Bihar Paper Leak Scam: AEDO से हवलदार परीक्षा तक फैला पेपर लीक गैंग, एग्जाम हॉल में पहुंचाए गए उत्तर; EOU ने तीन शातिरों को दबोचा

Editorial
8 Min Read

पटना बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने ऐसे संगठित पेपर लीक और सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश किया है, जिसके तार सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि कई भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मिले हैं। जांच में सामने आया है कि पहले AEDO (Assistant Education Development Officer) परीक्षा में पेपर लीक कर अभ्यर्थियों तक उत्तर पहुंचाने वाला नेटवर्क बाद में गृह रक्षा वाहिनी सेवा संवर्ग (हवलदार अनुदेशक) परीक्षा में भी सक्रिय था।EOU की कार्रवाई में राज समदर्शी उर्फ राजा, अभिषेक कुमार और नितेश कुमार को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र के उत्तर अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की साजिश में शामिल थे। इनके मोबाइल फोन से मिले डिजिटल सबूतों ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दी हैं।

AEDO परीक्षा से खुला था पूरे रैकेट का राज

इस पूरे मामले की शुरुआत 20 अप्रैल 2026 को आयोजित AEDO परीक्षा से हुई थी। भोजपुर निवासी एक अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र में पहले से तैयार उत्तरों के साथ पकड़ा गया था। जांच शुरू हुई तो आर्थिक अपराध इकाई को ऐसे सुराग मिले, जिन्होंने एक बड़े परीक्षा माफिया की ओर इशारा किया।EOU ने तकनीकी जांच और डिजिटल विश्लेषण के आधार पर यह पता लगाया कि यही गिरोह बाद में 29 जुलाई को आयोजित हवलदार अनुदेशक भर्ती परीक्षा में भी सक्रिय होने वाला है।

परीक्षा शुरू होते ही एग्जाम हॉल में पहुंचाए गए उत्तर

जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि प्रश्नपत्र बाहर निकलते ही उसके उत्तर तैयार कर अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था पहले से बनाई गई थी।EOU के मुताबिक, आरोपियों के मोबाइल फोन में ऐसे दस्तावेज और उत्तर पत्रक मिले, जो परीक्षा वाले दिन दोपहर 12:21 बजे भेजे गए थे। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि परीक्षा के दौरान ही उत्तर तैयार कर नेटवर्क के माध्यम से अभ्यर्थियों तक पहुंचाए जा रहे थे।यानी यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र को प्रभावित करने की सुनियोजित साजिश थी।

हाजीपुर से पकड़ा गया मुख्य आरोपी

29 जुलाई को EOU ने हाजीपुर के एक परीक्षा केंद्र के बाहर राज समदर्शी उर्फ राजा को हिरासत में लिया।पूछताछ में उसने अपने साथी अभिषेक कुमार का नाम बताया और AEDO परीक्षा में भी अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो एक और अहम नाम सामने आया—नितेश कुमार, जो परीक्षा में बायोमेट्रिक सुपरवाइजर के रूप में तैनात था।जांच एजेंसियों को शक है कि अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर नेटवर्क सक्रिय था।

मोबाइल फोन बने सबसे बड़े सबूत

गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले।

जांच एजेंसी को मोबाइल में—

  • कई अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड
  • परीक्षा से जुड़े दस्तावेज
  • उत्तर पत्रक
  • चैट रिकॉर्ड
  • संदिग्ध डिजिटल ट्रांजैक्शन
  • परीक्षा के दौरान भेजे गए संदेश

मिले हैं।इन डिजिटल सबूतों के आधार पर EOU अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।

चार और आरोपी जांच के घेरे में

तीनों आरोपियों की निशानदेही पर आर्थिक अपराध इकाई ने चार अन्य लोगों को भी नामजद किया है।सभी के खिलाफ बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम-2024 की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।EOU का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

बायोमेट्रिक सुपरवाइजर की भूमिका पर भी सवाल

इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में एक व्यक्ति परीक्षा केंद्र में बायोमेट्रिक सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत था।यदि जांच में उसकी भूमिका पूरी तरह साबित होती है, तो यह संकेत होगा कि परीक्षा प्रणाली के भीतर मौजूद कुछ लोग भी इस नेटवर्क की मदद कर रहे थे।ऐसी स्थिति में भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

बार-बार क्यों हो रहे हैं पेपर लीक?

पिछले कुछ वर्षों में देशभर में कई बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं पेपर लीक के कारण विवादों में रही हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा माफिया अब केवल प्रश्नपत्र चुराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने डिजिटल नेटवर्क, सॉल्वर गैंग, तकनीकी विशेषज्ञ और अंदरूनी लोगों का पूरा तंत्र विकसित कर लिया है।इसी वजह से लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य लगातार दांव पर लग रहा है।

एंटी पेपर लीक कानून के बावजूद सक्रिय माफिया

सरकार ने हाल के वर्षों में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून बनाए हैं।

नए कानून में—

  • लंबी जेल,
  • भारी आर्थिक जुर्माना,
  • संगठित अपराध के तहत कार्रवाई

जैसे कठोर प्रावधान शामिल किए गए हैं।इसके बावजूद बिहार में सामने आया यह मामला बताता है कि परीक्षा माफिया अब भी नए-नए तरीके अपनाकर सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं।

न्यायिक हिरासत में भेजे गए आरोपी

EOU ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया।कोर्ट ने सभी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।अब जांच एजेंसी इनके बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस, सोशल मीडिया गतिविधियों और आर्थिक लेन-देन की भी जांच कर रही है।

अभ्यर्थियों में बढ़ा आक्रोश

लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद भी यदि परीक्षा माफिया सिस्टम को नियंत्रित करते रहेंगे, तो ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों के साथ बड़ा अन्याय होगा।उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की है।बिहार का यह नया पेपर लीक कांड केवल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। AEDO परीक्षा से लेकर हवलदार अनुदेशक भर्ती तक सक्रिय इस नेटवर्क ने यह साबित कर दिया कि परीक्षा माफिया अब संगठित रूप से काम कर रहे हैं।अब सभी की नजर EOU की आगे की जांच पर है। यदि पूरे गिरोह का खुलासा होता है, तो कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही यह मामला सरकार और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है कि वे ऐसी मजबूत व्यवस्था तैयार करें, जिससे मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

read on:https://news7hindi.com/major-bust-of-bribery-in-lda-three-junior-engineers-including-junior-engineer-arrested-red-handed-while-taking-bribe-of-rs-7-50-lakh/

or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

Share This Article
Leave a Comment