क्राइम पेट्रोल देखकर रची साजिश: बुर्का पहन 15 साल पुराने दोस्त को उतारा मौत के घाट गूगल लोकेशन से पहुंचा कातिल

Editorial
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कानपुर में कंप्यूटर सेंटर संचालक प्रकाश चंद्र गुप्ता की हत्या का खुलासा किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म की पटकथा से कम नहीं निकला। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने वाला कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि मृतक का 15 साल पुराना दोस्त मोहित द्विवेदी था। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए बुर्का पहना, ऑटो चालक से बात करने के बजाय पहले से लिखी पर्चियों का इस्तेमाल किया और गूगल लोकेशन के सहारे सीधे अपने दोस्त के कंप्यूटर सेंटर तक पहुंचा। पुलिस के मुताबिक पूरी साजिश एक लोकप्रिय क्राइम शो देखकर रची गई थी। 31 मई की शाम यशोदानगर निवासी 47 वर्षीय प्रकाश चंद्र गुप्ता अपने घर से निकले थे। उन्होंने परिवार वालों से कहा था कि आईपीएल फाइनल मैच देखकर लौट आएंगे। लेकिन वह वापस घर नहीं पहुंचे। अगले दिन सुबह नवाबगंज स्थित उनके कंप्यूटर सेंटर के कार्यालय में उनका शव मिला। शव के पास मौजूद परिस्थितियों ने शुरू से ही मामले को रहस्यमय बना दिया था। उनकी आंख के ऊपर चोट के निशान थे और मुंह से झाग निकल रहा था। पोस्टमार्टम में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया, जिसके बाद विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा गया।

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब पता चला कि प्रकाश चंद्र के गले की महंगी सोने की चेन और हाथ का ब्रेसलेट गायब हैं। परिवार ने लूटपाट के बाद हत्या की आशंका जताई। इसके बाद पुलिस ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए नवाबगंज थाना, साइबर सेल और अन्य इकाइयों की कुल 10 टीमों को जांच में लगाया। सीसीटीवी फुटेज खंगालने के दौरान पुलिस को एक अहम सुराग मिला। एक जून की दोपहर और शाम के समय कंप्यूटर सेंटर के आसपास एक बुर्का पहने महिला दिखाई दी। लेकिन उसकी चाल-ढाल और शरीर की बनावट सामान्य महिला जैसी नहीं लग रही थी। यही शक पुलिस को आरोपी तक पहुंचाने का आधार बना। जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि बुर्के में दिखने वाली कथित महिला दरअसल आजादनगर निवासी मोहित द्विवेदी था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो पूरी साजिश परत-दर-परत खुलती चली गई। मोहित ने स्वीकार किया कि उसने क्राइम पेट्रोल जैसे अपराध आधारित कार्यक्रमों को देखकर यह योजना बनाई थी ताकि पुलिस को गुमराह किया जा सके और उसकी पहचान सामने न आए।

 

पुलिस के अनुसार मोहित ने वारदात से पहले बेहद सुनियोजित तरीके से तैयारी की थी। वह सबसे पहले जेके कैंसर अस्पताल पहुंचा, जहां उसने बुर्का पहना और कई घंटे तक वहीं रुका रहा। इसके पीछे उसकी मंशा यह थी कि अगर पुलिस को फुटेज मिले तो जांच अस्पताल और किसी महिला के रिश्तेदार की दिशा में भटक जाए। वहां से वह बुर्का पहनकर ऑटो से अनवरगंज गया और फिर शाम को वापस नवाबगंज लौटा। अपनी आवाज से पहचान उजागर होने के डर से उसने पहले से कई पर्चियां लिख रखी थीं। ऑटो चालक से बातचीत करने के बजाय वह उन्हीं पर्चियों के जरिए अपनी बात बताता रहा। उसने गूगल लोकेशन का सहारा लेकर चालक को सीधे कंप्यूटर सेंटर वाले अपार्टमेंट तक पहुंचाया। वहां पहुंचने के बाद वह बुर्के में ही सेंटर के अंदर दाखिल हुआ और एडमिशन संबंधी जानकारी लेने की बात कहकर प्रकाश चंद्र के पास पहुंच गया। पुलिस के मुताबिक जैसे ही प्रकाश चंद्र उसकी ओर से मुड़े, मोहित ने उनकी चेन और ब्रेसलेट छीनने की कोशिश की। इस दौरान दोनों के बीच जोरदार संघर्ष हुआ। आरोपी के बयान के अनुसार धक्का-मुक्की में प्रकाश चंद्र फर्श पर गिर गए और उनकी हालत बिगड़ गई। हालांकि पुलिस अभी यह स्पष्ट नहीं कर सकी है कि उनकी मौत कैसे हुई। आरोपी ने बाद में उन्हें घसीटकर दूसरे कमरे में पहुंचाया और बाहर से कुंडी बंद कर फरार हो गया। जांच में यह भी सामने आया कि मोहित और प्रकाश चंद्र के बीच करीब 15 वर्षों की दोस्ती थी। दोनों एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते थे। मोहित पहले प्रकाश चंद्र के सेंटर के ऊपर अपनी कोचिंग भी चलाता था, लेकिन कोरोना काल में उसका कारोबार बंद हो गया था। आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज ने उसे गलत रास्ते पर धकेल दिया। पुलिस के अनुसार होली के दौरान दोनों साथ में खजुराहो घूमने गए थे। वहीं प्रकाश चंद्र ने अपनी सोने की चेन और ब्रेसलेट की कीमत लगभग 10 लाख रुपये बताई थी। बताया जा रहा है कि उसी समय से मोहित के मन में लालच पैदा हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि वह सट्टेबाजी में पैसा लगाता था और भारी कर्ज में डूबा हुआ था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर लूटी गई चेन, ब्रेसलेट, बुर्का और वारदात से जुड़े अन्य साक्ष्य बरामद कर लिए हैं। हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है कि प्रकाश चंद्र की मौत वास्तव में कैसे हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी यह स्पष्ट नहीं हो सका है। अब हिस्टोपैथोलॉजिकल और विसरा जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मौत की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। फिलहाल पुलिस ने आरोपी मोहित द्विवेदी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। लेकिन इस वारदात ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि लालच और आर्थिक दबाव कभी-कभी वर्षों पुराने रिश्तों को भी खत्म कर देते हैं। जिस दोस्त के साथ वर्षों तक भरोसे का रिश्ता रहा, उसी ने पहचान छिपाकर ऐसी साजिश रची कि अंत में एक दोस्त की जान चली गई और दूसरा सलाखों के पीछे पहुंच गया।

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