कभी भी गिर सकता है स्कूल भवन! मासूमों की जान पर मंडराया खतरा, कार्रवाई की उठी मांग

Editorial
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रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित

फर्रुखाबाद जिले के शमसाबाद कस्बे में स्थित प्राथमिक विद्यालय शमसाबाद प्रथम (अंग्रेजी माध्यम) का जर्जर भवन अब मासूम बच्चों की जान के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। भवन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि स्थानीय लोगों, शिक्षकों और अभिभावकों को हर दिन किसी बड़े हादसे का डर सताने लगा है। दीवारों में गहरी दरारें, कमजोर छत और जर्जर ढांचा इस बात की गवाही दे रहा है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।लगातार चेतावनी और कई बार पत्र भेजे जाने के बावजूद कार्रवाई न होने से नाराज नगर पंचायत प्रशासन अब खुलकर सामने आ गया है। नगर पंचायत शमसाबाद के चेयरमैन प्रतिनिधि नदीम अहमद फारूकी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) से मुलाकात कर जर्जर भवन को तत्काल ध्वस्त कराने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

बच्चों की सुरक्षा पर सबसे बड़ा सवाल

विद्यालय में प्रतिदिन दर्जनों छात्र-छात्राएं पढ़ाई करने आते हैं। ऐसे में जर्जर भवन की स्थिति ने सभी को चिंता में डाल दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी दिन भवन का कोई हिस्सा अचानक गिर गया तो बड़ी जनहानि हो सकती है।अभिभावकों का कहना है कि बच्चे पढ़ने तो स्कूल जाते हैं, लेकिन उन्हें हर समय डर लगा रहता है कि कहीं कोई हादसा न हो जाए। उनका मानना है कि शिक्षा से पहले बच्चों की सुरक्षा सबसे जरूरी है।

प्रधानाध्यापिका ने पहले ही दे दी थी चेतावनी

इस गंभीर खतरे को लेकर विद्यालय की प्रधानाध्यापिका ने काफी पहले ही शिक्षा विभाग को सतर्क कर दिया था।जानकारी के अनुसार 2 अगस्त 2025 को पंजीकृत डाक के माध्यम से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर भवन की जर्जर स्थिति से अवगत कराया गया था।इसके बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 22 जुलाई 2026 को एक बार फिर विभाग को पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई।दोनों पत्रों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि विद्यालय का पुराना भवन अत्यंत खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है और कभी भी ढह सकता है।

नगर पंचायत ने भी कई बार किया अनुरोध

केवल विद्यालय प्रशासन ही नहीं, बल्कि नगर पंचायत भी इस मुद्दे को लगातार उठाती रही है।5 अगस्त 2024 को नगर पंचायत कार्यालय की ओर से भी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजकर भवन के ध्वस्तीकरण और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई थी।इसके बावजूद लंबे समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती गई।

चेयरमैन प्रतिनिधि खुद पहुंचे बीएसए कार्यालय

जब लगातार पत्रों के बावजूद समाधान नहीं निकला तो चेयरमैन प्रतिनिधि नदीम अहमद फारूकी स्वयं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से मिलने पहुंचे।उन्होंने बीएसए को पूरे मामले से अवगत कराया और कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बच्चों की जान जोखिम में पड़ सकती है।उन्होंने मांग की कि जर्जर भवन को तत्काल ध्वस्त कराया जाए और परिसर को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाए।

बीएसए ने दिया कार्रवाई का भरोसा

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण का परीक्षण कराया जाएगा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।इस आश्वासन के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद जगी है कि वर्षों से लंबित यह मामला अब जल्द समाधान की ओर बढ़ सकता है।

ध्वस्तीकरण के बाद बच्चों को मिलेगा बड़ा लाभ

नगर पंचायत का कहना है कि जर्जर भवन हटने के बाद विद्यालय परिसर में पर्याप्त खाली स्थान उपलब्ध हो जाएगा।

इस स्थान का उपयोग—

  • बच्चों के खेल मैदान के रूप में,
  • प्रार्थना सभा,
  • खेलकूद प्रतियोगिताओं,
  • सांस्कृतिक कार्यक्रमों,
  • और अन्य पाठ्य सहगामी गतिविधियों

के लिए किया जा सकेगा।इससे विद्यालय का शैक्षिक माहौल भी पहले की तुलना में कहीं बेहतर हो सकेगा।

अभिभावकों ने उठाई तत्काल कार्रवाई की मांग

विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि वे लंबे समय से इस समस्या को लेकर चिंतित हैं।उनका कहना है कि बारिश के मौसम में भवन की स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।उन्होंने प्रशासन से अपील की कि किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय पहले ही सुरक्षा के सभी इंतजाम किए जाएं।

स्थानीय लोगों में भी बढ़ी चिंता

कस्बे के लोगों का कहना है कि विद्यालय जैसे संवेदनशील स्थान पर जर्जर भवन का बने रहना गंभीर लापरवाही है।उनका मानना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा कोई भी मामला प्राथमिकता पर होना चाहिए और ऐसे भवनों को तत्काल हटाया जाना चाहिए।

बारिश ने बढ़ाया खतरा

लगातार हो रही बारिश के कारण भवन की दीवारें और छत पहले से अधिक कमजोर होती जा रही हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने और क्षतिग्रस्त भवनों में वर्षा के दौरान दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते तकनीकी निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई बेहद जरूरी होती है।

अब सबकी निगाह प्रशासन पर

लगातार पत्राचार, नगर पंचायत की पहल और बीएसए से हुई मुलाकात के बाद अब स्थानीय लोगों की निगाह प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है।यदि जल्द ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू होती है तो न केवल संभावित हादसे को टाला जा सकेगा, बल्कि विद्यालय परिसर को सुरक्षित और आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में भी बड़ा कदम माना जाएगा।

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