नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में एक बार फिर पाकिस्तान समर्थित आतंकी साजिश का बड़ा खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक सुनियोजित अभियान के तहत पाकिस्तान समर्थित आतंकी शाहबाज अंसारी के एक और मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से एक चेकोस्लोवाकिया निर्मित सब-मशीन गन (SMG), तीन अन्य अत्याधुनिक हथियार और 82 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह घातक हथियार पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत में तस्करी कर लाए गए थे। इस कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि समय रहते एक संभावित आतंकी साजिश को विफल कर दिया गया।दिल्ली पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपियों का संबंध पाकिस्तान समर्थित आतंकी नेटवर्क से है। जांच एजेंसियों का मानना है कि बरामद हथियारों का इस्तेमाल किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था। फिलहाल दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क, उसके फंडिंग स्रोत और अन्य सहयोगियों की जानकारी जुटाई जा सके।

नेपाल के रास्ते भारत पहुंची सब-मशीन गन
जांच में सामने आया कि बरामद की गई सब-मशीन गन चेकोस्लोवाकिया में निर्मित है। पुलिस के अनुसार इस हथियार को पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत में तस्करी कर लाया गया। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि आरोपी सलीम उर्फ ‘सलीम पिस्टल’ इस हथियार को भारत तक पहुंचाने में अहम कड़ी था।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कोई सामान्य हथियार नहीं बल्कि अत्यधिक मारक क्षमता वाला सैन्य श्रेणी का हथियार है। इसके साथ बरामद अन्य हथियार और बड़ी संख्या में कारतूस इस बात की ओर संकेत करते हैं कि नेटवर्क किसी गंभीर आपराधिक या आतंकी गतिविधि की तैयारी कर रहा था।
पहले भी मिल चुकी है मशीन गन
स्पेशल सेल के अधिकारियों ने बताया कि इसी आतंकी मॉड्यूल से जुड़े सदस्यों के पास से पहले भी एक मशीन गन बरामद की जा चुकी है। लगातार हो रही बरामदगियां इस बात का संकेत हैं कि यह नेटवर्क लंबे समय से देश में अवैध हथियारों की आपूर्ति और आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने में सक्रिय रहा है।जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि अब तक इस नेटवर्क के जरिए कितने हथियार देश के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाए जा चुके हैं और किन लोगों तक उनकी सप्लाई की गई।

6 जुलाई को भी हुआ था बड़ा खुलासा
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इससे पहले 6 जुलाई को भी बड़ी सफलता हासिल कर चुकी है। उस दिन कुख्यात शहजाद भट्टी नेटवर्क के दो अलग-अलग मॉड्यूल का पर्दाफाश किया गया था। दिल्ली और पंजाब में एक साथ की गई छापेमारी के दौरान छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था।उनके कब्जे से बड़ी संख्या में अवैध पिस्तौल, हथियार और पेट्रोल बम (मोलोटोव कॉकटेल) बरामद किए गए थे। उस कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों को कई महत्वपूर्ण सुराग मिले थे, जिनके आधार पर अब शाहबाज अंसारी के इस नए मॉड्यूल तक पहुंचना संभव हुआ।
दो अलग-अलग नेटवर्क से चल रहा था पूरा ऑपरेशन
दिल्ली पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी दो अलग-अलग लेकिन आपस में जुड़े नेटवर्क के माध्यम से काम कर रहे थे।
पहला नेटवर्क देश विरोधी और आतंकी गतिविधियों से जुड़ा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसका उद्देश्य देश में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देना और दहशत फैलाना था।
दूसरा नेटवर्क पूरी तरह अवैध हथियारों की तस्करी में सक्रिय था। यह नेटवर्क अपराधियों, गैंगस्टरों और अन्य आपराधिक गिरोहों तक अत्याधुनिक हथियार पहुंचाने का काम करता था। पुलिस का मानना है कि हथियारों की इस सप्लाई चेन का इस्तेमाल आतंकी और संगठित आपराधिक गतिविधियों, दोनों में किया जा सकता था।
82 कारतूस और अत्याधुनिक हथियारों ने बढ़ाई चिंता
इस कार्रवाई में बरामद 82 जिंदा कारतूस और चार हथियार सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद किसी सामान्य आपराधिक घटना के लिए नहीं, बल्कि सुनियोजित और बड़े हमले की तैयारी का संकेत हो सकते हैं।फॉरेंसिक और बैलिस्टिक विशेषज्ञ बरामद हथियारों की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल पहले किसी वारदात में हुआ है या नहीं।
आतंकी फंडिंग और विदेशी लिंक की जांच तेज
स्पेशल सेल अब इस बात की भी जांच कर रही है कि हथियारों की खरीद और तस्करी के लिए धन कहां से आया। जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण, बैंक लेनदेन और संपर्कों की जांच कर रही हैं।इसके साथ ही केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और अन्य राज्यों की पुलिस से भी जानकारी साझा की जा रही है ताकि इस नेटवर्क के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का पता लगाया जा सके।

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही हाई अलर्ट पर हैं। ऐसे समय में इस मॉड्यूल का पकड़ा जाना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सीमा पार बैठे आतंकी संगठन लगातार भारत में अपने नेटवर्क को सक्रिय रखने की कोशिश कर रहे हैं।सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि समय रहते हुई इस कार्रवाई ने एक संभावित बड़ी आतंकी साजिश को विफल कर दिया है।
जांच जारी, और गिरफ्तारियां संभव
दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है और कई अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की तैयारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई एक बार फिर दिखाती है कि सुरक्षा एजेंसियां सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क और अवैध हथियार तस्करी पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। समय रहते इस मॉड्यूल का पर्दाफाश कर न केवल बड़ी मात्रा में घातक हथियार बरामद किए गए, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए संभावित खतरे को भी टाल दिया गया। अब जांच एजेंसियों का पूरा फोकस इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर इसके हर सदस्य और सहयोगी को कानून के दायरे में लाने पर है।
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