SIR को लेकर चिदंबरम का बड़ा दावा: बोले- 10 करोड़ वोटर हो सकते हैं वोटिंग अधिकार से वंचित, नवदीप सूरी के पोस्ट का किया हवाला

Editorial
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नई दिल्ली चुनावी प्रक्रिया से जुड़े स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने SIR के संभावित प्रभाव को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी की ओर से किए गए एक पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि SIR की प्रक्रिया से करीब 10 करोड़ नागरिक वोटिंग अधिकार से वंचित हो सकते हैं।चिदंबरम के इस बयान के बाद SIR को लेकर राजनीतिक और चुनावी बहस और तेज होने के आसार हैं। हालांकि, 10 करोड़ मतदाताओं के वोटिंग अधिकार से वंचित होने का दावा एक राजनीतिक टिप्पणी के रूप में सामने आया है और इसे आधिकारिक अंतिम आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

नवदीप सूरी के पोस्ट का चिदंबरम ने दिया हवाला

पी. चिदंबरम ने अपने बयान में पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी के एक सोशल मीडिया पोस्ट का उल्लेख किया। इसी पोस्ट में SIR की प्रक्रिया से बड़ी संख्या में मतदाताओं के प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।चिदंबरम ने इसी दावे को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अगर SIR की प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम मतदाता सूची से हटते हैं, तो करोड़ों नागरिक मतदान के अधिकार से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों से जोड़ते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की।हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी मतदाता का नाम सूची में शामिल होना या हटना निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और संबंधित चुनावी प्राधिकरण की जांच के आधार पर तय होता है। इसलिए 10 करोड़ मतदाताओं के वास्तविक रूप से मतदान से वंचित होने का आकलन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

क्या है SIR?

SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) मतदाता सूची के व्यापक सत्यापन और पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना होता है।इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में दर्ज नामों और संबंधित विवरणों का सत्यापन किया जा सकता है। पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखने के साथ-साथ अपात्र, मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अयोग्य पाए गए नामों को नियमों के अनुसार हटाने की प्रक्रिया भी की जा सकती है।SIR को लेकर सबसे बड़ी बहस यही है कि सत्यापन की प्रक्रिया में ऐसे पात्र मतदाता प्रभावित न हों, जो आवश्यक दस्तावेज या जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं करा पाते।

वोटर लिस्ट को लेकर विपक्ष की चिंता

SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक का नाम केवल तकनीकी या दस्तावेजी कारणों से नहीं हटना चाहिए।पी. चिदंबरम का ताजा बयान भी इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने 10 करोड़ मतदाताओं के संभावित रूप से प्रभावित होने का दावा करते हुए चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।कांग्रेस की ओर से समय-समय पर मतदाता सूची की पारदर्शिता, नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए जाते रहे हैं।

10 करोड़ का आंकड़ा कितना अहम?

चिदंबरम के बयान में सामने आया 10 करोड़ का आंकड़ा राजनीतिक बहस के लिहाज से बेहद बड़ा है। यदि इतने बड़े स्तर पर मतदाता सूची में बदलाव होता है तो इसका चुनावी प्रभाव व्यापक हो सकता है। हालांकि, इस आंकड़े को लेकर आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत चुनावी आंकड़ों का इंतजार करना जरूरी है।किसी भी मतदाता का नाम सूची से हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। ऐसे में SIR की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने और चुनावी संस्थाओं की ओर से आधिकारिक आंकड़े जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने नाम जोड़े गए, कितने हटाए गए और कितने मतदाता वास्तव में प्रभावित हुए।

लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा

मतदान का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर होने वाली बहस सीधे नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ जाती है।चिदंबरम का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाता सूची से बाहर होते हैं, तो इसका असर मतदान प्रक्रिया पर पड़ सकता है। वहीं, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य चुनावी सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाना भी बताया जाता है।यही कारण है कि SIR को लेकर राजनीतिक दलों, चुनावी विशेषज्ञों और आम मतदाताओं के बीच चर्चा बढ़ी है।

आगे क्या होगा?

SIR की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ मतदाता सूची में होने वाले बदलावों पर नजर रहेगी। जिन लोगों के नाम को लेकर कोई आपत्ति या समस्या होगी, उनके लिए संबंधित चुनावी प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने के प्रावधान होते हैं।इस पूरी प्रक्रिया में मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपने नाम और विवरण की स्थिति की जांच करते रहें और यदि कोई समस्या सामने आती है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसका समाधान कराने का प्रयास करें।SIR को लेकर पी. चिदंबरम के 10 करोड़ मतदाताओं के संभावित रूप से वोटिंग अधिकार से वंचित होने के दावे ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। उन्होंने पूर्व राजनयिक नवदीप सूरी के पोस्ट का हवाला देते हुए यह चिंता जताई। हालांकि, 10 करोड़ का आंकड़ा अभी राजनीतिक दावे के रूप में सामने आया है और इसकी आधिकारिक पुष्टि अलग से आवश्यक है। SIR की प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित आधिकारिक आंकड़े सामने आने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

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