नई दिल्ली भारत में करेंसी व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव दस्तक देने वाला है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो आने वाले समय में आपके बटुए में कागज के नहीं, बल्कि प्लास्टिक के नोट नजर आएंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जल्द ही 10 और 20 रुपये के पॉलीमर (Polymer) नोटों का बड़े स्तर पर ट्रायल शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना को केंद्र सरकार की मंजूरी भी मिल चुकी है। माना जा रहा है कि शुरुआती चरण में करीब 200 करोड़ पॉलीमर नोटों को बाजार में उतारा जाएगा, ताकि उनकी गुणवत्ता, टिकाऊपन और आम लोगों की प्रतिक्रिया का आकलन किया जा सके।अगर यह ट्रायल सफल रहता है, तो भारत की करेंसी प्रणाली में यह सबसे बड़े बदलावों में से एक होगा। वर्षों से इस्तेमाल हो रहे कागज के नोटों की जगह धीरे-धीरे पॉलीमर नोट लेते नजर आ सकते हैं।
- क्या होते हैं पॉलीमर नोट?
- क्यों ला रहा है RBI प्लास्टिक करेंसी?
- सरकार को होगा बड़ा आर्थिक फायदा
- नकली नोटों पर लगेगी सबसे बड़ी रोक
- क्या पुराने नोट बंद हो जाएंगे?
- किन नोटों से होगी शुरुआत?
- दुनिया के कई देशों में पहले से चल रही है प्लास्टिक करेंसी
- आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा?
- कैसा होगा नया नोट?
- क्या ट्रायल के बाद पूरे देश में लागू होगी नई करेंसी?
- भारत की करेंसी व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी
क्या होते हैं पॉलीमर नोट?
पॉलीमर नोट सामान्य कागज से नहीं, बल्कि एक विशेष प्रकार के टिकाऊ प्लास्टिक मटेरियल पर बनाए जाते हैं। इन्हें इस तरह डिजाइन किया जाता है कि ये लंबे समय तक खराब न हों।इन नोटों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये—
- पानी से खराब नहीं होते।
- आसानी से फटते नहीं।
- गंदगी कम पकड़ते हैं।
- लंबे समय तक नए जैसे दिखाई देते हैं।
- सुरक्षा फीचर्स अधिक मजबूत होते हैं।
यही वजह है कि दुनिया के कई विकसित देशों ने पहले ही पॉलीमर करेंसी को अपनाया हुआ है।
क्यों ला रहा है RBI प्लास्टिक करेंसी?
हर साल करोड़ों कागजी नोट खराब हो जाते हैं। कभी वे भीग जाते हैं, कभी फट जाते हैं और कई बार अधिक इस्तेमाल के कारण उनकी हालत इतनी खराब हो जाती है कि उन्हें वापस लेकर नए नोट छापने पड़ते हैं।इस पूरी प्रक्रिया में सरकार और RBI को हर साल भारी खर्च उठाना पड़ता है।पॉलीमर नोट इस समस्या का स्थायी समाधान माने जा रहे हैं क्योंकि इनकी उम्र सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक होती है।यानी एक बार नोट छपा तो वह लंबे समय तक बाजार में चलता रहेगा।
सरकार को होगा बड़ा आर्थिक फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलीमर नोटों के इस्तेमाल से नोटों की बार-बार छपाई की जरूरत काफी कम हो जाएगी।
इससे—
- छपाई का खर्च घटेगा।
- परिवहन लागत कम होगी।
- पुराने नोटों को नष्ट करने की प्रक्रिया आसान होगी।
- पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है क्योंकि कम नोट छापने पड़ेंगे।
यानी यह फैसला केवल तकनीकी बदलाव नहीं बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नकली नोटों पर लगेगी सबसे बड़ी रोक
भारत लंबे समय से नकली नोटों की समस्या से जूझता रहा है।पॉलीमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।इनमें विशेष पारदर्शी विंडो, माइक्रो प्रिंटिंग, उन्नत सिक्योरिटी फीचर और कई ऐसे तत्व शामिल किए जा सकते हैं जिन्हें कॉपी करना बेहद मुश्किल होता है।यही कारण है कि विशेषज्ञ मानते हैं कि पॉलीमर करेंसी आने से नकली नोटों के कारोबार पर बड़ी चोट पड़ सकती है।
क्या पुराने नोट बंद हो जाएंगे?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्लास्टिक नोट आने के बाद मौजूदा कागजी नोट बंद हो जाएंगे?इसका जवाब है—नहीं।मौजूदा जानकारी के अनुसार, पॉलीमर नोटों का ट्रायल सफल होने के बाद भी कागजी नोट तुरंत बंद नहीं किए जाएंगे।दोनों प्रकार के नोट एक साथ बाजार में चलते रहेंगे।धीरे-धीरे परिस्थितियों के अनुसार आगे का फैसला लिया जाएगा।इसलिए आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
किन नोटों से होगी शुरुआत?
योजना के अनुसार शुरुआती चरण में—
- 10 रुपये
- 20 रुपये
के पॉलीमर नोटों का परीक्षण किया जाएगा।इन छोटे मूल्यवर्ग के नोटों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है और यही सबसे जल्दी खराब भी हो जाते हैं।इसी कारण इनसे शुरुआत करने की रणनीति बनाई गई है।

दुनिया के कई देशों में पहले से चल रही है प्लास्टिक करेंसी
भारत इस दिशा में पहला देश नहीं होगा।दुनिया के कई देशों में वर्षों से पॉलीमर नोट सफलतापूर्वक चल रहे हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
- ऑस्ट्रेलिया
- कनाडा
- यूनाइटेड किंगडम
- न्यूज़ीलैंड
- सिंगापुर
- रोमानिया
- वियतनाम
- ब्रुनेई
इन देशों में पॉलीमर नोटों ने बेहतर टिकाऊपन और सुरक्षा के कारण अच्छी सफलता हासिल की है।
आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा?
पॉलीमर नोटों के आने से आम नागरिकों को भी कई फायदे होंगे।
- जेब में रखने पर जल्दी खराब नहीं होंगे।
- बारिश में भीगने का डर नहीं रहेगा।
- नोट जल्दी नहीं फटेंगे।
- गंदे होने की संभावना कम होगी।
- लंबे समय तक साफ और नए जैसे दिखेंगे।
- नकली नोट मिलने की आशंका कम होगी।
यानी रोजमर्रा के लेन-देन में लोगों को ज्यादा भरोसेमंद करेंसी मिलेगी।
कैसा होगा नया नोट?
हालांकि RBI ने अभी अंतिम डिजाइन सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि नए नोटों में—
- पारदर्शी सिक्योरिटी विंडो
- आधुनिक होलोग्राम
- उन्नत माइक्रो टेक्स्ट
- बेहतर रंग गुणवत्ता
- मजबूत प्लास्टिक बेस
जैसे कई आधुनिक फीचर्स देखने को मिल सकते हैं।

क्या ट्रायल के बाद पूरे देश में लागू होगी नई करेंसी?
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रायल के दौरान यह देखा जाएगा कि—
- नोट कितने टिकाऊ हैं।
- जनता का अनुभव कैसा रहता है।
- बैंकिंग सिस्टम में कोई तकनीकी समस्या तो नहीं आती।
- एटीएम और कैश मशीनों पर इनका क्या असर पड़ता है।
- नकली नोटों पर कितना नियंत्रण मिलता है।
अगर सभी मानकों पर ट्रायल सफल रहता है, तो आने वाले वर्षों में पॉलीमर नोटों का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
भारत की करेंसी व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी
डिजिटल भुगतान के बढ़ते दौर में भी नकदी का महत्व पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। करोड़ों लोग आज भी रोजमर्रा के लेन-देन के लिए नकद पर निर्भर हैं। ऐसे में अगर पॉलीमर नोट सफल होते हैं, तो यह भारतीय करेंसी के इतिहास का एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे न केवल नोट अधिक टिकाऊ होंगे, बल्कि नकली करेंसी पर भी प्रभावी रोक लग सकती है और सरकार का खर्च भी कम होगा।हालांकि अंतिम फैसला ट्रायल के नतीजों पर निर्भर करेगा, लेकिन इतना तय है कि आने वाले समय में भारतीयों के बटुए में पारंपरिक कागजी नोटों के साथ आधुनिक प्लास्टिक नोट भी दिखाई दे सकते हैं।
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