नई दिल्ली शराब कारोबारी और किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व मालिक विजय माल्या एक बार फिर चर्चा में हैं। भारत में लंबे समय से चल रही कानूनी कार्रवाई और अपनी वापसी को लेकर माल्या ने दावा किया है कि वह ब्रिटेन से बाहर नहीं जा सकते। उनका कहना है कि ब्रिटिश अदालतों के आदेश के कारण उनके लिए ब्रिटेन छोड़ना कानूनी तौर पर संभव नहीं है। माल्या के मुताबिक, अगर ये प्रतिबंध हटा दिए जाएं तो वह भारत लौट सकते हैं।माल्या का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत में उनके खिलाफ आर्थिक अपराध और बैंक कर्ज से जुड़े मामलों को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर उन लोगों को भी जवाब दिया है जो उन्हें ‘भगोड़ा’ कहते हैं। माल्या का कहना है कि उनका ब्रिटेन में रहना केवल भारत लौटने से इनकार करने का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे ब्रिटेन में लागू कानूनी प्रतिबंध भी हैं।
- माल्या ने क्या कहा?
- फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट में क्या हुआ था?
- अदालत ने भी रखी अपनी शर्त
- आखिर ब्रिटेन से भारत लौटने में दिक्कत क्या है?
- भारत में माल्या की कानूनी स्थिति क्या है?
- क्या माल्या के पास भारत लौटने का कोई रास्ता है?
- ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर माल्या की आपत्ति
- ₹14 हजार करोड़ से ज्यादा की वसूली का भी दावा
- अब आगे क्या होगा?
माल्या ने क्या कहा?
विजय माल्या ने हालिया सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्हें ब्रिटेन छोड़ने की कानूनी अनुमति नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह 1992 से ब्रिटेन के स्थायी निवासी हैं और मौजूदा स्थिति उनकी पसंद से नहीं बनी है।माल्या का तर्क है कि उन्हें लगातार ‘भगोड़ा’ कहने से पहले ब्रिटेन की अदालतों से जुड़े उन आदेशों को भी देखा जाना चाहिए, जिनके कारण उनके लिए देश छोड़ना मुश्किल है। उन्होंने भारत सरकार की कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये माल्या के अपने दावे हैं। उनके खिलाफ भारत में चल रही कानूनी कार्रवाई और उन्हें आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने की प्रक्रिया अलग विषय है।

फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट में क्या हुआ था?
यह विवाद नया नहीं है। फरवरी 2026 में विजय माल्या के वकील ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया था कि वह भारत लौटने की निश्चित तारीख नहीं बता सकते। अदालत में उनकी ओर से कहा गया कि इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों के आदेशों के कारण माल्या ब्रिटेन छोड़ नहीं सकते।माल्या की ओर से यह भी बताया गया था कि वह अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज हासिल करने या रखने की स्थिति में नहीं हैं। इसी वजह से भारत आने के लिए कोई निश्चित समयसीमा बताना उनके लिए संभव नहीं है।

अदालत ने भी रखी अपनी शर्त
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख है। अदालत में माल्या की ओर से Fugitive Economic Offenders Act, 2018 से जुड़ी चुनौती पर सुनवाई की मांग की गई थी। अदालत ने इस मामले में स्पष्ट किया कि अगर माल्या भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में राहत चाहते हैं, तो उन्हें भारत लौटने और अदालत के अधिकार क्षेत्र के अधीन आने की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।यानी मामला केवल इतना नहीं है कि माल्या भारत आना चाहते हैं या नहीं। असली पेच यह है कि एक तरफ वह ब्रिटेन के कानूनी प्रतिबंधों का हवाला दे रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ भारतीय अदालत में उनकी याचिका पर आगे बढ़ने के लिए उनकी भारत वापसी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है।

आखिर ब्रिटेन से भारत लौटने में दिक्कत क्या है?
माल्या की दलील के मुताबिक ब्रिटेन में मौजूद अदालती आदेश उन्हें देश से बाहर जाने से रोकते हैं। पुराने अदालती रिकॉर्ड में भी उनके खिलाफ ऐसी शर्तों का उल्लेख रहा है, जिनमें ब्रिटेन से बाहर जाने पर रोक और अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज से जुड़ी पाबंदियां शामिल थीं। भारत सरकार के एक पुराने संसदीय रिकॉर्ड में 2017 की ब्रिटिश अदालत की जमानत शर्तों में भी उन्हें ब्रिटेन से बाहर नहीं जाने और अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेज के लिए आवेदन नहीं करने की शर्त दर्ज थी।माल्या का कहना है कि जब तक ब्रिटिश अदालतों से इन प्रतिबंधों में राहत नहीं मिलती, तब तक भारत लौटने की तारीख बताना संभव नहीं है।

भारत में माल्या की कानूनी स्थिति क्या है?
विजय माल्या भारत में बैंक कर्ज से जुड़े मामलों और आर्थिक अपराधों को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद में हैं। उन्हें जनवरी 2019 में विशेष अदालत ने Fugitive Economic Offender घोषित किया था। इसके बाद उनकी संपत्तियों और भारत में चल रही कानूनी कार्यवाही को लेकर अलग-अलग प्रक्रियाएं आगे बढ़ीं।माल्या ने इन कार्रवाइयों और अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों पर लगातार सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके मामले में उनके साथ अन्याय हुआ है। दूसरी ओर, भारतीय एजेंसियां और सरकार उनकी वापसी तथा संबंधित कानूनी मामलों को आगे बढ़ाने की कोशिश करती रही हैं।
क्या माल्या के पास भारत लौटने का कोई रास्ता है?
कानूनी तौर पर सबसे अहम बात यही है कि यदि ब्रिटेन की अदालतें उनके ऊपर लगे यात्रा प्रतिबंधों में बदलाव या राहत देती हैं, तो उनकी भारत वापसी का रास्ता खुल सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ब्रिटेन से निकलते ही भारत में उनके खिलाफ मामले खत्म हो जाएंगे।भारत पहुंचने के बाद उन्हें भारतीय न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। उनके खिलाफ मौजूद मामलों, अदालत के आदेशों और आर्थिक अपराध से जुड़े कानूनी प्रावधानों के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय होगी।यही वजह है कि माल्या का यह कहना कि ‘अगर ब्रिटेन छोड़ने की रोक हटे तो भारत लौट सकता हूं’ केवल यात्रा की समस्या नहीं, बल्कि दो देशों की न्यायिक प्रक्रियाओं से जुड़ा जटिल कानूनी मुद्दा है।
‘भगोड़ा’ कहे जाने पर माल्या की आपत्ति
हालिया बयान में माल्या ने खुद को ‘भगोड़ा’ कहे जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनके ब्रिटेन में रहने की मौजूदा स्थिति को केवल भारत लौटने से इनकार के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।उनके अनुसार, ब्रिटेन की अदालतों के आदेशों ने उनके आवागमन को प्रभावित किया है। हालांकि, भारत में उन्हें Fugitive Economic Offender घोषित किए जाने की न्यायिक स्थिति अलग है और इसे केवल उनके हालिया सोशल मीडिया बयान के आधार पर बदला हुआ नहीं माना जा सकता।
₹14 हजार करोड़ से ज्यादा की वसूली का भी दावा
अपने हालिया बयानों में माल्या ने बैंक देनदारियों और संपत्तियों से हुई वसूली का भी मुद्दा उठाया है। उन्होंने एक कथित ED हलफनामे का हवाला देते हुए दावा किया कि उनसे करीब ₹14,131.60 करोड़ की वसूली हो चुकी है। यह आंकड़ा माल्या द्वारा उद्धृत दावा है और इसे उनके बयान के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।माल्या का तर्क है कि जब इतनी बड़ी राशि की वसूली हो चुकी है तो उनकी शारीरिक मौजूदगी को लेकर सवाल अलग तरीके से देखा जाना चाहिए। वहीं भारतीय कानूनी प्रक्रिया में आर्थिक वसूली और आपराधिक/न्यायिक कार्यवाही अलग-अलग पहलू हो सकते हैं।
अब आगे क्या होगा?
विजय माल्या की भारत वापसी का मामला फिलहाल दो स्तरों पर जुड़ा हुआ है। पहला, ब्रिटेन में उनके खिलाफ मौजूद यात्रा और कानूनी प्रतिबंध। दूसरा, भारत में चल रही कानूनी कार्यवाही।अगर ब्रिटिश अदालतें उन्हें ब्रिटेन से बाहर जाने की अनुमति देती हैं या मौजूदा प्रतिबंधों में बदलाव करती हैं, तो भारत वापसी की संभावना व्यावहारिक रूप से बढ़ सकती है। लेकिन भारत लौटने के बाद उनके खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा।इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ब्रिटेन की कानूनी पाबंदियां हटेंगी और क्या उसके बाद विजय माल्या वास्तव में भारत लौटेंगे? फिलहाल माल्या का कहना है कि वह भारत आने से भाग नहीं रहे, बल्कि ब्रिटेन के कानूनी आदेशों के कारण उनकी स्थिति ऐसी बनी हुई है। दूसरी तरफ भारतीय अदालतों में उनकी वापसी और न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने को लेकर सवाल अब भी कायम हैं।
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