लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा एक्शन! अब बिना Fire NOC नहीं बनेगी कोई इमारत

Editorial
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लखनऊ राजधानी लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। एक ही इमारत में लगी भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली, जिसके बाद भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। अब इस दर्दनाक हादसे के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब हर प्रकार की इमारत के लिए फायर एनओसी (Fire NOC) अनिवार्य होगी। बिना अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र के न तो नया मानचित्र पास होगा और न ही पुराने भवनों को राहत मिलेगी।एलडीए का कहना है कि यह फैसला भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।

15 लोगों की मौत के बाद बदले नियम

22 जून को लखनऊ के अलीगंज सेक्टर-डी स्थित एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लग गई थी। इस हादसे में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि जिस भवन में आग लगी, वह मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत था, लेकिन उसका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।सबसे गंभीर बात यह रही कि भवन में आग से बचाव के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। न पर्याप्त फायर सिस्टम था, न सुरक्षित निकास मार्ग और न ही अन्य जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था। यही लापरवाही हादसे को और भयावह बना गई।

अब हर भवन के लिए Fire NOC अनिवार्य

अब तक के नियमों के अनुसार केवल 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली इमारतों या कुछ विशेष श्रेणी के भवनों के लिए ही फायर एनओसी अनिवार्य थी। वहीं, 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले बहुमंजिला भवनों तथा 500 वर्ग मीटर से कम फर्श क्षेत्रफल वाले होटलों को इस नियम से छूट प्राप्त थी।लेकिन अब एलडीए ने इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि ऊंचाई चाहे कितनी भी हो, हर भवन के लिए फायर एनओसी अनिवार्य होगी।अर्थात अब कोई भी भवन केवल निर्माण मानकों के आधार पर नहीं, बल्कि अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद ही स्वीकृत होगा।

LDA ने जारी किया नया आदेश

एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए बताया कि यह निर्णय उत्तर प्रदेश अग्नि सुरक्षा एवं आपात सेवा अधिनियम-2022 तथा नियमावली-2024 के प्रावधानों के तहत लिया गया है।

उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने से—

  • भवनों में अग्नि सुरक्षा मजबूत होगी।
  • दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी।
  • लोगों की जान-माल की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
  • भवन निर्माण में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन होगा।

पुरानी इमारतों को तीन महीने की मोहलत

नया नियम केवल नए भवनों पर ही लागू नहीं होगा, बल्कि पहले से निर्मित भवन भी इसके दायरे में आएंगे।

एलडीए के अनुसार—

  • नए भवनों के मानचित्र के साथ आवेदन करते समय ही फायर एवं विद्युत सुरक्षा एनओसी प्रस्तुत करनी होगी।
  • जो भवन पहले से बने हुए हैं, उनके मालिकों को तीन महीने के भीतर फायर और विद्युत सुरक्षा एनओसी जमा करनी होगी।

यदि निर्धारित समय में प्रमाणपत्र जमा नहीं किया गया तो संबंधित भवन का मानचित्र अवैध माना जा सकता है और आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

अब किन भवनों पर लागू होंगे नए नियम?

एलडीए ने स्पष्ट किया है कि निम्नलिखित श्रेणियों के भवनों के लिए अब फायर एनओसी अनिवार्य होगी—

  • विधानसभा एवं सरकारी भवन
  • व्यावसायिक प्रतिष्ठान
  • स्कूल और कॉलेज
  • अस्पताल
  • होटल और गेस्ट हाउस
  • रेस्टोरेंट और बैंक्वेट हॉल
  • कोचिंग सेंटर
  • लाइब्रेरी
  • बैंक
  • सिनेमा और थिएटर
  • जिम
  • अन्य विशेष उपयोग वाले भवन

यानी अब लगभग हर सार्वजनिक उपयोग की इमारत को अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।

क्यों जरूरी पड़ा यह बदलाव?

पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश सहित देश के कई शहरों में आग लगने की घटनाओं में तेजी आई है। कई मामलों में यह सामने आया कि—

  • भवनों में फायर अलार्म नहीं थे।
  • अग्निशमन यंत्र काम नहीं कर रहे थे।
  • आपातकालीन निकास बंद थे।
  • विद्युत वायरिंग मानकों के अनुरूप नहीं थी।
  • आवासीय भवनों का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था।

इन कमियों के कारण छोटे हादसे भी बड़े अग्निकांड में बदल गए। अलीगंज की घटना ने प्रशासन को सुरक्षा नियमों की समीक्षा करने के लिए मजबूर कर दिया।

सुरक्षा के साथ जवाबदेही भी बढ़ेगी

नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल नियम बनाना नहीं, बल्कि भवन मालिकों की जिम्मेदारी तय करना भी है।अब यदि कोई भवन मालिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। इससे लोगों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी और भवनों का नियमित निरीक्षण भी सुनिश्चित होगा।

फायर ऑडिट पर भी रहेगा जोर

एलडीए पहले ही राजधानी की लाखों इमारतों का फायर सेफ्टी ऑडिट कराने की दिशा में काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल एनओसी जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समय-समय पर निरीक्षण और सुरक्षा उपकरणों की जांच भी जरूरी है।यदि नियमित फायर ऑडिट होता रहा, तो संभावित खतरों की पहचान पहले ही की जा सकेगी और बड़े हादसों को रोका जा सकेगा।

नागरिकों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?

इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। स्कूल, अस्पताल, होटल, कोचिंग सेंटर, बैंक और अन्य सार्वजनिक भवनों में आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा पहले से अधिक मजबूत होगी।साथ ही, भवन निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वालों पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा नियमों में थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। इसी पृष्ठभूमि में लखनऊ विकास प्राधिकरण का सभी भवनों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य करने का फैसला एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कदम माना जा रहा है। अब बिना अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र के भवनों के मानचित्र पास नहीं होंगे और पहले से बने भवनों को भी निर्धारित समय के भीतर फायर एवं विद्युत सुरक्षा एनओसी जमा करनी होगी। यदि इन नियमों का सख्ती से पालन किया गया, तो भविष्य में आग जैसी घटनाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा और राजधानी में सुरक्षित भवन निर्माण की नई संस्कृति विकसित होगी।

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