
संभलउत्तर प्रदेश के संभल जिले से इस वक्त की सबसे बड़ी, बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे सूबे की सियासत और प्रशासनिक महकमे में एक जबरदस्त उबाल ला दिया है। संभल के नखासा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव कसेरुआ में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से निर्मित दो मंजिला ‘मुस्तफ़ा क़ादरी मस्जिद’ को प्रशासनिक आदेश के बाद भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी में जमींदोज किया जा रहा था। इस महाकार्रवाई के दौरान मस्जिद के भीतर से कुछ ऐसी सामग्री बरामद हुई है, जिसने मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़ा दिए और देखते ही देखते यह पूरा मामला एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया। इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच जब पुलिस की एक विशेष टीम मस्जिद की सुरक्षा और पूरी तरह खाली होने की जांच करने के लिए इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल पर बने मुख्य हॉल में दाखिल हुई, तो वहां तलाशी के दौरान कुछ ऐसा मिला जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया। मुख्य हॉल में रखे एक लकड़ी के तख्त पर बिछे गद्दे के नीचे बेहद गोपनीय तरीके से छिपाकर रखे गए ‘आई लव मुहम्मद’ स्लोगन वाले 49 प्रिंटेड पोस्टर और एक गहरे हरे रंग का झंडा बरामद हुआ, जिसे पहली नजर में देखने पर पुलिस अधिकारियों ने हूबहू पाकिस्तानी झंडे जैसा प्रतीत होने का दावा किया। इस आपत्तिजनक और देशविरोधी सामग्री के मिलने की भनक लगते ही पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में इस संवेदनशील मामले को क्षेत्र की शांति, सौहार्द और देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा मानते हुए पुलिस ने बेहद सख्त कानूनी रुख अख्तियार कर लिया।

नखासा थाने के उप निरीक्षक अरुण कुमार की अगुवाई में कांस्टेबल शुभम कुमार, अजय कुमार, राजन पंवार और विनय बर्मन सहित भारी पुलिस बल शनिवार को कसेरुआ गांव में अवैध मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की ड्यूटी में तैनात था। पुलिस टीम यह सुनिश्चित करने के लिए भवन के चप्पे-चप्पे की जांच कर रही थी कि मलबे के नीचे कोई व्यक्ति या संवेदनशील वस्तु न दब जाए। इसी निरीक्षण के दौरान मस्जिद की सबसे ऊपरी मंजिल पर बने मुख्य हॉल में रखे तख्त के गद्दे के नीचे से इन 49 पोस्टरों और पाकिस्तानी झंडे जैसे दिखने वाले हरे झंडे को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया। इस बड़ी बरामदगी के बाद नखासा थाना पुलिस ने रविवार को एक बेहद कड़ा कदम उठाते हुए मस्जिद के मुतवल्ली जाकिर, तसलीम, जाकिर हुसैन, भूरे अली, शरफुद्दीन, दिल शरीफ, मोहब्बत अली और नन्हें समेत इसी गांव के कुल आठ नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी के मुताबिक, इन सभी आरोपियों पर समाज में वैमनस्य फैलाने, धार्मिक भावनाओं को भड़काने और देश की संप्रभुता के खिलाफ काम करने के संदेह में कार्रवाई की गई है। कानून के जानकारों और वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार के अनुसार, इन सभी आठों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की बेहद सख्त और गंभीर धारा 353 (2) के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई है। यह एक पूर्णतया गैर-जमानती अपराध है, जिसमें आरोप साबित होने पर दोषियों को तीन वर्ष तक का कड़ा कारावास, भारी जुर्माना या फिर ये दोनों ही सजाएं एक साथ भुगतनी पड़ सकती हैं, जिसके चलते आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

इस संवेदनशील बरामदगी के बीच कसेरुआ गांव में मस्जिद को जमींदोज करने का सिलसिला रविवार को भी पूरी शिद्दत और आक्रामकता के साथ जारी रहा। जिला प्रशासन द्वारा तैनात किए गए कई भारी-भरकम बुलडोजर और क्रेन लगातार कंक्रीट के इस दो मंजिला ऊंचे ढांचे को मलबे के ढेर में तब्दील करने में जुटे रहे। प्रशासनिक अधिकारियों से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, रविवार देर शाम तक मस्जिद का लगभग 70 फीसदी हिस्सा पूरी तरह से ध्वस्त किया जा चुका है और बाकी बचे निर्माण को भी अगले एक से दो दिनों के भीतर पूरी तरह से ढहाकर जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण से मुक्त करा लिया जाएगा। दरअसल, यह पूरी कानूनी लड़ाई राजस्व अभिलेखों के आधार पर लड़ी गई, जिसमें गाटा संख्या 409 की यह भूमि साफ तौर पर कब्रिस्तान की दर्ज पाई गई थी। इसी कब्रिस्तान की सरकारी जमीन पर बिना किसी अनुमति के इस आलीशान दो मंजिला मस्जिद का निर्माण कर लिया गया था। स्थानीय ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन ने जब इस मामले की गहन सुनवाई शुरू की, तो तहसीलदार की अदालत में मस्जिद कमेटी अपनी पैरवी के दौरान इस जमीन पर अपने मालिकाना हक या निर्माण से जुड़ा कोई भी पुख्ता कानूनी दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत करने में पूरी तरह नाकाम रही। इसके बाद तहसीलदार के आदेश पर शनिवार सुबह से ही भारी पुलिस बल, पीएसी और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में ध्वस्तीकरण की यह बड़ी कार्रवाई शुरू की गई। पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया है और दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों तथा डंपरों की मदद से दिन-रात मस्जिद का मलबा हटाया जा रहा है ताकि माहौल को पूरी तरह नियंत्रित रखा जा सके।
मस्जिद पर चले इस सरकारी बुलडोजर और उसके अंदर मिले झंडे व पोस्टरों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई ने अब उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बहुत बड़ा भूचाल ला दिया है, जहां मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। संभल से समाजवादी पार्टी के कद्दावर सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने इस पूरी कार्रवाई के विरोध में रविवार को एक बेहद तल्ख और ताबड़तोड़ प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। पत्रकारों के कैमरों के सामने सांसद बर्क ने सीधे तौर पर जिला प्रशासन की नीयत पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि यह मुस्तफ़ा क़ादरी मस्जिद कोई नई या अवैध इमारत नहीं है, बल्कि पिछले लगभग 150 वर्षों से इस स्थान पर मौजूद है और इसके पक्ष में कई ऐतिहासिक और पुख्ता प्रमाण भी उपलब्ध हैं। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यह मस्जिद साल 1984 से सुन्नी वक्फ बोर्ड में बकायदा पंजीकृत है और इससे भी बड़ी बात यह है कि इस पूरी जमीन का प्रकरण वक्फ ट्रिब्यूनल बोर्ड के समक्ष विचाराधीन चल रहा है। सांसद बर्क ने आरोप लगाया कि जब मामला उच्च न्यायालय या ट्रिब्यूनल के पास हो, तब स्थानीय प्रशासन को इस तरह की एकतरफा और जल्दबाजी में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने का कोई कानूनी अधिकार ही नहीं था। मस्जिद के भीतर से मिले हरे रंग के झंडे पर हुए विवाद का जवाब देते हुए सपा सांसद ने पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने कहा कि हमारा मजहबी झंडा हमेशा से हरे रंग का होता है, जिसका उपयोग दुनिया भर के मुसलमान पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिन यानी ईद मिलादुन्नबी के पवित्र मौके पर बेहद अकीदत के साथ करते हैं। इसे पाकिस्तान या बांग्लादेश का झंडा कहना सरासर गलत, बेबुनियाद और दुर्भावना से प्रेरित है। प्रशासनिक अधिकारियों को अच्छी तरह पता है कि उन्होंने एक बेहद गलत और गैर-कानूनी कार्रवाई की है, इसलिए वे जनता का ध्यान भटकाने और मामले को सांप्रदायिक रंग देने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिलेगी। उन्होंने स्थानीय जनता से आह्वान किया कि वे इस दमनकारी कार्रवाई से कतई न डरें, जागरूक बनें और इस नाइंसाफी के खिलाफ एकजुट होकर माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएं, क्योंकि अदालत से ही अंततः इंसाफ मिलेगा। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि एक सांसद होने के नाते वह कानूनी दायरे में रहकर अपने लोगों की हक की लड़ाई लड़ेंगे और गलत काम करने वाले अधिकारियों को अदालत के कटघरे में खड़ा करेंगे। देश में बढ़ती महंगाई पर भी तंज कसते हुए सांसद ने कहा कि सरकार को जनता को राहत देने के लिए टैक्स सस्पेंड कर देने चाहिए, न कि इस तरह की कार्रवाइयों में ऊर्जा लगानी चाहिए।

सांसद बर्क के इस तीखे हमले के साथ ही असमोली विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी की तेजतर्रार विधायक पिंकी यादव ने भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक बेहद तल्ख पोस्ट साझा करते हुए कसेरुआ गांव में मस्जिद को हटाने की इस कार्रवाई को पूरी तरह से असंवैधानिक और लोकतंत्र की हत्या करार दिया। विधायक पिंकी यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि वर्तमान सरकार के सीधे इशारे पर स्थानीय जिला प्रशासन ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए, बेहद मनमाने और असंवैधानिक तरीके से इस धार्मिक स्थल पर बुलडोजर चलवाया है, जो कि पूरी तरह से निंदनीय और गलत है। उन्होंने प्रशासन की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए यह भी खुलासा किया कि इस संवेदनशील प्रकरण की जमीनी हकीकत और जानकारी लेने के लिए उन्होंने खुद जिले के आला प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार फोन मिलाए, लेकिन अधिकारियों ने डर और द्वेष के कारण उनका फोन तक रिसीव नहीं किया और केवल उनके स्टेनो ने फोन उठाकर बात को टाल दिया। उन्होंने कड़े शब्दों में लिखा कि भारतीय जनता पार्टी ने अब बुलडोजर को न्याय का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी गैर-कानूनी ताकत, दमनकारी नीतियों और तानाशाही को दिखाने का एक खौफनाक प्रतीक बना लिया है। संभल में घटी इस पूरी घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर सांप्रदायिक और सामाजिक ताने-बाने को बेहद संवेदनशील बना दिया है, बल्कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा कानूनी और राजनीतिक गलियारों में एक बहुत बड़े टकराव का सबब बनने जा रहा है, क्योंकि एक तरफ जहां प्रशासन पूरी मस्जिद को नेस्तनाबूद करने पर आमादा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस लड़ाई को देश की सबसे बड़ी अदालतों तक ले जाने का पूरा मन बना चुका है।
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