रिपोर्ट :दीपचंद्र दीक्षित
फर्रुखाबाद थाना नवाबगंज क्षेत्र के गांव नगला जब्ब में चकबंदी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। चकबंदी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की तहरीर पर 21 नामजद समेत करीब 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं और किसानों ने गांव बराकेशव में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।किसानों ने मुकदमा वापस लेने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने और गांव में चल रही चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की है। किसान संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
चकबंदी कार्रवाई के दौरान हुआ था विवाद
जानकारी के अनुसार, गांव नगला जब्ब में चकबंदी से संबंधित कार्रवाई चल रही थी। इसी दौरान भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ताओं और चकबंदी विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और दोनों पक्षों में तनाव की स्थिति बन गई।चकबंदी विभाग के कर्मचारियों की ओर से आरोप लगाया गया कि विवाद बढ़ने पर उन्होंने खुद को बचाने के लिए एक ग्रामीण के घर में शरण ली। आरोप है कि इसके बाद कुछ लोग घर के अंदर पहुंच गए और कर्मचारियों के साथ मारपीट की गई। कर्मचारियों ने सरकारी अभिलेख छीने जाने का भी आरोप लगाया है।घटना के बाद चकबंदी विभाग की ओर से नवाबगंज थाने में तहरीर दी गई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर 21 नामजद और करीब 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
मुकदमा दर्ज होते ही किसानों में आक्रोश
मुकदमा दर्ज होने की जानकारी सामने आने के बाद भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के कार्यकर्ताओं और किसानों में नाराजगी बढ़ गई। किसान संगठन का आरोप है कि चकबंदी से जुड़े विवाद में किसानों और संगठन के कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज करना उचित नहीं है।इसी के विरोध में सोमवार को बड़ी संख्या में किसान और भाकियू पदाधिकारी गांव बराकेशव में एकत्र हुए। इसके बाद किसानों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया।धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि जब तक दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए जाते और चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई
धरने के दौरान किसानों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि विवाद की वास्तविक परिस्थितियों की जांच किए बिना बड़ी संख्या में लोगों को मुकदमे में नामजद और अज्ञात के रूप में शामिल करना उचित नहीं है।किसानों ने प्रशासन से मांग की कि घटनास्थल से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जाए, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए जाएं और इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।संगठन का कहना है कि किसानों के हितों से जुड़े चकबंदी के मामलों में प्रशासन को संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए, ताकि ग्रामीणों में असंतोष की स्थिति पैदा न हो।
जिलाध्यक्ष ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरने को संबोधित करते हुए भाकियू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष अजय कटिहार ने कहा कि किसानों और संगठन के कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमा अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि संगठन किसानों के साथ खड़ा है और मामले में न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रहेगा।उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। जिलाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मुकदमे वापस लेने और चकबंदी प्रक्रिया निरस्त किए जाने तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।

सैकड़ों किसान धरने में शामिल
अनिश्चितकालीन धरने में भाकियू (टिकैत) के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। धरने में अरविंद कुमार शाक्य, छविनाथ शाक्य, अफरोज मंसूरी समेत संगठन के अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।किसानों ने कहा कि चकबंदी प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों की समस्याओं और आपत्तियों को प्रशासन को गंभीरता से सुनना चाहिए। उनका आरोप है कि किसानों की समस्याओं का समाधान किए बिना कार्रवाई आगे बढ़ाने से विवाद की स्थिति पैदा हुई।धरना स्थल पर किसानों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि संगठन किसानों के अधिकारों और जमीन से जुड़े मामलों में उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा।
पुलिस की जांच जारी
दूसरी ओर, नवाबगंज पुलिस ने चकबंदी विभाग की तहरीर पर दर्ज मुकदमे की जांच शुरू कर दी है। पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों को जुटाने और आरोपों की जांच में लगी है।मामले में पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमे में 21 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि करीब 100 अज्ञात लोगों का भी उल्लेख किया गया है। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि घटना के समय वास्तव में क्या हुआ था और दर्ज आरोपों में कितनी सच्चाई है।पुलिस जांच के साथ-साथ प्रशासन के सामने किसान संगठन के आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त कराने की चुनौती भी है।
प्रशासन और किसानों के बीच वार्ता पर टिकी नजर
चकबंदी विवाद के बाद एक ओर पुलिस मामले की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाकियू (टिकैत) ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन और किसान संगठन के बीच वार्ता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।किसानों की मुख्य मांग मुकदमा वापस लेने, निष्पक्ष जांच कराने और चकबंदी प्रक्रिया निरस्त करने की है। वहीं, चकबंदी विभाग की शिकायत पर पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।अब देखना होगा कि प्रशासन किसान संगठन के साथ बातचीत के जरिए इस विवाद का क्या समाधान निकालता है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनी तो आंदोलन के आगे बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
चकबंदी विवाद से बढ़ा तनाव
नगला जब्ब गांव में चकबंदी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस मुकदमे और किसान आंदोलन तक पहुंच गया है। एक तरफ चकबंदी विभाग के कर्मचारी अपने साथ मारपीट और सरकारी अभिलेख छीने जाने का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी ओर भाकियू (टिकैत) मुकदमे को किसानों के खिलाफ कार्रवाई बताते हुए इसका विरोध कर रही है।फिलहाल पुलिस जांच और किसान संगठन का अनिश्चितकालीन धरना दोनों जारी हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और किसान नेताओं के साथ होने वाली वार्ता से ही स्पष्ट होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
read on:https://news7hindi.com/farrukhabad-ramganga-pul-bike-accident-youth-death/
advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

