आखिर क्यों बनाया गया अतिरिक्त फॉर्म?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, Google DeepMind की इस टीम ने उम्मीदवारों के लिए एक अतिरिक्त आवेदन फॉर्म उपलब्ध कराया था। इसमें उम्मीदवारों को भरोसा दिलाया गया कि उनका आवेदन टीम के किसी वास्तविक व्यक्ति तक पहुंचेगा।रिपोर्ट में बताए गए आंतरिक दस्तावेज के अनुसार, टीम को आशंका थी कि सामान्य एप्लिकेशन सिस्टम के जरिए भेजा गया रिज्यूमे गलती से रिजेक्ट हो सकता है या उसे संबंधित टीम तक पहुंचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लग सकता है।यही वजह बताई गई कि उम्मीदवारों के लिए अतिरिक्त फॉर्म की व्यवस्था की गई। इसका उद्देश्य यह था कि आवेदन को सीधे संबंधित टीम के किसी इंसानी सदस्य तक पहुंचाया जा सके और उम्मीदवार की प्रोफाइल को व्यक्तिगत तौर पर देखा जा सके।हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि Google ने आधिकारिक तौर पर इस बात से इनकार किया है कि उसका हायरिंग सिस्टम उम्मीदवारों को गलत तरीके से रिजेक्ट करता है। कंपनी के अनुसार, अतिरिक्त फॉर्म का उद्देश्य उम्मीदवारों को रिक्रूटमेंट की लंबी प्रक्रिया से अलग सीधे संबंधित टीम तक अपना रिज्यूमे पहुंचाने का विकल्प देना था।
क्या AI आपके रिज्यूमे को भी प्रभावित कर रहा है?
आज बड़ी कंपनियों के पास हर नौकरी के लिए बड़ी संख्या में आवेदन पहुंचते हैं। हजारों आवेदनों को इंसानी टीम द्वारा एक-एक करके पढ़ना समय लेने वाला काम है। ऐसे में कंपनियां Applicant Tracking System यानी ATS और दूसरे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करती हैं।ये सिस्टम रिज्यूमे में मौजूद जानकारी, अनुभव, योग्यता और नौकरी से जुड़े प्रमुख शब्दों को स्कैन कर सकते हैं। इसके आधार पर उम्मीदवारों की प्रोफाइल को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना या अलग किया जा सकता है।यहीं से उम्मीदवारों के बीच एक बड़ा सवाल पैदा होता है—अगर सिस्टम किसी रिज्यूमे की जानकारी को सही तरीके से नहीं समझ पाए तो क्या योग्य उम्मीदवार भी शुरुआती चरण में पीछे छूट सकता है?Google से जुड़ा यह मामला इसी व्यापक बहस को फिर सामने लेकर आया है। हालांकि, इससे यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि AI हर रिज्यूमे को गलत तरीके से रिजेक्ट करता है। लेकिन यह जरूर दिखाता है कि भर्ती प्रक्रिया में तकनीक के साथ मानवीय समीक्षा की भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ रही है।

उम्मीदवार भी AI का जमकर कर रहे इस्तेमाल
दिलचस्प बात यह है कि AI का इस्तेमाल केवल कंपनियां ही नहीं कर रही हैं। नौकरी तलाशने वाले उम्मीदवार भी AI की मदद से अपने रिज्यूमे, कवर लेटर और आवेदन तैयार कर रहे हैं।कई उम्मीदवार AI टूल्स के जरिए अपने अनुभव को बेहतर भाषा में प्रस्तुत करते हैं। कुछ लोग नौकरी के विवरण के अनुसार अपने रिज्यूमे में जरूरी शब्द जोड़ने के लिए भी AI की मदद लेते हैं।इससे कंपनियों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो रही है। अगर हजारों उम्मीदवार लगभग एक जैसी AI-generated भाषा में रिज्यूमे और जवाब भेजने लगें तो असली प्रतिभा और व्यक्तिगत सोच को पहचानना मुश्किल हो सकता है।
Google की टीम ने AI से लिखे जवाबों पर क्यों जताई नाराजगी?
Google DeepMind की AGI Safety and Alignment टीम से जुड़े इस मामले का सबसे दिलचस्प पहलू उम्मीदवारों को दी गई एक सलाह है।रिपोर्ट के मुताबिक, टीम ने उम्मीदवारों से कहा कि वे अपने जवाब AI से लिखवाने से बचें। टीम का मानना था कि उसे ऐसे जवाब लगातार देखने को मिल रहे हैं, जो AI की मदद से तैयार किए गए होने के कारण एक जैसे और घिसे-पिटे लगते हैं।इसका मतलब यह नहीं है कि AI का इस्तेमाल पूरी तरह गलत है। लेकिन नौकरी के आवेदन में उम्मीदवार की वास्तविक सोच, अनुभव और समस्या को देखने का तरीका भी महत्वपूर्ण होता है। अगर हर उम्मीदवार एक जैसे AI-generated जवाब देने लगे तो आवेदन में व्यक्तिगत पहचान कम हो सकती है।यही वजह है कि कुछ हायरिंग टीमें अब उम्मीदवारों की वास्तविक सोच और व्यक्तिगत अनुभव को अधिक महत्व देने की कोशिश कर रही हैं।

AI के दौर में इंसानी नजर क्यों जरूरी?
AI तेजी से काम कर सकता है। वह बड़ी मात्रा में डेटा को कम समय में प्रोसेस कर सकता है और रिज्यूमे की स्क्रीनिंग जैसे दोहराए जाने वाले कामों को आसान बना सकता है। लेकिन किसी उम्मीदवार की पूरी क्षमता को केवल रिज्यूमे या कुछ keywords के आधार पर समझना हमेशा आसान नहीं होता।किसी व्यक्ति की समस्या सुलझाने की क्षमता, रचनात्मक सोच, टीम में काम करने का तरीका, नेतृत्व क्षमता और वास्तविक अनुभव जैसी चीजों का आकलन केवल स्वचालित सिस्टम से करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।इसीलिए भर्ती प्रक्रिया में AI और इंसानी निर्णय के बीच संतुलन की जरूरत महसूस की जा रही है।
क्या बदलने वाला है नौकरी का तरीका?
Google से जुड़ा यह मामला भविष्य की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। आने वाले समय में AI नौकरी देने वाली कंपनियों के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन साथ ही कंपनियों को यह भी तय करना होगा कि तकनीक का इस्तेमाल किस स्तर तक किया जाए और किस चरण पर इंसानी हस्तक्षेप जरूरी हो।एक तरफ AI भर्ती प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बना सकता है, तो दूसरी तरफ उम्मीदवारों की वास्तविक क्षमता को समझने के लिए मानवीय समीक्षा की जरूरत बनी रह सकती है।उम्मीदवारों के लिए भी संदेश साफ है। रिज्यूमे को बेहतर बनाने के लिए AI की मदद लेना अलग बात है, लेकिन आवेदन में अपनी वास्तविक उपलब्धियों, अनुभव और सोच को बनाए रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
Google AI Hiring विवाद से क्या सीख मिलती है?
Google से जुड़ी यह खबर AI के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस को सामने लाती है। जिस तकनीक का इस्तेमाल कंपनियां प्रतिभा खोजने के लिए कर रही हैं, उसी तकनीक की सीमाओं को लेकर अब कंपनियों के भीतर भी सवाल उठ रहे हैं।हालांकि Google ने अपने हायरिंग सिस्टम द्वारा उम्मीदवारों को गलत तरीके से रिजेक्ट किए जाने की बात से इनकार किया है, लेकिन अतिरिक्त फॉर्म और सीधे इंसानी समीक्षा की व्यवस्था यह दिखाती है कि भर्ती प्रक्रिया में मानवीय भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है।AI चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, नौकरी के लिए किसी उम्मीदवार की पूरी क्षमता को समझने में अनुभव और मानवीय निर्णय की भूमिका खत्म होना आसान नहीं है।इस पूरे मामले से नौकरी तलाशने वालों के लिए एक अहम संदेश निकलता है—AI को अपना सहायक बनाइए, लेकिन अपनी असली पहचान और सोच को AI के हवाले मत कीजिए। आने वाले समय में वही उम्मीदवार ज्यादा प्रभावी साबित हो सकते हैं, जो तकनीक का इस्तेमाल करने के साथ अपनी वास्तविक क्षमता, अनुभव और व्यक्तिगत सोच को भी सामने रखेंगे।
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