उत्तर प्रदेश में मानसून की तेज बारिश ने सिर्फ जनजीवन ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की लागत से बने हाईटेक एक्सप्रेसवे और हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का कुछ ही दिन पहले बड़े स्तर पर उद्घाटन हुआ था, वह पहली ही भारी बारिश की परीक्षा में कमजोर पड़ गया। उद्घाटन के महज 12 दिन बाद उन्नाव में एक्सप्रेसवे की सड़क धंस गई, जिसके बाद निर्माण एजेंसी, प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर सवालों की बौछार शुरू हो गई।यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, दिल्ली-जयपुर हाईवे और देहरादून का नया पुल भी बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त होने की खबरों में रहे हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने देशभर में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
उद्घाटन के 12वें दिन धंसा कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे
प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को 13 जुलाई को जनता को समर्पित किया गया था। उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे थे।लेकिन उद्घाटन के केवल 12 दिन बाद ही उन्नाव जिले में अचलगंज कोरारी टोल प्लाजा से लगभग एक किलोमीटर आगे लखनऊ जाने वाली लेन पर सड़क का करीब 5 से 7 मीटर हिस्सा अचानक धंस गया।यह घटना किलोमीटर संख्या 64.4 पर हुई, जिससे गुजर रहे वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया।

वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क धंसने का वीडियो बनाया, जिसे सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया गया। वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन और निर्माण एजेंसी में हड़कंप मच गया।निर्माण एजेंसी की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त हिस्से की अस्थायी मरम्मत शुरू कर दी। हालांकि इस घटना ने करोड़ों रुपये की लागत से बने एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

बारिश ने क्यों बढ़ाई परेशानी?
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बारिश के कारण यदि सड़क के नीचे जल निकासी की व्यवस्था मजबूत नहीं होती या मिट्टी का समुचित संपीड़न (कम्पैक्शन) नहीं किया गया हो, तो सड़क धंसने का खतरा बढ़ जाता है।ऐसी घटनाएं निर्माण गुणवत्ता, ड्रेनेज सिस्टम और नियमित निगरानी की अहमियत को भी सामने लाती हैं।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर भी पहले सामने आ चुकी हैं खामियां
यह पहला मौका नहीं है जब किसी एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद सवाल उठे हों। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, जिसका उद्घाटन नवंबर 2021 में हुआ था, वहां भी निर्माण के दौरान और बाद में कई तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं।
- मई 2021 में कुवांसी-हलियापुर के बीच अंडरपास की बीम में दरारें आई थीं।
- बारिश के दौरान मिट्टी बहने की घटनाएं भी सामने आईं।
- बाद के वर्षों में आजमगढ़ और सुल्तानपुर के पास सड़क में लंबी दरारें और धंसान की खबरें आईं।
- सुल्तानपुर में करीब 15 फीट गहरा गड्ढा बनने से एक कार उसमें गिर गई थी।
इन घटनाओं ने उस समय भी निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए थे।
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे भी नहीं बच पाया
जुलाई 2022 में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा भी भारी बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था।उस समय भी विपक्ष ने सरकार पर निर्माण में लापरवाही का आरोप लगाया था, जबकि अधिकारियों ने तत्काल मरम्मत कराए जाने की बात कही थी।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भी पहली बारिश का असर
उत्तर प्रदेश से बाहर भी मानसून ने कई नई परियोजनाओं की परीक्षा ली।दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर पहली ही तेज बारिश के दौरान सड़क के नीचे की मिट्टी बह गई और कई स्थानों पर सड़क धंस गई।बताया गया कि वर्षा जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़क के नीचे खाली जगह बन गई, जिससे धंसान हुई।निर्माण एजेंसी ने तत्काल बजरी डालकर अस्थायी मरम्मत की, जबकि स्थायी सुधार का भरोसा दिया गया।

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर कई किलोमीटर लंबा जाम
हरियाणा के गुरुग्राम में डेढ़ घंटे की तेज बारिश ने पूरे शहर को पानी-पानी कर दिया।राष्ट्रीय राजमार्ग-48 (दिल्ली-जयपुर हाईवे) पर सड़क धंसने के कारण दो लेन बंद करनी पड़ीं।इसके चलते करीब 10 से 12 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। हजारों वाहन घंटों फंसे रहे।स्कूल से लौट रहे बच्चे, दफ्तर जाने वाले कर्मचारी और आम नागरिक भारी परेशानी में दिखाई दिए।
देहरादून में करोड़ों का पुल भी नहीं बच पाया
उत्तराखंड के देहरादून में नंदा की चौकी के पास लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से बना नया पुल भी पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया।पुल के धंसने के बाद वहां आवाजाही रोकनी पड़ी, जिससे स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
बार-बार क्यों धंस रही हैं सड़कें?
इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी घटनाओं के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं—
- वर्षा जल निकासी की कमजोर व्यवस्था।
- सड़क के नीचे मिट्टी का पर्याप्त संपीड़न न होना।
- निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से जुड़े मुद्दे।
- भारी बारिश के दौरान जलभराव।
- समय पर तकनीकी निरीक्षण और रखरखाव का अभाव।
हालांकि किसी भी परियोजना में वास्तविक कारण का पता तकनीकी जांच के बाद ही लगाया जा सकता है।
विपक्ष ने उठाए सवाल, सरकार पर बढ़ा दबाव
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर भी एक्सप्रेसवे की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।दूसरी ओर, संबंधित विभागों का कहना है कि जहां भी क्षति हुई है, वहां तत्काल मरम्मत कराई जा रही है और तकनीकी टीमों से जांच भी कराई जा रही है।
जनता पूछ रही—क्या बारिश इतनी बड़ी परीक्षा है?
करोड़ों-अरबों रुपये की लागत से बनने वाले एक्सप्रेसवे और हाईवे से लोगों को सुरक्षित और तेज सफर की उम्मीद रहती है।ऐसे में उद्घाटन के कुछ ही दिनों या पहली बारिश में सड़क धंसने जैसी घटनाएं आम लोगों के मन में कई सवाल खड़े करती हैं। लोग जानना चाहते हैं कि यदि नई सड़कें पहली ही बारिश में प्रभावित हो रही हैं, तो उनकी दीर्घकालिक मजबूती कैसे सुनिश्चित होगी।
अब जांच और जवाबदेही पर निगाहें
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की धंसान के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित एजेंसियां केवल मरम्मत तक सीमित रहेंगी या निर्माण की गुणवत्ता की भी गहन जांच होगी।यदि तकनीकी जांच में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों पर कार्रवाई की मांग भी तेज हो सकती है।
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