नेपाल में बाढ़ से तबाही: 7 की मौत, 384 लापता; 105 भारतीय शामिल

Editorial
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काठमांडू उत्तरी नेपाल में भोटे कोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। तिब्बत सीमा से सटे रसुवा और आसपास के इलाकों में बाढ़ का पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि कई घर, वाहन, पुल और बुनियादी ढांचा बह गया। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में 105 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रसुवा जिले के तिमुरे और स्याब्रुबेसी शामिल हैं। यहां अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने से लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कई जगहों पर सड़क संपर्क टूट गया है और राहत एवं बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जारी है।

384 लोग लापता, 291 विदेशी नागरिक शामिल

नेपाल पर्यटन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, कुल 384 यात्री लापता बताए जा रहे हैं। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। विदेशी नागरिकों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 105 भारतीय नागरिक लापता हैं।अलग-अलग पर्यटन एजेंसियों के जरिए यात्रा कर रहे लोग बाढ़ की चपेट में आए इलाकों में मौजूद थे। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लापता लोगों की पहचान और लोकेशन का पता लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

अचानक बढ़ा नदी का जलस्तर

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, बुधवार सुबह करीब नौ बजे भोटे कोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने की सूचना मिली। अधिकारियों का अनुमान है कि बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से आया हो सकता है। अचानक आई इस बाढ़ ने सीमावर्ती क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया।रसुवा प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि कई गांवों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बह जाने की खबर मिली है। फिलहाल नुकसान का पूरा आकलन नहीं हो पाया है, क्योंकि राहत और आकलन दल प्रभावित क्षेत्रों से जानकारी जुटाने में लगे हैं।

15 हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट प्रभावित

नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ का असर केवल रिहायशी इलाकों तक सीमित नहीं रहा। नेपाल स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ के अनुसार, बाढ़ से करीब 15 हाइड्रो पावर परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें 10 परियोजनाएं चालू थीं, जबकि पांच निर्माणाधीन थीं।बाढ़ के तेज बहाव से बिजली परियोजनाओं से जुड़े ढांचे और आसपास के क्षेत्रों को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। इससे नेपाल के जलविद्युत क्षेत्र पर भी असर पड़ने की आशंका है।

पुल, वाहन और सीमा शुल्क परिसर भी प्रभावित

नेपाल सेना के अनुसार, तिमुरे और स्याब्रुबेसी क्षेत्र में बाढ़ ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है। कई वाहन, व्यावसायिक सामान और दूसरी संपत्तियां पानी में बह गईं। हाल ही में बनाया गया एक पुल भी बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो गया।रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय परिसर में खड़े कई वाहन और वहां रखा सामान भी बह गया। इससे सीमा क्षेत्र में व्यापार और आवागमन पर भी असर पड़ा है।वहीं उत्तरी रसुवा की एक सीमा चौकी पर तैनात नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल के चार जवान भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा नेपाल पुलिस के 32 जवानों और सीमा शुल्क कार्यालय से जुड़े कर्मचारियों के भी संपर्क से बाहर होने की जानकारी सामने आई है।

नेपाल सरकार ने बढ़ाई निगरानी

बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए नेपाल सरकार ने प्रभावित और संभावित संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई है।प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि नदी के किनारे जाने से बचें और खतरा बढ़ने की स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी विशेष रूप से सतर्क रहने को कहा गया है।

प्रधानमंत्री ने बुलाई उच्चस्तरीय बैठक

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में प्रभावित जिलों के जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव अभियान की समीक्षा की गई।प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करने और निचले क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। विस्थापित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरतमंदों तक तत्काल सहायता पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।

WHO ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी आपातकालीन सहायता की घोषणा की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रभावित लोगों के लिए दवाएं, स्वास्थ्य उपकरण और आपातकालीन टेंट भेजे जा रहे हैं।काठमांडू के अस्पतालों में भी बाढ़ प्रभावित लोगों के इलाज के लिए आपातकालीन बेड आरक्षित किए गए हैं। गंभीर रूप से घायल कुछ लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए काठमांडू पहुंचाया गया है।

14 हेलीकॉप्टरों से रेस्क्यू ऑपरेशन

बाढ़ के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की संयुक्त टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। तलाशी अभियान के लिए 14 हेलीकॉप्टर लगाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार दोपहर तक 25 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका था।हालांकि कई इलाकों में सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ प्रशासन नुकसान का विस्तृत आकलन भी कर रहा है।

भारत पर भी बढ़ सकता है असर

नेपाल में आई इस अचानक बाढ़ को देखते हुए भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी चिंता बढ़ गई है। खासकर बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर को लेकर प्रशासन निगरानी कर रहा है। नेपाल से आने वाली नदियों में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।फिलहाल नेपाल में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों को तलाशना, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और संवेदनशील इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है। मृतकों और लापता लोगों की संख्या आगे बढ़ सकती है, क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्रों से अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

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