नई दिल्ली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर अमेरिकी आयोग की हालिया टिप्पणी पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी आयोग ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) की ओर से RSS के सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने और उसके नेताओं को उच्चस्तरीय कूटनीतिक मुलाकातों से दूर रखने की अपील को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आयोग को पक्षपाती बताते हुए कहा कि वह वर्षों से भारत को लेकर भ्रामक और उकसाने वाली टिप्पणियां करता रहा है।भारत की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब RSS प्रमुख मोहन भागवत के 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर जाने की खबरों के बीच USCIRF ने RSS को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। आयोग के अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से RSS नेताओं को उच्चस्तरीय बैठकों या राजनयिक सम्मान से दूर रखने की अपील की थी।
भारत ने USCIRF को बताया पक्षपाती
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में USCIRF की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह संगठन लंबे समय से भारत के खिलाफ ऐसी टिप्पणियां करता रहा है। उन्होंने इसे “biased organisation” बताते हुए कहा कि ऐसे संगठनों का अपना एजेंडा है और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।भारत का कहना है कि USCIRF की टिप्पणियों को भारत की वास्तविक सामाजिक और लोकतांत्रिक परिस्थितियों का निष्पक्ष आकलन नहीं माना जा सकता। विदेश मंत्रालय पहले भी आयोग की रिपोर्टों को चयनात्मक और विकृत तस्वीर पेश करने वाला बता चुका है।
USCIRF ने RSS पर क्या कहा?
USCIRF के अधिकारियों ने हाल ही में अमेरिकी सरकार से RSS के सदस्यों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की मांग की। आयोग के कमिश्नर जीन मिल्स ने कहा कि RSS नेताओं को उच्चस्तरीय बैठकों या राजनयिक सम्मान के बजाय उन सदस्यों पर कार्रवाई पर ध्यान दिया जाना चाहिए, जिन्हें धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाया जाए।USCIRF अध्यक्ष आसिफ महमूद ने भी RSS को लेकर गंभीर आरोप लगाए। आयोग का कहना है कि RSS से जुड़े कुछ समूहों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमलों के आरोप रहे हैं। हालांकि भारत सरकार ने आयोग के इस आकलन को स्वीकार नहीं किया है और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है।
मोहन भागवत की विदेश यात्रा के बीच आया बयान
USCIRF की ताजा टिप्पणी RSS प्रमुख मोहन भागवत की प्रस्तावित विदेश यात्रा से पहले आई है। रिपोर्टों के अनुसार, भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर जाने वाले हैं। इसी दौरान न्यूयॉर्क में होने वाले एक कार्यक्रम को लेकर भी चर्चा है।USCIRF ने भागवत की यात्रा के संदर्भ में RSS नेताओं के साथ अमेरिकी अधिकारियों के संभावित संपर्क पर आपत्ति जताई। आयोग की ओर से अमेरिकी प्रशासन से RSS नेताओं को उच्चस्तरीय राजनयिक मुलाकातों से दूर रखने की अपील की गई।
पहले भी USCIRF की रिपोर्ट खारिज कर चुका है भारत
RSS को लेकर मौजूदा विवाद पहली बार नहीं है। भारत और USCIRF के बीच धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। मार्च 2026 में USCIRF की वार्षिक रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने आयोग पर भारत की स्थिति की “distorted and selective” तस्वीर पेश करने का आरोप लगाया था।विदेश मंत्रालय ने तब कहा था कि आयोग संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक आख्यानों पर निर्भर करता है। भारत ने यह भी कहा था कि लगातार इस तरह की टिप्पणियां आयोग की अपनी विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं।USCIRF की 2026 की रिपोर्ट में भारत को धार्मिक स्वतंत्रता के संदर्भ में गंभीर आलोचना का सामना करने वाले देशों में रखा गया और RSS समेत कुछ संस्थाओं के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों की सिफारिश की गई थी।

भारत ने अमेरिका में धार्मिक असहिष्णुता का मुद्दा भी उठाया
विदेश मंत्रालय ने पहले USCIRF की आलोचना के जवाब में अमेरिका में हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ और भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ कथित असहिष्णुता जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया था। भारत ने आयोग से कहा था कि केवल भारत पर चयनात्मक टिप्पणी करने के बजाय उसे अमेरिका में धार्मिक स्थलों और भारतीय समुदाय से जुड़े मामलों पर भी ध्यान देना चाहिए।भारत का रुख स्पष्ट है कि धार्मिक स्वतंत्रता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा तथ्यों और निष्पक्ष आकलन के आधार पर होनी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने USCIRF की लगातार टिप्पणियों को भारत के प्रति पूर्वाग्रहपूर्ण दृष्टिकोण से जोड़कर देखा है।
विवाद से भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या असर?
USCIRF की टिप्पणी और भारत की प्रतिक्रिया के बीच एक महत्वपूर्ण बात यह है कि USCIRF एक अमेरिकी संघीय आयोग है, लेकिन उसकी सिफारिशें अमेरिकी सरकार के लिए सीधे बाध्यकारी आदेश नहीं होतीं। आयोग धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति का आकलन करता है और अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री तथा कांग्रेस के सामने नीतिगत सिफारिशें रखता है।इसलिए RSS को लेकर USCIRF की टिप्पणी को भारत-अमेरिका के आधिकारिक संबंधों का अंतिम रुख मानना उचित नहीं होगा। हालांकि, ऐसे बयान दोनों देशों के बीच सार्वजनिक और कूटनीतिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं।
अब आगे क्या?
RSS पर अमेरिकी आयोग की टिप्पणी को भारत द्वारा खारिज किए जाने के बाद यह विवाद फिलहाल राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर USCIRF अपने धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी आकलन पर कायम है, वहीं भारत सरकार आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है।फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों पक्षों के दावे और आकलन अलग-अलग हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह USCIRF की टिप्पणियों को अपने बारे में निष्पक्ष निष्कर्ष नहीं मानता। आने वाले दिनों में मोहन भागवत की प्रस्तावित विदेश यात्रा और उसके दौरान होने वाली गतिविधियों पर भी इस विवाद की छाया देखने को मिल सकती है।
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