उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टीआरटी टनल में हुए हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। गुरुवार शाम टनल के भीतर अचानक भारी मात्रा में मलबा, पानी और पत्थर घुसने से कई मजदूर फंस गए। हादसे में अब तक सात मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि तीन मजदूर अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल लगातार उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अभियान चला रहे हैं।हादसे के बाद से ही प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना की टीमें मौके पर तैनात हैं। शुक्रवार को सेना की विशेष के-9 टीम और चिकित्सा दल ने भी रेस्क्यू अभियान में मोर्चा संभाला। टनल के भीतर पानी का स्तर बढ़ने और लगातार बारिश के कारण बचाव अभियान में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
- करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में हुआ भूधंसाव
- सात मजदूरों की मौत, तीन की तलाश जारी
- टनल में गले तक पानी, रेस्क्यू में बड़ी चुनौती
- मुख्यमंत्री धामी ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
- हादसे की होगी मजिस्ट्रियल जांच
- पहले भी हो चुका है हादसा
- घायल मजदूरों ने सुनाया हादसे का खौफनाक अनुभव
- अलग-अलग राज्यों के मजदूर थे टनल में
- बचाव अभियान में जुटी कई एजेंसियां
- सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

करीब डेढ़ किलोमीटर हिस्से में हुआ भूधंसाव
जानकारी के मुताबिक, विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टीआरटी टनल की लंबाई करीब तीन किलोमीटर है। हादसे के दौरान टनल के लगभग डेढ़ किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव हुआ। इसके बाद अचानक मलबा और पानी टनल के अंदर पहुंच गया।जिस समय हादसा हुआ, उस वक्त बड़ी संख्या में मजदूर टनल के अंदर काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम करीब 6:10 बजे अचानक तेज आवाज सुनाई दी। इसके बाद पानी, पत्थर और मलबा तेजी से अंदर की तरफ आने लगा। देखते ही देखते टनल का एक हिस्सा मलबे और पानी से भर गया।घायल मजदूरों ने बताया कि हादसे के समय टनल के अंदर करीब 16-17 लोग एक जगह काम कर रहे थे। अचानक करीब 150 मीटर दूर भारी भूस्खलन हुआ और उसका मलबा पानी के साथ तेजी से अंदर आया। इससे मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

सात मजदूरों की मौत, तीन की तलाश जारी
प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, हादसे में सात मजदूरों की मौत हुई है। मृतकों में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों के श्रमिक शामिल हैं।मृतकों में प्रदीप पंवार, मुकेश सिंह, दुर्लभ शर्मा, विजय हंसदा, जितेंद्र कुमार, लोकेश्वर और भुनेश्वर के नाम शामिल हैं।वहीं टनल में लापता तीन मजदूरों की पहचान लुकास टोपनो निवासी झारखंड, चेतन पोयाम निवासी छत्तीसगढ़ और देवनाथ निवासी छत्तीसगढ़ के रूप में हुई है। बचाव टीमें लगातार इनकी तलाश में जुटी हैं।

टनल में गले तक पानी, रेस्क्यू में बड़ी चुनौती
रेस्क्यू अभियान में सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर भरा पानी और मलबा बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, कई हिस्सों में पानी काफी ज्यादा है। लगातार पानी रिसने के कारण बचाव दल को आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है।रेस्क्यू टीमों ने पानी निकालने के लिए भारी पंप मशीनें लगाई हैं। इसके अलावा टनल के अंदर अंडरवाटर कैमरे और डॉग स्क्वाड की मदद भी ली जा रही है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कई टीमें लगातार अभियान में जुटी हुई हैं।सेना की विशेष रूप से प्रशिक्षित के-9 टीम भी मौके पर पहुंची है। चिकित्सा दल को भी तैयार रखा गया है, ताकि किसी मजदूर के मिलने पर तत्काल मेडिकल सहायता दी जा सके।

मुख्यमंत्री धामी ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीपलकोटी पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान का जायजा लिया। उन्होंने टनल के अंदर चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी अधिकारियों से ली और घायल श्रमिकों से अस्पताल में मुलाकात की।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लापता श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों के लिए चार-चार लाख रुपये की सहायता की घोषणा भी की है।
हादसे की होगी मजिस्ट्रियल जांच
चमोली टनल हादसे के कारणों की जांच के लिए मुख्यमंत्री ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर टनल निर्माण के दौरान संभावित भूगर्भीय जोखिमों का कितना आकलन किया गया था।स्थानीय स्तर पर यह बात भी सामने आई है कि हादसे से पहले टनल के ऊपर से मलबा गिरने की घटनाएं हो रही थीं। ऐसे में परियोजना में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।अब मजिस्ट्रियल जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि हादसे की वास्तविक वजह क्या थी और क्या निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन किया जा रहा था।
पहले भी हो चुका है हादसा
विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना में पहले भी दुर्घटना हो चुकी है। पिछले साल दिसंबर में इसी परियोजना की सुरंग में दो लोको ट्रॉलियों के आपस में टकराने की घटना सामने आई थी। उस हादसे में कई अधिकारी, कर्मचारी और मजदूर घायल हुए थे।लगातार दूसरी बड़ी घटना के बाद परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों और श्रमिकों की सुरक्षा से जुड़े सवाल अब जांच के केंद्र में हैं।
घायल मजदूरों ने सुनाया हादसे का खौफनाक अनुभव
हादसे से बचकर बाहर आए मजदूरों ने बताया कि अचानक तेज आवाज के बाद टनल के अंदर पानी और मलबा तेजी से घुसा। कई मजदूरों को मलबे के दबाव के कारण धक्का लगा और वे दूर जा गिरे।एक घायल मजदूर ने बताया कि कुछ लोग कीचड़ में काफी नीचे तक फंस गए थे। वहीं, टनल के भीतर ऑक्सीजन का स्तर कम होने से सांस लेने में भी परेशानी होने लगी थी।एक अन्य मजदूर ने बताया कि बिजली भी अचानक चली गई थी। अंधेरे और पानी के बीच मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद बचाव दल ने अभियान शुरू किया और कई श्रमिकों को बाहर निकाला गया।
अलग-अलग राज्यों के मजदूर थे टनल में
इस हादसे में प्रभावित मजदूर उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से जुड़े बताए गए हैं। हादसे के बाद संबंधित राज्यों के प्रशासन को भी श्रमिकों की स्थिति की जानकारी दी गई।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बातचीत कर प्रभावित श्रमिकों की स्थिति की जानकारी साझा की। घायल मजदूरों को आवश्यकतानुसार अलग-अलग अस्पतालों में उपचार दिया जा रहा है।
बचाव अभियान में जुटी कई एजेंसियां
चमोली टनल हादसे के बाद बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस, सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर तैनात हैं।रेस्क्यू टीमों का लक्ष्य टनल में फंसे तीनों लापता मजदूरों का जल्द से जल्द पता लगाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। पानी निकालने के लिए पंप लगाए गए हैं और तकनीकी उपकरणों की मदद से टनल के अंदर की स्थिति का आकलन किया जा रहा है।बारिश और लगातार पानी रिसने के बावजूद बचाव दल अभियान में जुटे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी उपलब्ध संसाधनों और तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
चमोली Chamoli Tunnel Landslide हादसे ने पहाड़ी क्षेत्रों में चल रही सुरंग और जल विद्युत परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहाड़ी इलाकों में भूगर्भीय परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण होती हैं। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों, भूगर्भीय सर्वेक्षण, निगरानी और आपातकालीन बचाव व्यवस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान तीन लापता मजदूरों को खोजने और घायल श्रमिकों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने पर है। वहीं, मजिस्ट्रियल जांच के बाद ही हादसे के कारणों और संभावित लापरवाही की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।
read on:https://news7hindi.com/there-was-a-ruckus-on-the-r-of-the-new-logo-users-created-a-market-of-memes/
or advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

