देहरादून उत्तराखंड के खेल विभाग से जुड़े डिजिटल सिस्टम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। खेल विभाग के लिए पोर्टल और मोबाइल एप विकसित करने वाली कंपनी पर आरोप है कि उसने विभाग की अनुमति के बिना पोर्टल और एप के यूजर आईडी, पासवर्ड और अन्य एक्सेस क्रेडेंशियल बदल दिए। इससे विभाग की कई डिजिटल सेवाओं और खेल योजनाओं का संचालन प्रभावित होने की बात सामने आई है।सबसे बड़ी चिंता खिलाड़ियों के डाटा को लेकर है। बताया जा रहा है कि संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 3.50 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों का डाटा मौजूद है। ऐसे में विभागीय पहुंच बाधित होने के बाद इस डाटा की सुरक्षा और संभावित दुरुपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अभी तक डाटा चोरी होने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल चिंता इस बात की है कि इतने बड़े स्तर पर खिलाड़ियों की जानकारी किसी अनधिकृत व्यक्ति या संस्था की पहुंच में तो नहीं गई।इस मामले में 9 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, पोर्टल और एप का एक्सेस कथित रूप से अनधिकृत तरीके से बंद करने के आरोप में संबंधित आईटी कंपनी के CEO के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
- राष्ट्रीय खेलों के दौरान कंपनी को मिला था काम
- 3.50 लाख खिलाड़ियों का डाटा क्यों महत्वपूर्ण?
- छात्रवृत्ति योजना का डाटा भी सवालों में
- भुगतान का बड़ा हिस्सा हो चुका था
- कई खेल योजनाओं पर पड़ सकता है असर
- आधिकारिक डिजिटल सिस्टम में सुरक्षा क्यों जरूरी?
- मेघालय के राष्ट्रीय खेलों का ठेका भी मिला
- अब जांच से साफ होगी डाटा की असली स्थिति
- खिलाड़ियों की जानकारी की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
राष्ट्रीय खेलों के दौरान कंपनी को मिला था काम
जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय खेलों के समय खेल विभाग ने खेब टेक स्ट्रेटेजी प्राइवेट लिमिटेड को पोर्टल और मोबाइल एप तैयार करने तथा उसके तकनीकी संचालन की जिम्मेदारी दी थी। इस डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल खेल विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों के संचालन के लिए किया जा रहा था।विभाग की योजना थी कि पोर्टल और एप को आगे आईटीडीए के सर्वर पर अपलोड किया जाए। इसी प्रक्रिया के बीच कंपनी द्वारा पोर्टल और एप के लॉगिन क्रेडेंशियल बदल दिए जाने का आरोप सामने आया।विभागीय स्तर पर इस घटनाक्रम को गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल सामान्य जानकारी देने वाला पोर्टल नहीं था, बल्कि कई सरकारी खेल योजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाएं भी इसके जरिए संचालित हो रही थीं।

3.50 लाख खिलाड़ियों का डाटा क्यों महत्वपूर्ण?
इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू खिलाड़ियों का डाटा है। मुख्यमंत्री चैंपियंस ट्रॉफी के लिए करीब 3.50 लाख खिलाड़ियों ने आवेदन किया था। इसके अलावा मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन खेल छात्रवृत्ति योजना से जुड़े खिलाड़ियों का डाटा भी इसी डिजिटल सिस्टम पर मौजूद होने की बात कही जा रही है।ऐसे डाटा में खिलाड़ियों की व्यक्तिगत और आवेदन से संबंधित जानकारियां हो सकती हैं। इसलिए पोर्टल का एक्सेस विभाग के नियंत्रण से बाहर होने की खबर ने डाटा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी तक खिलाड़ियों का डाटा चोरी होने की पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल इसे संभावित जोखिम के तौर पर देखा जा रहा है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसी बाहरी व्यक्ति ने डाटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई थी या नहीं।
छात्रवृत्ति योजना का डाटा भी सवालों में
मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन खेल छात्रवृत्ति योजना भी इस विवाद से जुड़ती दिखाई दे रही है। पिछले वर्ष इस योजना के तहत करीब 3,900 खिलाड़ियों को लगभग 11.25 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दिए जाने की जानकारी सामने आई थी।नई प्रक्रिया के तहत भी खिलाड़ियों से संबंधित आवेदन और अन्य जानकारियां पोर्टल पर दर्ज की गई थीं। ऐसे में विभाग के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इस योजना से जुड़े डाटा की सुरक्षा पूरी तरह बनी हुई है।डिजिटल सिस्टम के एक्सेस को लेकर विवाद सामने आने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि विभाग के पास अपने ही डिजिटल प्लेटफॉर्म का पूरा प्रशासनिक नियंत्रण क्यों नहीं था।

भुगतान का बड़ा हिस्सा हो चुका था
विभागीय सूत्रों के अनुसार, कंपनी को उसके काम के लिए करीब 80 फीसदी भुगतान किया जा चुका था। शेष भुगतान हैंडओवर प्रक्रिया पूरी होने के बाद किया जाना था।आरोप है कि हैंडओवर पूरा होने से पहले ही कंपनी की ओर से पोर्टल और एप के एक्सेस में बदलाव कर दिया गया। यही वजह है कि अब विभाग और कंपनी के बीच जिम्मेदारी तथा अधिकार को लेकर विवाद गहरा गया है।मामले की जांच में यह भी अहम होगा कि कंपनी और विभाग के बीच हुए अनुबंध में पोर्टल, सर्वर, डाटा और एडमिन एक्सेस को लेकर क्या शर्तें तय की गई थीं।
कई खेल योजनाओं पर पड़ सकता है असर
पोर्टल का एक्सेस प्रभावित होने से केवल खिलाड़ियों का डाटा ही चिंता का विषय नहीं है। विभाग की कई योजनाओं और डिजिटल प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ने की बात सामने आई है।उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, पोर्टल का इस्तेमाल राष्ट्रीय खेलों से संबंधित गतिविधियों के साथ-साथ खेल महाकुंभ, मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना और डिजिटल यूथ फेस्टिवल जैसी सरकारी गतिविधियों में भी किया जा रहा था।ऐसे में अगर विभाग के अधिकारी ही अपने सिस्टम में लॉगिन नहीं कर पा रहे हैं तो आवेदन, सत्यापन, रिकॉर्ड अपडेट और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में परेशानी होना स्वाभाविक है।
आधिकारिक डिजिटल सिस्टम में सुरक्षा क्यों जरूरी?
उत्तराखंड का खेल विभाग लगातार डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल को बढ़ा रहा है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी खेल प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स कॉलेज, स्पोर्ट्स हॉस्टल और अन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है।खेल विभाग से जुड़ा KheloUK ऐप भी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और अन्य अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित है। ऐप की आधिकारिक जानकारी में भूमिका आधारित एक्सेस और अधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए लॉगिन आधारित सुविधाओं का उल्लेख है।यही वजह है कि सरकारी डिजिटल सिस्टम में एडमिन एक्सेस, पासवर्ड, सर्वर और डाटा का नियंत्रण स्पष्ट रूप से विभाग के पास रहना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
मेघालय के राष्ट्रीय खेलों का ठेका भी मिला
इस मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि संबंधित कंपनी को कथित तौर पर मेघालय में होने वाले राष्ट्रीय खेलों के लिए भी पोर्टल और एप विकसित करने का काम मिला है।ऐसे में उत्तराखंड में सामने आए विवाद के बाद कंपनी की तकनीकी व्यवस्था, डाटा सुरक्षा और सरकारी प्रोजेक्ट में एक्सेस कंट्रोल को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। मेघालय परियोजना और उत्तराखंड विवाद के बीच किसी तरह की तकनीकी या कानूनी समानता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब जांच से साफ होगी डाटा की असली स्थिति
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 3.50 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों का डाटा सुरक्षित है या नहीं? केवल पोर्टल की ID और पासवर्ड बदलने से यह साबित नहीं होता कि डाटा चोरी हुआ है। लेकिन जब किसी सरकारी विभाग की पहुंच उसके अपने डिजिटल सिस्टम से बाधित होती है, तो डाटा सुरक्षा की स्वतंत्र जांच जरूरी हो जाती है।पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसियां यह पता लगा सकती हैं कि एक्सेस कब बदला गया, किसने बदला, किस अनुमति के आधार पर बदला गया और उस दौरान सर्वर या डाटा तक किसी अनधिकृत व्यक्ति की पहुंच हुई या नहीं।
खिलाड़ियों की जानकारी की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष वे लाखों खिलाड़ी हैं, जिन्होंने सरकारी खेल योजनाओं के लिए अपना डाटा उपलब्ध कराया है। खिलाड़ियों को यह भरोसा होना चाहिए कि आवेदन के दौरान दी गई उनकी व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित है और उसका इस्तेमाल केवल संबंधित सरकारी उद्देश्य के लिए किया जा रहा है।उत्तराखंड खेल विभाग और संबंधित एजेंसियों के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ पोर्टल और एप का प्रशासनिक नियंत्रण जल्द बहाल करना और दूसरी तरफ यह सुनिश्चित करना कि खिलाड़ियों का डाटा पूरी तरह सुरक्षित है।जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, डाटा चोरी की आशंका को पुष्टि हुई घटना के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। लेकिन 3.50 लाख से ज्यादा खिलाड़ियों से जुड़े रिकॉर्ड होने के कारण मामला निश्चित रूप से गंभीर है और इसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच बेहद जरूरी हो जाती है।आने वाले दिनों में जांच से यह साफ होगा कि पोर्टल का एक्सेस क्यों बदला गया, कंपनी की भूमिका क्या थी और खिलाड़ियों के डाटा की सुरक्षा पर वास्तव में कोई खतरा पैदा हुआ था या नहीं।
Read on:http://बंगाल CID की बड़ी कार्रवाई, अभिषेक बनर्जी के PA सुमित रॉय गिरफ्तार
Advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

