भारतीय क्रिकेट में कुछ खिलाड़ियों का टीम इंडिया तक पहुंचने का सफर सिर्फ आंकड़ों की वजह से खास नहीं होता, बल्कि उसके पीछे छिपी मेहनत और संघर्ष की कहानी उन्हें यादगार बना देती है। सारांश जैन का भारतीय टेस्ट टीम तक पहुंचने का सफर भी ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है। मध्य प्रदेश के इस ऑलराउंडर ने 23 अगस्त को श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में 33 साल 145 दिन की उम्र में टेस्ट डेब्यू किया।सारांश को भारतीय टीम की टेस्ट कैप रवींद्र जडेजा ने सौंपी। करीब 11 साल तक घरेलू क्रिकेट में लगातार मेहनत करने के बाद मिला यह मौका उनके लिए बेहद खास रहा। उनकी कहानी में क्रिकेट के साथ परिवार का संघर्ष और पिता की वह चिट्ठी भी शामिल है, जिसने मुश्किल दौर में उन्हें आगे बढ़ते रहने की ताकत दी।

33 साल की उम्र में टेस्ट डेब्यू, बनाया खास रिकॉर्ड
सारांश जैन 33 साल 145 दिन की उम्र में भारत के लिए टेस्ट खेलने वाले खिलाड़ियों की खास सूची में शामिल हो गए हैं। 1999 के बाद वह भारत के सबसे उम्रदराज टेस्ट डेब्यूटेंट बने।हालांकि भारतीय क्रिकेट इतिहास में उनसे अधिक उम्र में टेस्ट डेब्यू करने वाले कई खिलाड़ी रहे हैं। इस सूची में सीके नायडू, रुस्तमजी जमशेदजी, कोटार रामास्वामी और अमीर इलाही जैसे नाम शामिल हैं।
भारत के लिए 33 साल या उससे अधिक उम्र में टेस्ट डेब्यू करने वाले खिलाड़ी
| खिलाड़ी | टेस्ट डेब्यू | डेब्यू के समय उम्र |
|---|---|---|
| सारांश जैन | 23 अगस्त 2026 | 33 साल, 145 दिन |
| रॉबिन सिंह | 7 अक्टूबर 1998 | 35 साल, 23 दिन |
| राकेश शुक्ला | 17 सितंबर 1982 | 34 साल, 225 दिन |
| पानामल पंजाबी | 1 जनवरी 1955 | 33 साल, 103 दिन |
| शाह नायलचंद | 16 अक्टूबर 1952 | 33 साल, 287 दिन |
| श्यूट बनर्जी | 23 मार्च 1949 | 37 साल, 124 दिन |
| केकी खुर्शेदजी तारापोर | 22 अप्रैल 1948 | 37 साल, 332 दिन |
| अमीर इलाही | 12 दिसंबर 1947 | 39 साल, 102 दिन |
| कोटार रामास्वामी | 27 जून 1936 | 40 साल, 39 दिन |
| रुस्तमजी जमशेदजी | 15 दिसंबर 1933 | 41 साल, 27 दिन |
| लाधा रामजी | 15 दिसंबर 1933 | 33 साल, 308 दिन |
| सीके नायडू | 25 जून 1932 | 36 साल, 238 दिन |

11 साल की मेहनत के बाद मिला टीम इंडिया का टिकट
सारांश जैन ने 2014 के आखिर में मध्य प्रदेश के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार अपनी उपयोगिता साबित की। दाएं हाथ के ऑफ स्पिनर और बाएं हाथ के बल्लेबाज सारांश बल्ले और गेंद दोनों से टीम के लिए योगदान देते रहे।घरेलू क्रिकेट में अच्छे प्रदर्शन के बावजूद भारतीय टीम तक पहुंचने के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा। लेकिन इस दौरान उन्होंने अपनी मेहनत और प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखी। आखिरकार श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली।

पिता की चिट्ठी बनी संघर्ष के दिनों में सहारा
सारांश जैन के क्रिकेट करियर में उनके पिता सुबोध जैन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। सुबोध खुद मध्य प्रदेश के लिए रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं। ऐसे में सारांश को क्रिकेट का माहौल परिवार से ही मिला।करियर के शुरुआती दौर में परिवार ने मुश्किल समय भी देखा। जब सारांश ऑस्ट्रेलिया दौरे पर क्रिकेट खेलने गए थे, उसी दौरान उनके पिता का कैंसर का ऑपरेशन हुआ। सर्जरी के बाद वह बोल नहीं पा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने बेटे के लिए एक चिट्ठी लिखी।इस चिट्ठी में सारांश को क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित रखने और अपने लक्ष्य के लिए मेहनत जारी रखने की सीख दी गई थी। सारांश ने इस चिट्ठी को संभालकर रखा। लंबे इंतजार के दौरान यह उनके लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बनी रही।

रणजी ट्रॉफी में बल्ले और गेंद से किया शानदार प्रदर्शन
सारांश जैन 2021-22 रणजी ट्रॉफी जीतने वाली मध्य प्रदेश टीम के महत्वपूर्ण सदस्य थे। मुंबई के खिलाफ फाइनल में उन्होंने 57 रन की उपयोगी पारी खेली और टीम की ऐतिहासिक खिताबी जीत में योगदान दिया।रणजी ट्रॉफी 2022-23 में सारांश का प्रदर्शन और भी प्रभावशाली रहा। उन्होंने 360 रन बनाने के साथ 35 विकेट लिए। उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए उन्हें टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर के तौर पर लाला अमरनाथ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।इसके अगले रणजी सीजन में भी उन्होंने अपनी निरंतरता कायम रखी। उन्होंने 57.55 की औसत से 518 रन और 20.43 की औसत से 30 विकेट अपने नाम किए।

सारांश जैन का प्रथम श्रेणी रिकॉर्ड
सारांश जैन के प्रथम श्रेणी क्रिकेट आंकड़े उनकी ऑलराउंड क्षमता को दिखाते हैं। उन्होंने 54 प्रथम श्रेणी मैचों में 188 विकेट लिए हैं। उनका गेंदबाजी औसत 27.30 रहा है और वह 10 बार पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा कर चुके हैं।बल्लेबाजी में भी उन्होंने उपयोगी योगदान दिया है। उनके नाम 2,223 रन हैं। उन्होंने ये रन 31.75 की औसत से बनाए हैं। उनके खाते में दो शतक और 14 अर्धशतक भी दर्ज हैं।
दलीप ट्रॉफी और भारत-ए में भी चमके
साल 2025 की दलीप ट्रॉफी में सारांश ने सेंट्रल जोन को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने टूर्नामेंट में 16 विकेट लिए और प्लेयर ऑफ द सीरीज चुने गए।इसके बाद भारत-ए के श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने प्रभावशाली प्रदर्शन किया। गॉल में श्रीलंका-ए के खिलाफ चार दिवसीय मुकाबले में सारांश ने छह विकेट लेने के साथ नाबाद 70 रन की पारी खेली। स्पिन के लिए अनुकूल परिस्थितियों में इस ऑलराउंड प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा।
आईपीएल से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू
सारांश जैन की एक और खास उपलब्धि यह है कि उन्होंने आईपीएल में खेलने से पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा। वह उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने आईपीएल डेब्यू से पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला।इससे पहले मुरली विजय और मोहम्मद शमी जैसे खिलाड़ी भी इस तरह की उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।
अब 11 साल के इंतजार के बाद नई शुरुआत
श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में सारांश जैन को कुलदीप यादव की जगह प्लेइंग-11 में शामिल किया गया। उनके चयन से भारतीय टीम को ऑफ स्पिन का अतिरिक्त विकल्प मिला।सारांश के लिए यह सिर्फ एक टेस्ट मैच नहीं है। यह 11 साल की घरेलू क्रिकेट की मेहनत, लगातार इंतजार, पिता की प्रेरणादायक चिट्ठी और अपने सपने पर विश्वास का परिणाम है। 33 साल की उम्र में टेस्ट कैप हासिल कर सारांश जैन ने यह संदेश भी दिया है कि क्रिकेट में मौके देर से मिल सकते हैं, लेकिन लगातार मेहनत और प्रदर्शन के दम पर मंजिल हासिल की जा सकती है।
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