विराट कोहली की एनर्जी से बदल जाता है टीम इंडिया का माहौल, पूर्व कोच टी दिलीप ने किया बड़ा खुलासा

Editorial
8 Min Read

भारतीय क्रिकेट में विराट कोहली सिर्फ अपनी बल्लेबाजी के लिए ही नहीं, बल्कि मैदान पर अपनी फिटनेस, आक्रामकता और जबरदस्त ऊर्जा के लिए भी पहचाने जाते हैं। कोहली जिस अंदाज में मैदान पर सक्रिय रहते हैं, उसका असर सिर्फ उनके प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि टीम के बाकी खिलाड़ियों पर भी दिखाई देता है। अब भारतीय टीम के पूर्व फील्डिंग कोच टी दिलीप ने विराट कोहली की इसी खासियत को लेकर बड़ा खुलासा किया है।टी दिलीप ने विराट कोहली की फिटनेस और मैदान पर उनकी ऊर्जा की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि कोहली मैच के दौरान ही नहीं, बल्कि ट्रेनिंग और प्रैक्टिस सेशन में भी उसी स्तर की ऊर्जा के साथ नजर आते हैं। उनके मुताबिक, विराट की यही आदत आसपास मौजूद खिलाड़ियों को भी अपनी क्षमता से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है।

विराट की ऊर्जा का टीम पर पड़ता है सीधा असर

टी दिलीप के मुताबिक, विराट कोहली जब मैदान पर होते हैं तो उनकी ऊर्जा को नजरअंदाज करना मुश्किल होता है। वह मैच के किसी भी चरण में अपनी सक्रियता कम नहीं होने देते। गेंद उनके पास हो या नहीं, वह लगातार खेल में शामिल रहने की कोशिश करते हैं।दिलीप का कहना है कि विराट की फील्डिंग के दौरान दिखाई देने वाली तीव्रता का असर कम से कम चार-पांच अन्य खिलाड़ियों पर भी पड़ता है। जब एक खिलाड़ी लगातार उत्साह और जुनून के साथ मैदान पर प्रदर्शन करता है तो दूसरे खिलाड़ी भी उसी ऊर्जा के साथ प्रतिक्रिया देने लगते हैं।विराट की खासियत यह है कि वह गेंद को अपने हाथ में लेने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। डेथ ओवर्स जैसे दबाव वाले समय में भी उनकी सक्रियता कम नहीं होती। वह लॉन्ग-ऑन से लॉन्ग-ऑन तक तेजी से दौड़ने और सर्कल से सबसे पहले बाहर निकलने जैसे प्रयास करते हैं। यही चीज टीम के लिए प्रेरणा का काम करती है।

फिटनेस के मामले में विराट ने बनाया नया स्तर

विराट कोहली ने भारतीय क्रिकेट में फिटनेस को लेकर एक अलग मानक स्थापित किया। अपने करियर के दौरान उन्होंने अपनी फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया और इसका प्रभाव भारतीय टीम की कार्यशैली में भी देखने को मिला।टीम इंडिया में फिटनेस और फील्डिंग को लेकर जिस तरह का बदलाव पिछले वर्षों में दिखाई दिया, उसमें विराट की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। उनका मानना रहा है कि एक खिलाड़ी को केवल बल्लेबाजी या गेंदबाजी में ही नहीं, बल्कि मैदान के हर हिस्से में योगदान देने के लिए तैयार रहना चाहिए।टी दिलीप के अनुसार, विराट का यह रवैया युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत रहा है। मैदान पर उनका रवैया खिलाड़ियों को यह संदेश देता है कि मैच की परिस्थिति चाहे जैसी हो, ऊर्जा और एकाग्रता में कमी नहीं आनी चाहिए।

टी20 विश्व कप 2024 की जीत को बताया सबसे यादगार पल

टी दिलीप ने भारतीय टीम के साथ अपने करीब पांच साल के कार्यकाल के दौरान कई यादगार पल देखे, लेकिन उनके लिए 2024 टी20 विश्व कप की जीत सबसे खास रही।बारबाडोस में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ फाइनल मुकाबले के बाद भारतीय टीम ने लंबे इंतजार के बाद टी20 विश्व कप की ट्रॉफी अपने नाम की थी। दिलीप ने उस पल को याद करते हुए बताया कि ट्रॉफी जीतने से ज्यादा उनके लिए ड्रेसिंग रूम का माहौल भावुक और यादगार था।उनके मुताबिक, मैच खत्म होने के बाद कुछ सेकंड तक ड्रेसिंग रूम में एक अलग तरह की खामोशी थी। इसके बाद अचानक खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की भावनाएं बाहर आईं। उस समय पिछले कई वर्षों की मेहनत और संघर्ष एक साथ याद आ रहे थे।

सूर्यकुमार यादव के कैच ने बदल दिया मैच

2024 टी20 विश्व कप फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के डेविड मिलर का कैच भारतीय जीत का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना गया। सूर्यकुमार यादव ने बाउंड्री लाइन के पास शानदार कैच लेकर मिलर को आउट किया था।टी दिलीप ने इस कैच को भी याद किया। उन्होंने बताया कि कैच के दौरान शुरुआती कुछ पलों में वह पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे कि कैच साफ तरीके से पूरा हुआ है या नहीं। उनके दिमाग में कई सवाल चल रहे थे। जब कैच की पुष्टि हुई तो ड्रेसिंग रूम में खुशी की लहर दौड़ गई।हालांकि दिलीप ने यह भी बताया कि उस समय मैच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था, इसलिए टीम को अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए मुकाबले पर ध्यान बनाए रखना था।

फील्डिंग मेडल से बढ़ी टीम में प्रतिस्पर्धा

टी दिलीप के कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम में फील्डिंग मेडल की शुरुआत भी हुई। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा करना और फील्डिंग को टीम की प्राथमिकताओं में और ऊपर ले जाना था।इस पहल से खिलाड़ियों में शानदार कैच, बेहतरीन थ्रो और मैदान पर किए गए महत्वपूर्ण प्रयासों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी। इससे खिलाड़ियों को फील्डिंग में लगातार बेहतर करने की प्रेरणा मिली।भारतीय टीम ने पिछले कुछ वर्षों में फील्डिंग के क्षेत्र में काफी सुधार किया है। कैचिंग, ग्राउंड फील्डिंग और थ्रोइंग के स्तर में आया बदलाव इसका उदाहरण है।

टेस्ट क्रिकेट में स्लिप फील्डिंग होगी बड़ी चुनौती

भारत के आगामी टेस्ट मुकाबलों को लेकर भी टी दिलीप ने फील्डिंग की अहमियत पर बात की। टेस्ट क्रिकेट में खासकर स्लिप क्षेत्र में फील्डरों की पोजिशनिंग बेहद महत्वपूर्ण होती है।तेज गेंदबाजों के खिलाफ गेंद काफी तेजी से बल्ले का किनारा लेकर स्लिप क्षेत्र में पहुंच सकती है। ऐसे में फील्डर के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय होता है। इसलिए फील्डरों के बीच सही दूरी और सही पोजिशनिंग बेहद जरूरी हो जाती है।स्पिन गेंदबाजों के खिलाफ भी यही रणनीति महत्वपूर्ण होती है। फील्डर की स्थिति गेंदबाज की लाइन, बल्लेबाज की तकनीक और संभावित शॉट के हिसाब से तय करनी पड़ती है।

विराट कोहली की विरासत सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं

विराट कोहली के करियर को अगर केवल शतकों, रनों और रिकॉर्ड्स के नजरिए से देखा जाए तो तस्वीर अधूरी रह जाएगी। उन्होंने भारतीय क्रिकेट में फिटनेस, फील्डिंग और मैदान पर सकारात्मक आक्रामकता की संस्कृति को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।टी दिलीप का बयान इसी पहलू को सामने लाता है। विराट की ऊर्जा का असर सिर्फ उनके प्रदर्शन तक नहीं रहता, बल्कि उनके आसपास के खिलाड़ियों की सोच और प्रयासों पर भी दिखाई देता है।यही वजह है कि भारतीय क्रिकेट में विराट कोहली की पहचान एक महान बल्लेबाज के साथ-साथ ऐसे खिलाड़ी के रूप में भी बनी है, जिसकी मौजूदगी ड्रेसिंग रूम और मैदान दोनों का माहौल बदल सकती है।

read on:https://news7hindi.com/patriotic-slogans-echoed-in-nawabganj-hundreds-of-people-took-out-a-grand-tricolor-march/

or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

Share This Article
Leave a Comment