UP ATS का बड़ा एक्शन! फर्जी दस्तावेजों से विदेशी नागरिकों के आधार बनवाने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार, 25 हजार का इनामी था आरोपी

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए ऐसे गिरोह के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कर विदेशी नागरिकों के आधार कार्ड बनवाने का काम करता था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान सद्दाम पुत्र अलाउद्दीन के रूप में हुई है। वह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले का रहने वाला है और उसकी गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इस कार्रवाई को देश की पहचान प्रणाली और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में बड़ी सफलता माना जा रहा है।

पश्चिम बंगाल से दबोचा गया मास्टरमाइंड

एटीएस के अनुसार आरोपी सद्दाम लंबे समय से फरार चल रहा था। लगातार तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचना के आधार पर टीम ने 28 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज क्षेत्र में छापा मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय उसके पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद हुआ, जिसे जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।अब आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर उत्तर प्रदेश लाया जा रहा है। इसके बाद अदालत से पुलिस कस्टडी रिमांड लेकर उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी, ताकि पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।

कैसे चलता था पूरा फर्जीवाड़े का नेटवर्क?

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। विदेशी नागरिकों के लिए पहले जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और स्कूल प्रमाणपत्र जैसे भारतीय दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किए जाते थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आगे आधार कार्ड बनवाने की प्रक्रिया पूरी की जाती थी।जांच एजेंसियों का मानना है कि यह काम किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैले संगठित नेटवर्क के जरिए किया जा रहा था। गिरोह में दस्तावेज तैयार करने वाले, डिजिटल सिस्टम संचालित करने वाले और विभिन्न स्तरों पर सहयोग करने वाले कई लोग शामिल थे।

VPN के जरिए सिस्टम का दुरुपयोग

एटीएस की जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि गिरोह कथित तौर पर VPN (Virtual Private Network) के माध्यम से सिस्टम का रिमोट एक्सेस लेकर काम करता था। इससे उनकी वास्तविक लोकेशन छिप जाती थी और जांच एजेंसियों के लिए गतिविधियों का पता लगाना कठिन हो जाता था।आरोप है कि गिरोह अपने सदस्यों के नाम पर अलग-अलग लॉगिन आईडी बनवाता था और फिर उनका दुरुपयोग कर अवैध तरीके से पहचान संबंधी प्रक्रियाओं को प्रभावित करता था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे नेटवर्क में तकनीकी सहायता किस स्तर तक उपलब्ध कराई जा रही थी।

पहले भी हो चुकी हैं 17 गिरफ्तारियां

यह कार्रवाई किसी एक मामले तक सीमित नहीं है। एटीएस के अनुसार इस गिरोह से जुड़े 17 आरोपियों को पहले ही उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार से गिरफ्तार किया जा चुका है।इन गिरफ्तारियों के दौरान कई अहम सुराग मिले थे, जिनके आधार पर मास्टरमाइंड सद्दाम तक पहुंचने में सफलता मिली। अधिकारियों का मानना है कि अभी भी इस नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य लोग फरार हो सकते हैं, जिनकी तलाश जारी है।

किन विदेशी नागरिकों के दस्तावेज बनाए जाने का आरोप?

जांच एजेंसियों के अनुसार यह गिरोह कथित रूप से रोहिंग्या, बांग्लादेशी, नेपाली समेत अन्य विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय दस्तावेज तैयार करने में शामिल था। इन दस्तावेजों के आधार पर आगे आधार कार्ड बनवाने की कोशिश की जाती थी।हालांकि जांच अभी जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क के माध्यम से कितने लोगों के दस्तावेज तैयार किए गए और उनमें से कितने मामलों में पहचान संबंधी प्रक्रियाएं पूरी हुईं।

मोबाइल फोन से मिल सकते हैं बड़े सुराग

गिरफ्तार आरोपी के कब्जे से बरामद मोबाइल फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि मोबाइल से संपर्क सूत्र, चैट रिकॉर्ड, डिजिटल दस्तावेज, बैंक लेन-देन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिल सकते हैं, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में मदद मिलेगी।डिजिटल डेटा की जांच के आधार पर यह भी पता लगाया जाएगा कि इस नेटवर्क का संचालन किन राज्यों तक फैला हुआ था और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।

रिमांड में हो सकती है कई अहम पूछताछ

एटीएस अदालत से आरोपी की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगेगी। पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे—

  • फर्जी दस्तावेज कहां और कैसे तैयार किए जाते थे?
  • नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे?
  • दस्तावेजों के लिए किस तरह की तकनीक और संसाधनों का उपयोग होता था?
  • किन-किन राज्यों में नेटवर्क सक्रिय था?
  • इस काम से जुड़े आर्थिक लेन-देन कैसे किए जाते थे?

इन सवालों के जवाब जांच को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

पहचान प्रणाली की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

विशेषज्ञों का मानना है कि पहचान संबंधी दस्तावेजों की सुरक्षा किसी भी देश की प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसे मामलों में यदि कोई अनियमितता सामने आती है, तो उसकी गहन जांच आवश्यक होती है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।इसी उद्देश्य से जांच एजेंसियां तकनीकी और कानूनी दोनों स्तरों पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं।

कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं जांच की कड़ियां

चूंकि पहले भी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, इसलिए संभावना है कि जांच का दायरा आगे और बढ़ सकता है। विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर पूरे नेटवर्क की गतिविधियों की जांच की जा रही है।यदि पूछताछ में नए नाम सामने आते हैं, तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

ATS की कार्रवाई क्यों मानी जा रही है अहम?

इस कार्रवाई को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जांच केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसे संगठित नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास है, जो कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए पहचान संबंधी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर रहा था। मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी से जांच एजेंसियों को अब पूरे नेटवर्क की संरचना, उसके संचालन और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा पश्चिम बंगाल से 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी सद्दाम की गिरफ्तारी जांच के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आरोप है कि वह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विदेशी नागरिकों के लिए भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क का मास्टरमाइंड था। अब सभी की नजर आगे की पूछताछ और जांच पर है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह नेटवर्क कितना व्यापक था, इसमें और कौन-कौन शामिल थे तथा कथित फर्जीवाड़े का वास्तविक दायरा कितना बड़ा था।

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