UP Startup: यूपी की 8 कंपनियां बनीं यूनिकॉर्न, स्टार्टअप इकोसिस्टम ने रचा इतिहास

Editorial
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लखनऊ उत्तर प्रदेश की पहचान अब केवल कृषि, पारंपरिक उद्योग और बड़े कारोबारी केंद्रों तक सीमित नहीं रह गई है। प्रदेश तेजी से देश के बड़े स्टार्टअप हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उत्तर प्रदेश से शुरू हुई या प्रदेश में मजबूत उपस्थिति रखने वाली आठ कंपनियां अब यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर चुकी हैं। इन कंपनियों का मूल्यांकन एक अरब डॉलर यानी करीब 8,900 करोड़ रुपये या उससे अधिक हो चुका है।खास बात यह है कि इनमें से कई कंपनियों ने बेहद छोटे स्तर से अपना सफर शुरू किया था। किसी ने डिजिटल भुगतान की समस्या को अवसर बनाया तो किसी ने ऑनलाइन शिक्षा, नौकरी, कारोबार, यात्रा और होटल उद्योग के लिए तकनीकी समाधान तैयार किए। लंबे समय तक काम करने के बाद इन कंपनियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी जगह बनाई।

यूपी में 24 हजार से ज्यादा स्टार्टअप

उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्तमान में प्रदेश में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत बताए जा रहे हैं। वर्ष 2017 से पहले यह संख्या महज करीब 120 थी।इस तेज वृद्धि से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश में युवाओं और नए उद्यमियों के बीच स्टार्टअप को लेकर रुचि किस तेजी से बढ़ी है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में कम से कम एक स्टार्टअप सक्रिय है। इस आधार पर उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख स्टार्टअप इकोसिस्टम में चौथे स्थान पर पहुंच चुका है।सरकार की स्टार्टअप नीति, तकनीकी बुनियादी ढांचे और निवेश के बढ़ते अवसरों को इस बदलाव की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है।

यूपी की 8 कंपनियां बनीं यूनिकॉर्न
यूपी की 8 कंपनियां बनीं यूनिकॉर्न

ये आठ कंपनियां बनीं यूनिकॉर्न

आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग की सूची के मुताबिक उत्तर प्रदेश से जुड़ी आठ कंपनियां यूनिकॉर्न बन चुकी हैं। इनमें पेटीएम, फिजिक्सवाला, पाइनलैब्स, इंफोएज, मोजलिक्स, इंडियाMART, इनोवेसर और रेटगेन शामिल हैं।वहीं रैफे एमफिन को सूनिकॉर्न की श्रेणी में रखा गया है। यानी आने वाले समय में इसके भी यूनिकॉर्न बनने की संभावना जताई जा रही है।इन कंपनियों को यूनिकॉर्न बनने की स्थिति तक पहुंचने में अलग-अलग समय लगा। कई कंपनियों को एक दशक से अधिक समय तक लगातार कारोबार और तकनीकी विस्तार करना पड़ा।

पेटीएम ने डिजिटल पेमेंट को बनाया पहचान

वर्ष 2000 में शुरू हुई पेटीएम ने भारत में डिजिटल पेमेंट और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कंपनी ने डिजिटल लेनदेन को आम लोगों और कारोबारियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।कंपनी ने समय के साथ अपने कारोबार का विस्तार किया और डिजिटल वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में बड़ा नाम बनी। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का परिचालन राजस्व करीब 8,437 करोड़ रुपये और सालाना शुद्ध लाभ करीब 552 करोड़ रुपये बताया गया है।

यूपी की 8 कंपनियां बनीं यूनिकॉर्न
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यूट्यूब चैनल से यूनिकॉर्न तक फिजिक्सवाला

फिजिक्सवाला की कहानी नई पीढ़ी के स्टार्टअप के लिए खास उदाहरण मानी जा सकती है। कंपनी की शुरुआत वर्ष 2016 में एक यूट्यूब चैनल के तौर पर हुई थी। बाद में 2020 में इसे कंपनी के रूप में स्थापित किया गया।ऑनलाइन शिक्षा से शुरुआत करने वाली फिजिक्सवाला ने आगे चलकर ऑफलाइन और हाइब्रिड एजुकेशन मॉडल को भी अपनाया। आज कंपनी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म बन चुकी है।इसकी सफलता यह बताती है कि डिजिटल कंटेंट और तकनीक के जरिए छोटे स्तर पर शुरू किया गया कारोबार भी बड़े बिजनेस मॉडल में बदल सकता है।

पाइनलैब्स और इंफोएज का लंबा सफर

पाइनलैब्स की शुरुआत वर्ष 1998 में हुई थी। कंपनी ने डिजिटल भुगतान और मर्चेंट कॉमर्स के क्षेत्र में काम करते हुए अपनी मजबूत पहचान बनाई। मार्च 2026 तक कंपनी में करीब 5,357 कर्मचारी बताए गए हैं।वहीं वर्ष 1995 में शुरू हुई इंफोएज ने नौकरी डॉट कॉम के जरिए अपना सफर शुरू किया था। बाद में कंपनी ने वैवाहिक सेवाओं, रियल एस्टेट और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में विस्तार किया। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का समेकित शुद्ध राजस्व करीब 3,285 करोड़ रुपये बताया गया है।

यूपी की 8 कंपनियां बनीं यूनिकॉर्न
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मोजलिक्स, इंडियाMART और रेटगेन ने भी बनाई जगह

मोजलिक्स ने बी2बी ई-कॉमर्स के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। कंपनी कारोबारियों के बीच डिजिटल लेनदेन और सप्लाई से जुड़े समाधान उपलब्ध कराने पर केंद्रित रही है।इंडियाMART ने कारोबारियों और ऑनलाइन खरीदारों को जोड़ने वाला प्लेटफॉर्म तैयार किया। छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए डिजिटल बाजार उपलब्ध कराने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।रेटगेन ने यात्रा और होटल उद्योग के लिए सॉफ्टवेयर समाधान विकसित करके अपनी अलग पहचान बनाई। कंपनी में करीब 800 से 1,000 कर्मचारियों के काम करने की जानकारी दी गई है।

इनोवेसर की वैश्विक मौजूदगी

इनोवेसर का मुख्यालय अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में है, जबकि नोएडा और बंगलूरू में भी इसके प्रमुख संचालन हैं। मार्च 2026 तक कंपनी में करीब 2,515 कर्मचारियों के होने की जानकारी दी गई है।कंपनी का उदाहरण यह भी दिखाता है कि उत्तर प्रदेश से जुड़ा स्टार्टअप केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है। तकनीक और इनोवेशन के जरिए कंपनियां वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकती हैं।

रैफे एमफिन पर भी नजर

रैफे एमफिन को सूनिकॉर्न के रूप में देखा जा रहा है। यानी कंपनी के यूनिकॉर्न बनने की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद है। इससे यूपी के स्टार्टअप इकोसिस्टम में आने वाले समय में एक और बड़ी कंपनी के जुड़ने की संभावना बनती है।

एआई और डीप-टेक पर सरकार का जोर

प्रदेश के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार के मुताबिक सरकार स्टार्टअप नीति के जरिए निवेश और विस्तार के अवसर बढ़ाने पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक पहचान दिलाना है।आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई, डीप-टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थ टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया जाएगा।

छोटे शहरों से निकल सकती है बड़ी कहानी

उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब उद्यमिता केवल लखनऊ, नोएडा या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गई है। सभी 75 जिलों में स्टार्टअप की मौजूदगी इस बदलाव का संकेत है।आठ यूनिकॉर्न कंपनियों की सफलता प्रदेश के युवाओं के लिए बड़ा उदाहरण है। इन कंपनियों ने दिखाया है कि सही आइडिया, तकनीक, निवेश और लंबे समय की रणनीति के दम पर छोटे स्तर से शुरू किया गया कारोबार भी अरबों डॉलर के मूल्यांकन तक पहुंच सकता है।यूपी में बढ़ती स्टार्टअप संस्कृति आने वाले वर्षों में रोजगार, निवेश और तकनीकी नवाचार के नए अवसर पैदा कर सकती है। अगर सरकार की नीतियों और निजी निवेश का यह सिलसिला जारी रहा, तो उत्तर प्रदेश देश के सबसे प्रभावशाली स्टार्टअप केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

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