नई दिल्ली संसद के मानसून सत्र में मंगलवार को उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव सिर पर ‘JUSTICE’ (जस्टिस) लिखी सफेद पट्टी बांधकर संसद पहुंचे। उनका यह अनोखा अंदाज देखते ही मीडिया और अन्य सांसदों का ध्यान उनकी ओर खिंच गया। संसद परिसर में उन्होंने छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर तीखे सवाल उठाए। उनका कहना था कि देश में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं की आवाज को लाठीचार्ज और बल प्रयोग के जरिए दबाने की कोशिश की जा रही है।पप्पू यादव ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन जिस तरह प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार किया जा रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले में जवाबदेही तय करने और छात्रों को न्याय दिलाने की मांग की।
- ‘JUSTICE’ की पट्टी बन गई विरोध का प्रतीक
- छात्र आंदोलन पर सरकार को घेरा
- ‘लाठी से नहीं दबेगी युवाओं की आवाज’
- धर्मेंद्र प्रधान पर भी साधा निशाना
- सरकार से मांगा जवाब
- संसद परिसर में छिड़ी राजनीतिक बहस
- छात्र आंदोलन क्यों बना बड़ा मुद्दा?
- सोशल मीडिया पर भी छाए पप्पू यादव
- क्या बोले पप्पू यादव?
- राजनीतिक तापमान और बढ़ने के आसार
‘JUSTICE’ की पट्टी बन गई विरोध का प्रतीक
संसद पहुंचते ही पप्पू यादव के सिर पर बंधी ‘JUSTICE’ लिखी पट्टी चर्चा का विषय बन गई। उन्होंने कहा कि यह केवल एक पट्टी नहीं, बल्कि उन छात्रों और युवाओं के लिए न्याय की मांग का प्रतीक है जो अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतरे हैं।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सुनना सरकार का दायित्व है, लेकिन यदि आवाज उठाने वालों पर ही बल प्रयोग होगा तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा।
छात्र आंदोलन पर सरकार को घेरा
मीडिया से बातचीत में पप्पू यादव ने कहा कि हाल के दिनों में छात्रों के आंदोलनों पर जिस तरह पुलिस कार्रवाई हुई है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं और विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।उन्होंने कहा कि छात्र अपने भविष्य, रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए, न कि बल प्रयोग करना चाहिए।
‘लाठी से नहीं दबेगी युवाओं की आवाज’
पप्पू यादव ने कहा कि देश का युवा अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है और उसे डराकर या दबाकर चुप नहीं कराया जा सकता।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत संवाद है। यदि सरकार युवाओं की बात सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई का रास्ता अपनाएगी, तो इससे असंतोष और बढ़ेगा।उन्होंने सरकार से अपील की कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कराई जाए।
धर्मेंद्र प्रधान पर भी साधा निशाना
अपने बयान के दौरान पप्पू यादव ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पगड़ी सम्मान का प्रतीक होती है और उसे ऐसे व्यक्ति को पहनाना उचित नहीं है, जिस पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हों।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सम्मान के प्रतीक का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश देने के लिए किया जाना चाहिए? उनके इस बयान के बाद संसद परिसर में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई।
सरकार से मांगा जवाब
पप्पू यादव ने केंद्र सरकार से पूछा कि यदि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं, तो उनके खिलाफ बल प्रयोग क्यों किया जा रहा है? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन कोई अपराध नहीं है।उन्होंने मांग की कि जिन छात्रों पर कार्रवाई हुई है, उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
संसद परिसर में छिड़ी राजनीतिक बहस
पप्पू यादव के इस विरोध प्रदर्शन के बाद संसद परिसर में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने छात्र आंदोलनों और युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सत्तापक्ष ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया।मानसून सत्र के दौरान पहले से ही कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। ऐसे में पप्पू यादव का यह प्रतीकात्मक विरोध भी राजनीतिक बहस का नया विषय बन गया।

छात्र आंदोलन क्यों बना बड़ा मुद्दा?
हाल के दिनों में विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं और अन्य मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए गए हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान कई जगह पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आईं, जिसके बाद विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा है।इसी मुद्दे को संसद के भीतर और बाहर उठाते हुए पप्पू यादव ने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी छाए पप्पू यादव
सिर पर ‘JUSTICE’ लिखी पट्टी बांधकर संसद पहुंचने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। समर्थकों ने इसे न्याय की मांग का प्रतीक बताया, जबकि विरोधियों ने इसे राजनीतिक स्टंट करार दिया।कुछ ही देर में यह मुद्दा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चर्चा का विषय बन गया और लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं।
क्या बोले पप्पू यादव?
पप्पू यादव ने कहा कि देश का संविधान हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार देता है। यदि छात्र अपने भविष्य को लेकर सवाल पूछ रहे हैं तो उन्हें सुना जाना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि उनकी यह लड़ाई किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं को न्याय दिलाने के लिए है।
राजनीतिक तापमान और बढ़ने के आसार
मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है। ऐसे में पप्पू यादव का यह विरोध आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार छात्र आंदोलन और विपक्ष के आरोपों पर क्या जवाब देती है।
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