भगवा वेश विवाद पर अयोध्या में संत समाज का उग्र विरोध: संसद प्रदर्शन के खिलाफ निकला विशाल मार्च, राष्ट्रपति से सांसदों पर कार्रवाई की मांग

Editorial
7 Min Read

रिपोर्ट:धर्मेन्द्र सिंह

अयोध्या संसद भवन परिसर में 31 जुलाई को सांसद पप्पू यादव द्वारा भगवा वेश धारण कर किए गए प्रदर्शन को लेकर रामनगरी अयोध्या में संत समाज का गहरा आक्रोश देखने को मिला। शनिवार को बड़ी संख्या में संतों, महंतों और श्रद्धालुओं ने इस घटनाक्रम के विरोध में विशाल मार्च निकालकर इसे सनातन धर्म, साधु-संत परंपरा और भगवान श्रीराम की मर्यादा का अपमान बताया। प्रदर्शन के दौरान संतों ने संबंधित नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की, प्रतीकात्मक पुतला दहन किया और जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग की।यह विरोध मार्च श्री संकट मोचन हनुमान किला से शुरू हुआ, जिसका नेतृत्व मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, महंत राजकुमार दास, महंत गौरीशंकर दास एवं महंत परशुराम दास ने किया। संत समाज ने कहा कि भगवा वस्त्र किसी राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि सनातन परंपरा, त्याग, तपस्या और आध्यात्मिक जीवन का प्रतीक है। ऐसे पवित्र प्रतीक का राजनीतिक उद्देश्य से उपयोग करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है।

रामनगरी की सड़कों पर उतरा संत समाज

विरोध मार्च में शामिल संतों और श्रद्धालुओं ने हाथों में भगवा ध्वज और धार्मिक प्रतीक लेकर नगर के प्रमुख मार्गों से शांतिपूर्ण मार्च निकाला। पूरे मार्ग में “सनातन का अपमान नहीं सहेंगे” और “भगवा का सम्मान करो” जैसे नारे गूंजते रहे।मार्च के दौरान संतों ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव, सांसद पप्पू यादव तथा अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद के प्रतीकात्मक पुतले दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग लोकतांत्रिक मर्यादाओं और धार्मिक आस्थाओं—दोनों के लिए उचित नहीं है।

राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

विरोध प्रदर्शन के बाद संत समाज के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में संसद परिसर में भगवा वेश धारण कर किए गए प्रदर्शन को सुनियोजित बताते हुए कहा गया कि इससे सनातन संस्कृति, साधु-संत परंपरा और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है।संतों ने मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

संतों ने लगाए गंभीर आरोप

ज्ञापन में संत समाज ने आरोप लगाया कि इस प्रकार का प्रदर्शन साधु-संतों की छवि धूमिल करने का प्रयास है। उनका कहना था कि भगवा वस्त्र भारतीय संस्कृति में त्याग, तप, सेवा और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक माना जाता है। ऐसे पवित्र प्रतीक को राजनीतिक विरोध के मंच के रूप में प्रस्तुत करना धार्मिक परंपराओं के सम्मान के विपरीत है।संतों ने यह भी कहा कि भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या से जुड़े धार्मिक भावनात्मक वातावरण को देखते हुए ऐसे घटनाक्रम समाज में भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं।

इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग

ज्ञापन में संत समाज ने सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद राहुल गांधी, अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद तथा समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की।साथ ही राष्ट्रपति से अनुरोध किया गया कि यदि आवश्यक हो तो संविधान के तहत उपलब्ध अधिकारों का उपयोग करते हुए संबंधित सांसदों के मामले में उचित कार्रवाई पर विचार किया जाए।

श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े मुद्दे का भी किया उल्लेख

संतों ने अपने ज्ञापन में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की समर्पण राशि से जुड़े प्रकरण का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि इस विषय पर जांच पहले से चल रही है और ऐसे समय संसद परिसर में इस प्रकार का प्रदर्शन श्रद्धालुओं के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।उनके अनुसार, इससे चल रही जांच पर भी अनावश्यक प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की गई। संत समाज ने निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता पर बल दिया।

धार्मिक संस्थाओं पर पड़ने वाले प्रभाव की जताई चिंता

संतों ने कहा कि श्रावण मास में झूला महोत्सव और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं। यदि इस प्रकार के विवाद लगातार सामने आते हैं तो श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति बन सकती है, जिससे धार्मिक संस्थाओं की गतिविधियों और समर्पण राशि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।उन्होंने मांग की कि यदि किसी घटनाक्रम के कारण धार्मिक संस्थाओं को आर्थिक नुकसान होता है और उसका विधिक आधार स्थापित होता है, तो उसके संबंध में कानून के अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाएं।

निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई

संत समाज ने स्पष्ट कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और धार्मिक प्रतीकों की गरिमा की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कार्य किया जाता है तो उसके खिलाफ समान रूप से निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।संतों ने प्रशासन और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कदम उठाए जाएं।

बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु रहे मौजूद

विरोध मार्च में महंत श्याम सुंदर दास, महंत बालक दास, मंसाराम की शरण, उत्तराधिकारी मुन्ना दास, महंत अवध रामदास, महंत अवनीश दास, आचार्य सर्वेंद्र, स्वामी देवेशाचार्य, महंत अवधेश दास शास्त्री, सत्यम दास, अविरल सिंह, महंत रामस्वरूप दास, दीपक, विशाल, आचार्य मोहित दास, रघुवर दास सहित बड़ी संख्या में संत, महंत और श्रद्धालु शामिल रहे।

धार्मिक प्रतीकों के सम्मान की उठी मांग

अयोध्या में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन ने एक बार फिर धार्मिक प्रतीकों के सार्वजनिक और राजनीतिक उपयोग को लेकर बहस को तेज कर दिया है। संत समाज ने स्पष्ट संदेश दिया कि भगवा वेश और सनातन परंपरा से जुड़े प्रतीकों का सम्मान बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

read on:https://news7hindi.com/janshakti-samman-2026-grand-felicitation-of-101-heroes-of-social-service-in-lucknow-for-their-outstanding-contribution-in-education-medical-security-and-nation-building/

or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

Share This Article
Leave a Comment