लखनऊ मणिपुर में तैनात सीआरपीएफ जवान विनीत सिंह (37) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद लखनऊ में परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर प्रदर्शन किया। जवान का पार्थिव शरीर गुरुवार देर रात बुद्धेश्वर स्थित आदर्श विहार कॉलोनी पहुंचा, जिसके बाद परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर मुख्य मार्ग जाम कर दिया। प्रदर्शन करीब पांच घंटे तक चला।परिजनों ने जवान की मौत को संदिग्ध बताते हुए दोबारा पोस्टमार्टम, निष्पक्ष जांच, शहीद का दर्जा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आर्थिक सहायता की मांग की। मौके पर भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात रही। अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ और परिजन पार्थिव शरीर लेकर हरदोई के लिए रवाना हो गए।
मणिपुर में CRPF की 112वीं बटालियन में थे तैनात
विनीत सिंह सीआरपीएफ की 112वीं बटालियन में तैनात थे। वह वर्ष 2009 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे और उनकी पहली तैनाती प्रशिक्षण के लिए केरल में हुई थी। परिवार के मुताबिक, 23 जून को उनका तबादला मणिपुर किया गया था।मणिपुर में ड्यूटी के दौरान उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर लखनऊ स्थित उनके आवास पर पहुंचाया गया। शव घर पहुंचते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों ने मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए सड़क पर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
पत्नी ने अधिकारियों पर लगाया मानसिक प्रताड़ना का आरोप
जवान की पत्नी नेहा सिंह ने अपने पति की मौत को लेकर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि विनीत सिंह को अधिकारियों की ओर से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।पत्नी के मुताबिक, उनके पति को माथे पर गोली लगी थी और मणिपुर में पोस्टमार्टम कराया गया था। हालांकि, परिवार उस पोस्टमार्टम से संतुष्ट नहीं है। इसी वजह से उन्होंने लखनऊ में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की है।हालांकि ये सभी आरोप परिजनों की ओर से लगाए गए हैं। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
मौत से 11 मिनट पहले हुई थी आखिरी बातचीत
नेहा सिंह के अनुसार, 5 अगस्त की शाम उनकी पति विनीत सिंह से आखिरी बार बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया कि शाम 7:36 बजे फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान विनीत ने बुखार और अन्य मौसमी बीमारियों से परेशान होने की बात कही थी।पत्नी का दावा है कि मणिपुर स्थित कैंप में हाल में हुई गोलीबारी की घटना के बाद वह तनाव में भी थे। उन्होंने छुट्टी मांगे जाने की बात भी बताई थी।नेहा सिंह के मुताबिक, आखिरी बातचीत के करीब 11 मिनट बाद, शाम 7:47 बजे, सीआरपीएफ अधिकारियों की व्हाट्सएप कॉल आई। इसमें उन्हें बताया गया कि विनीत सिंह कैंप परिसर में बैरक के पीछे गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले हैं। इसके बाद उनकी मौत की जानकारी दी गई।परिजनों ने इसी घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठाए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पांच घंटे तक सड़क पर चला प्रदर्शन
पार्थिव शरीर घर पहुंचने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे दुबग्गा से अवध चौराहे जाने वाले मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। दुबग्गा से कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर जाने वाले वाहनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।सूचना मिलने पर एडीसीपी पश्चिमी धनंजय कुशवाहा, एसीपी काकोरी शकील अहमद, आईपीएस अमित कुमावत समेत कई थानों की पुलिस और पीएसी मौके पर पहुंची।पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे परिजनों से बातचीत की और उन्हें समझाने का प्रयास किया। हालांकि, परिजन अपनी मांगों पर ठोस आश्वासन मिलने तक प्रदर्शन करते रहे।
अधिकारियों के आश्वासन के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन
करीब पांच घंटे बाद अधिकारियों ने परिजनों को निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच की जाएगी। इसके अलावा परिवार की ओर से दिया गया ज्ञापन जिलाधिकारी तक पहुंचाने का आश्वासन भी दिया गया।इसके बाद पत्नी नेहा सिंह ने जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन एडीसीपी पश्चिमी को सौंपा। ज्ञापन में दोबारा पोस्टमार्टम, निष्पक्ष जांच, परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी, आर्थिक सहायता और शहीद का दर्जा देने की मांग की गई।आश्वासन मिलने के बाद परिजन शव लेकर हरदोई रवाना हो गए।
हरदोई में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
विनीत सिंह का पैतृक गांव हरदोई में है। शुक्रवार को उनके पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जवान की मौत से गांव में भी शोक का माहौल है।परिवार में पत्नी नेहा सिंह और बेटा रुद्र हैं। परिजनों के मुताबिक, परिवार पिछले करीब पांच वर्षों से लखनऊ के बुद्धेश्वर स्थित आदर्श विहार कॉलोनी में रह रहा था।
2009 में CRPF में हुए थे भर्ती
विनीत सिंह वर्ष 2009 में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में भर्ती हुए थे। शुरुआती प्रशिक्षण के बाद उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में सेवा दी। मणिपुर में उनकी तैनाती के दौरान हुई मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।फिलहाल पुलिस और संबंधित अधिकारी परिजनों की शिकायत और मांगों से शासन को अवगत करा चुके हैं। इंस्पेक्टर सुरेश सिंह के अनुसार, मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।अब इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्य और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। इन्हीं के आधार पर विनीत सिंह की मौत की परिस्थितियों और परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
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