल की जर्जर हालत एक बार फिर सियासी बहस का मुद्दा बन गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेता विकास राजपूत ने पुल की बदहाल स्थिति को लेकर प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियों पर तीखा हमला बोलते हुए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पुल की मरम्मत के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब होती है कि मरम्मत दो से तीन महीने के भीतर ही उखड़ जाती है। उन्होंने इसे जनता के टैक्स के पैसे की खुली बर्बादी बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।विकास राजपूत ने कहा कि पांचाल घाट गंगा पुल जिले की जीवनरेखा माना जाता है। प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन और लाखों लोगों की आवाजाही इसी पुल से होती है। इसके बावजूद पुल की हालत लगातार खराब होती जा रही है। सड़क पर बने गड्ढे, उखड़ी हुई सतह और क्षतिग्रस्त हिस्से न केवल यातायात को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि लोगों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बन चुके हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि हर वर्ष मरम्मत के नाम पर सरकारी बजट स्वीकृत होता है, लेकिन धरातल पर होने वाला कार्य गुणवत्ता की कसौटी पर पूरी तरह विफल साबित होता है। उनका कहना है कि यदि मरम्मत मानकों के अनुरूप होती तो कुछ ही महीनों में सड़क दोबारा खराब नहीं होती। इससे साफ प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हो रहा है।भाजपा नेता ने कहा कि पुल की जर्जर स्थिति के कारण प्रतिदिन लंबा जाम लगता है। घंटों तक वाहन फंसे रहते हैं, जिससे आम नागरिकों, व्यापारियों, विद्यार्थियों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार एंबुलेंस तक जाम में फंस जाती हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। उनका कहना था कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
विकास राजपूत ने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, तब हमारे जिले की जनता आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। यह केवल अव्यवस्था नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम है।”उन्होंने केवल गंगा पुल ही नहीं, बल्कि एनएच-730सी (NH-730C) के निर्माण कार्य पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में भी लगातार गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि खराब निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यह मार्ग अब लोगों के बीच “हादसों का हाईवे” बन चुका है।भाजपा नेता ने जिले की ट्रैफिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सेंट्रल जेल चौराहा, बघार नाला और मसानी चौराहा जैसे अति व्यस्त और संवेदनशील स्थानों पर आज तक ट्रैफिक सिग्नल, चेतावनी संकेतक और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं विकसित नहीं की गई हैं। इन स्थानों पर आए दिन सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है और अनेक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोग लगातार स्पीड ब्रेकर और अन्य सुरक्षा उपायों की मांग करते रहे हैं, लेकिन प्रशासन नियमों का हवाला देकर अनुमति देने से बचता रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए गए होते तो कई हादसों को रोका जा सकता था।विकास राजपूत ने यह भी सवाल उठाया कि पिछले तीन वर्षों से पांचाल घाट गंगा पुल की स्थायी और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत क्यों नहीं कराई गई। उनका कहना है कि हर वर्ष अस्थायी मरम्मत पर सरकारी धन खर्च कर दिया जाता है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल सरकारी धन की बर्बादी नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है।उन्होंने जिले की अन्य विकास परियोजनाओं का भी जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि दो वर्ष पहले जनता को समर्पित शुकरुल्लापुर ओवरब्रिज भी कथित रूप से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। उनके अनुसार कई विकास कार्य समय से पहले खराब हो रहे हैं, जिससे निर्माण एजेंसियों और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।भाजपा नेता ने मांग की कि पांचाल घाट गंगा पुल की मरम्मत किसी अनुभवी और प्रतिष्ठित निर्माण कंपनी से कराई जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक और उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री का उपयोग कर पुल को लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ बनाया जा सकता है। केवल खानापूर्ति वाली मरम्मत से समस्या का समाधान नहीं होगा।

उन्होंने यह भी मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और यदि निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार या गुणवत्ता में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना था कि जनता के टैक्स के पैसे का सही उपयोग सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।अंत में विकास राजपूत ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पांचाल घाट गंगा पुल की स्थायी मरम्मत जल्द नहीं कराई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की जनहानि या दुर्घटना की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और प्रशासन की होगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अस्थायी मरम्मत की परंपरा समाप्त कर पुल को स्थायी रूप से सुरक्षित बनाया जाए, ताकि जिले की जनता को सुरक्षित और सुगम यातायात की सुविधा मिल सके।फिलहाल भाजपा नेता के इन आरोपों के बाद पांचाल घाट गंगा पुल की स्थिति और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इन आरोपों पर क्या जवाब देता है और पुल की स्थायी मरम्मत को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

