Health Special: भारी Thighs सिर्फ मोटापे की वजह नहीं, Monsoon में क्यों होते हैं Infections और Aluminium Foil कितना Safe?

Editorial
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सेहत से जुड़े कई सवाल ऐसे हैं, जिनका सामना हम रोजमर्रा की जिंदगी में करते हैं, लेकिन सही जानकारी न होने की वजह से हम अक्सर खुद ही निष्कर्ष निकाल लेते हैं। शरीर के किसी हिस्से पर ज्यादा फैट देखकर उसे सिर्फ मोटापे से जोड़ देना हो, बारिश के मौसम में बार-बार बीमार पड़ना हो या फिर खाने को Aluminium Foil में पैक करने की आदत—इन सभी को लेकर सही जानकारी होना जरूरी है।आज की Health Special में हम ऐसे ही तीन अहम सवालों के जवाब आसान भाषा में समझेंगे। साथ ही यह भी जानेंगे कि किन परिस्थितियों में डॉक्टर या हेल्थकेयर प्रोफेशनल से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

क्या Heavy Thighs सिर्फ मोटापे की वजह से होती हैं?

अगर किसी व्यक्ति की thighs, hips या lower body शरीर के दूसरे हिस्सों की तुलना में ज्यादा भारी दिखाई देती है, तो इसका मतलब हमेशा यह नहीं होता कि वजह सिर्फ सामान्य वजन बढ़ना है।शरीर में फैट किस जगह और किस अनुपात में जमा होगा, यह कई चीजों पर निर्भर कर सकता है। इनमें genetics, body structure, hormones और overall weight जैसी चीजें शामिल हैं। कुछ मामलों में lower body में असामान्य तरीके से फैट जमा होने के पीछे Lipedema जैसी medical condition भी संभावित वजह हो सकती है।Lipedema में आमतौर पर शरीर के दोनों तरफ पैरों और lower body में फैट का असामान्य वितरण देखा जा सकता है। कुछ लोगों को पैरों में भारीपन या दर्द महसूस हो सकता है और त्वचा पर आसानी से bruising यानी नीले निशान पड़ सकते हैं।कुछ मामलों में व्यक्ति को ऐसा महसूस हो सकता है कि diet या सामान्य physical activity के बावजूद lower body में अपेक्षित बदलाव नहीं हो रहा है।हालांकि यहां एक बेहद जरूरी बात समझना जरूरी है—हर heavy thigh या heavy lower body Lipedema नहीं होती। सामान्य body structure, genetics या वजन बढ़ने की वजह से भी शरीर के निचले हिस्से में ज्यादा fat हो सकता है।इसलिए सोशल मीडिया पर किसी तस्वीर या वीडियो को देखकर खुद से किसी बीमारी का diagnosis करना सही नहीं है। अगर शरीर में लगातार असामान्य बदलाव, दर्द, भारीपन या आसानी से bruising जैसी समस्या महसूस होती है, तो healthcare professional से सलाह लेना बेहतर है।

Body Shape को लेकर गलत धारणा से बचें

हर शरीर का आकार और fat distribution अलग हो सकता है। इसलिए किसी व्यक्ति की body shape को देखकर उसे unhealthy या overweight मान लेना सही नहीं है।सेहत का आकलन केवल appearance से नहीं किया जा सकता। जरूरी है कि व्यक्ति के overall health, symptoms और medical history को ध्यान में रखा जाए।

Monsoon में एक के बाद दूसरा Infection क्यों?

बारिश का मौसम आते ही fever, cold-cough, vomiting और diarrhea जैसी समस्याएं कई लोगों में देखने को मिलती हैं। कई बार ऐसा भी लगता है कि एक बीमारी से ठीक होने से पहले दूसरी समस्या शुरू हो गई।इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।Monsoon के दौरान humidity और temperature में बदलाव होता है। साथ ही दूषित पानी और contaminated food के संपर्क में आने की संभावना कुछ परिस्थितियों में बढ़ सकती है। दूसरी तरफ respiratory infections वायरस के जरिए फैल सकते हैं।यानी एक infection का source respiratory virus हो सकता है, जबकि दूसरा contaminated food या water से जुड़ा हो सकता है। इसलिए एक ही समय के आसपास अलग-अलग infections होना संभव है।अगर शरीर पहले से किसी infection से लड़ रहा हो, तो कमजोरी, कम नींद, dehydration या appetite कम होने जैसी समस्याओं के कारण recovery मुश्किल महसूस हो सकती है।

Monsoon में Infection से बचने के लिए क्या करें?

बारिश के मौसम में hygiene पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।

  • खाना खाने से पहले और बाद में हाथ अच्छी तरह धोएं।
  • साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें।
  • खुले में रखा या संदिग्ध तरीके से रखा खाना खाने से बचें।
  • फल और सब्जियों को अच्छी तरह साफ करें।
  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
  • पर्याप्त आराम और नींद लें।
  • बीमारी के दौरान dehydration से बचने के लिए पर्याप्त fluids लें, यदि स्वास्थ्य स्थिति इसकी अनुमति देती हो।

और सबसे महत्वपूर्ण बात—हर fever या infection में खुद से antibiotics लेना सही नहीं है। Antibiotics कुछ bacterial infections में उपयोगी होती हैं, लेकिन हर infection bacterial नहीं होता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर ही सही दवा और उसकी अवधि तय कर सकते हैं।अगर तेज या लगातार बुखार, सांस लेने में परेशानी, बहुत ज्यादा कमजोरी, लगातार उल्टी-दस्त या dehydration जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो medical advice लेना जरूरी है।

Aluminium Foil में खाना Pack करना कितना Safe?

Aluminium foil का इस्तेमाल घरों और kitchens में खाना पैक करने के लिए लंबे समय से किया जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इसमें खाना रखना हमेशा सुरक्षित है?सामान्य तौर पर Aluminium Foil का इस्तेमाल हर स्थिति में खतरनाक नहीं माना जाता। लेकिन food का प्रकार और उसे कितनी देर तक foil के संपर्क में रखा जा रहा है, यह महत्वपूर्ण है।खास तौर पर acidic और salty foods के मामले में सावधानी बरतना बेहतर है। Tomato-based food, vinegar वाले खाद्य पदार्थ या ज्यादा salty dishes को Aluminium Foil के direct contact में लंबे समय तक रखने पर aluminium के food में migrate होने की संभावना बढ़ सकती है।इसलिए ऐसे foods को लंबे समय तक store करने के लिए glass या suitable food-grade container बेहतर विकल्प हो सकता है।

Aluminium Foil और Microwave को लेकर सावधानी

एक और महत्वपूर्ण बात है—Aluminium Foil को microwave में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जब तक उपकरण के manufacturer के निर्देश विशेष रूप से इसकी अनुमति न दें। धातु के कारण microwave में सुरक्षा संबंधी समस्या पैदा हो सकती है।इसके अलावा सिर्फ foil में पैक कर देना food safety की गारंटी नहीं है। Cooked food को लंबे समय तक room temperature पर छोड़ना भी सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि अनुकूल परिस्थितियों में bacteria तेजी से बढ़ सकते हैं।इसलिए भोजन को सही समय पर refrigerate करना और उसे उचित temperature पर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

Health में डर नहीं, सही जानकारी जरूरी

इन तीनों सवालों से एक बात साफ होती है कि स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।हर heavy thigh मोटापे की वजह से नहीं होती, लेकिन हर ऐसी स्थिति को Lipedema मान लेना भी गलत है।Monsoon में एक से ज्यादा infections होना संभव है, क्योंकि अलग-अलग infections के sources अलग हो सकते हैं। ऐसे में hygiene, साफ पानी और सुरक्षित भोजन महत्वपूर्ण हैं।वहीं Aluminium Foil एक convenient kitchen product है, लेकिन acidic या salty food को लंबे समय तक इसमें रखने और microwave में इस्तेमाल करने से सावधानी बरतनी चाहिए।आखिर में सबसे जरूरी बात—Health से जुड़ी जानकारी को सोशल मीडिया के अधूरे दावों के आधार पर नहीं, बल्कि विश्वसनीय medical guidance और healthcare professionals की सलाह के आधार पर समझना चाहिए।क्योंकि स्वस्थ रहने का मतलब सिर्फ बीमारी से बचना नहीं, बल्कि अपने शरीर के संकेतों को समझना और सही समय पर सही फैसला लेना भी है।

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