देहरादून करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विश्व प्रसिद्ध कांवड़ मेले को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए उत्तराखंड पुलिस ने इस बार अब तक की सबसे हाईटेक और व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की है। पहली बार मेले में केवल पुलिस बल ही नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फेस रिकग्निशन कैमरे, साइबर कमांडो और विशेष निगरानी टीमें भी पूरी तरह सक्रिय रहेंगी। सबसे बड़ा कदम यह है कि पांच राज्यों ने उत्तराखंड पुलिस को करीब आठ से दस हजार इनामी और आदतन अपराधियों की फोटोयुक्त सूची सौंप दी है, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ में छिपकर आने वाले अपराधियों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई की जा सके।इस पूरी रणनीति का खुलासा करते हुए आईजी एसटीएफ डॉ. नीलेश आनंद भरणे ने कहा कि इस बार कांवड़ मेले में सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाया गया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “पड़ोसी राज्यों ने अपने ज्यादातर इनामी बदमाशों की सूची उपलब्ध कराई है। इन पर नजर रखने के लिए साइबर पुलिस की विशेष टीम बनाई गई है। ताकि मेले में कोई ऐसा अपराधी आए तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी गहन निगरानी की जाएगी। आपत्तिजनक वीडियो और फोटो वायरल करने वालों को साइबर पुलिस चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।”
- पांच राज्यों ने साझा किया अपराधियों का पूरा डाटा
- फेस रिकग्निशन कैमरे करेंगे तुरंत पहचान
- साइबर कमांडो की होगी चौबीसों घंटे तैनाती
- AI बना नई चुनौती, पुलिस भी पूरी तरह तैयार
- सोशल मीडिया पर भी रहेगी पैनी नजर
- श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
- अपराधियों के लिए सख्त चेतावनी
- हाईटेक सुरक्षा के साथ शुरू होगी कांवड़ यात्रा
पांच राज्यों ने साझा किया अपराधियों का पूरा डाटा
कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में यात्रा मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण और साइबर सुरक्षा को लेकर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।बैठक के दौरान पड़ोसी राज्यों ने अपने यहां के इनामी और आदतन अपराधियों का फोटोयुक्त रिकॉर्ड उत्तराखंड पुलिस को उपलब्ध कराया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस सूची में करीब 8 से 10 हजार अपराधियों का विवरण शामिल है। इनका पूरा डाटा अब उत्तराखंड पुलिस के विशेष निगरानी सिस्टम में जोड़ा जा रहा है।

फेस रिकग्निशन कैमरे करेंगे तुरंत पहचान
इस बार कांवड़ मेले में जगह-जगह लगाए गए फेस रिकग्निशन कैमरे सुरक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत होंगे। जैसे ही कोई संदिग्ध या सूचीबद्ध इनामी अपराधी कैमरे की जद में आएगा, उसकी तस्वीर उपलब्ध डाटाबेस से मिलाई जाएगी। पहचान होते ही कंट्रोल रूम को तुरंत अलर्ट मिलेगा और नजदीकी पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करेगी।पुलिस का मानना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ में अपराधियों की पहचान करना सामान्य तरीके से बेहद कठिन होता है, लेकिन आधुनिक तकनीक इस चुनौती को काफी हद तक आसान बना देगी।
साइबर कमांडो की होगी चौबीसों घंटे तैनाती
उत्तराखंड पुलिस ने पहली बार कांवड़ मेले के लिए विशेष साइबर कमांडो टीम भी तैनात की है। यह टीम विभिन्न कंट्रोल रूम से लगातार सीसीटीवी कैमरों, फेस रिकग्निशन सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की निगरानी करेगी।विशेषज्ञ साइबर पुलिसकर्मी हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखेंगे। यदि किसी व्यक्ति की गतिविधि संदिग्ध दिखाई देती है या कोई तकनीकी अलर्ट मिलता है, तो संबंधित क्षेत्र की पुलिस को तत्काल सूचना भेजी जाएगी।
AI बना नई चुनौती, पुलिस भी पूरी तरह तैयार
आईजी एसटीएफ डॉ. नीलेश आनंद भरणे ने कहा कि इस बार सबसे बड़ी चुनौती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए फर्जी वीडियो और तस्वीरें भी होंगी। उन्होंने बताया कि कई बार एआई तकनीक का उपयोग कर ऐसे वीडियो तैयार किए जाते हैं जो लोगों को भ्रमित कर सकते हैं और सामाजिक तनाव पैदा कर सकते हैं।इसी को देखते हुए साइबर पुलिस को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर संदिग्ध वीडियो और फोटो की तकनीकी जांच की जाए। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर भड़काऊ या भ्रामक सामग्री फैलाता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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सोशल मीडिया पर भी रहेगी पैनी नजर
कांवड़ यात्रा के दौरान सोशल मीडिया सबसे संवेदनशील माध्यम माना जाता है। पिछले वर्षों में कई बार अफवाहों और भ्रामक पोस्टों ने अनावश्यक तनाव पैदा करने की कोशिश की थी। इस बार पुलिस ने पहले से ही सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को सक्रिय कर दिया है।फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले वीडियो, फोटो और पोस्ट की लगातार निगरानी की जाएगी। किसी भी प्रकार की अफवाह, सांप्रदायिक टिप्पणी या भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों को तुरंत चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
उत्तराखंड पुलिस का कहना है कि कांवड़ यात्रा में हर साल करोड़ों श्रद्धालु देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचते हैं। इतनी विशाल भीड़ के बीच सुरक्षा बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। इसी कारण इस बार पारंपरिक पुलिस व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक को भी जोड़ा गया है।यात्रा मार्गों, विश्राम स्थलों, प्रमुख मंदिरों, घाटों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जाएगी।
अपराधियों के लिए सख्त चेतावनी
आईजी एसटीएफ डॉ. नीलेश आनंद भरणे का संदेश साफ है कि कांवड़ मेले में कानून व्यवस्था बिगाड़ने या किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि करने की कोशिश करने वालों के लिए इस बार बच निकलना आसान नहीं होगा।उन्होंने कहा कि “इनामी अपराधियों से लेकर सोशल मीडिया पर माहौल खराब करने वालों तक, हर संदिग्ध गतिविधि पर हमारी नजर रहेगी। साइबर पुलिस, फेस रिकग्निशन तकनीक और विशेष निगरानी टीमों के माध्यम से हर सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।”
हाईटेक सुरक्षा के साथ शुरू होगी कांवड़ यात्रा
इस बार की कांवड़ यात्रा केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था की भी मिसाल बनने जा रही है। पांच राज्यों से मिले हजारों अपराधियों के डाटा, फेस रिकग्निशन कैमरों, AI आधारित निगरानी, साइबर कमांडो और चौबीसों घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम के जरिए उत्तराखंड पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि करोड़ों श्रद्धालु बिना किसी भय और व्यवधान के अपनी यात्रा पूरी कर सकें।स्पष्ट है कि इस बार कांवड़ मेले में अपराधियों, अफवाह फैलाने वालों और कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर पुलिस की नजर हर पल रहेगी। आधुनिक तकनीक और अंतरराज्यीय समन्वय के सहारे उत्तराखंड पुलिस इस विशाल धार्मिक आयोजन को सुरक्षित, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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