Cough Syrup Case: दुबई में होटल चला रहा शुभम जायसवाल, इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस के बाद गिरफ्तारी की तैयारी तेज

Editorial
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वाराणसी उत्तर प्रदेश के चर्चित 2000 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय कफ सिरप तस्करी मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय जांच एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसार, शुभम पिछले करीब नौ महीनों से दुबई में रह रहा है और वहां एक होटल चेन की फ्रेंचाइजी में साझेदारी के आधार पर होटल का संचालन कर रहा है।शुभम जायसवाल की गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस पहले ही जारी कर चुका है। इसके साथ ही भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने जून के दूसरे सप्ताह में दुबई प्रशासन को उसके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट भी सौंप दिया था। अब इंटरपोल और संबंधित एजेंसियों की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

नेपाल और बांग्लादेश तक फैला था नेटवर्क

जांच एजेंसियों के अनुसार, शुभम जायसवाल पर प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क संचालित करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि नेपाल और बांग्लादेश तक फैला हुआ था।आरोप है कि शैली ट्रेडर्स के माध्यम से संचालित इस सिंडिकेट का कारोबार करीब 2000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। जांच में सामने आया कि तस्करी का यह नेटवर्क कई राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक सक्रिय था।

दुबई में गोल्डन वीजा पर रह रहा है शुभम

जांच एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसार, शुभम जायसवाल 10 वर्ष के गोल्डन वीजा पर दुबई में रह रहा है। वहां वह होटल व्यवसाय से जुड़ा हुआ है और साझेदारी के आधार पर होटल चेन का संचालन कर रहा है।पिछले वर्ष नवंबर से उसके दुबई में होने की जानकारी सामने आई थी। इस दौरान सोशल मीडिया पर उसके होटल से जुड़े कुछ फोटो और वीडियो भी वायरल हुए थे। हालांकि जांच एजेंसियां लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस

वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र के प्रह्लाद घाट निवासी शुभम जायसवाल को भारतीय एजेंसियों ने भगोड़ा घोषित किया है। उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है।रेड कॉर्नर नोटिस का उद्देश्य किसी आरोपी का पता लगाना और सदस्य देशों की सहायता से उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करना होता है। हालांकि अंतिम गिरफ्तारी संबंधित देश के कानूनों के अनुसार ही की जाती है।

विदेश मंत्रालय ने बढ़ाई कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने शुभम जायसवाल के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट दुबई सरकार को सौंप दिया है। अब दोनों देशों की कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई जारी है।यदि दुबई में उसकी गिरफ्तारी होती है और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया पूरी होती है, तो जांच एजेंसियों को इस पूरे नेटवर्क के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकती हैं।

75 से अधिक आरोपी पहले ही गिरफ्तार

इस मामले में अब तक 75 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें आलोक सिंह, अमित सिंह उर्फ टाटा, अमित यादव सहित कई अन्य आरोपी शामिल हैं।ये आरोपी वाराणसी, सोनभद्र, लखनऊ, कानपुर, कोलकाता और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच जारी है।

सोनभद्र से खुला था पूरा मामला

प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी का पहला मामला 19 अक्टूबर 2025 को सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में दर्ज किया गया था।उस समय दो कंटेनरों से तीन करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की 1.19 लाख से ज्यादा कफ सिरप की बोतलें बरामद की गई थीं। इसके बाद गाजियाबाद में एक गोदाम का खुलासा हुआ और जांच आगे बढ़ने के साथ पूरे अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं।

सफेदपोश संरक्षण का भी आरोप

जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क को कुछ प्रभावशाली लोगों का संरक्षण भी मिलता रहा। इसी कारण तस्करी का कारोबार लंबे समय तक कई राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक फैल सका।हालांकि इस पहलू की जांच अभी जारी है और एजेंसियां इससे जुड़े वित्तीय लेन-देन तथा अन्य संदिग्ध कड़ियों की भी जांच कर रही हैं।

गिरफ्तारी से खुल सकते हैं कई बड़े राज

जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि शुभम जायसवाल को दुबई से भारत लाया जाता है, तो इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े कई नए नाम सामने आ सकते हैं।यह भी संभावना जताई जा रही है कि उसके बयान से वित्तीय नेटवर्क, तस्करी के रूट, कथित सहयोगियों और पूरे सप्लाई चेन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।2000 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय कफ सिरप तस्करी मामले में फरार शुभम जायसवाल की गिरफ्तारी की दिशा में कार्रवाई तेज हो गई है। इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस, विदेश मंत्रालय की पहल और दुबई में उसके ठिकाने की जानकारी ने जांच को नई दिशा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कानूनी प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और क्या इस हाई-प्रोफाइल मामले के मुख्य आरोपी को भारत लाकर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सकेगा।

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