जौहर यूनिवर्सिटी के ठेकेदारों पर ED की नजर, सरकारी ठेकों की जांच

Editorial
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रामपुर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां से जुड़े जौहर यूनिवर्सिटी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का दायरा अब निर्माण कार्यों और उनसे जुड़े ठेकेदारों तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। जौहर ट्रस्ट को चंदा देने और विश्वविद्यालय में निर्माण कार्य कराने वाले रामपुर निवासी बिल्डर एवं ठेकेदार सैयद खालिद की भूमिका की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी जौहर यूनिवर्सिटी में हुए निर्माण कार्यों के साथ-साथ उन ठेकेदारों को सपा शासन के दौरान प्रदेश के दूसरे जिलों में मिले सरकारी ठेकों का रिकॉर्ड भी खंगाल रही है।जांच के इस विस्तार से उन ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों में हलचल बढ़ गई है, जिन्होंने उस दौर में सरकारी विभागों के लिए बड़े निर्माण कार्य किए थे। ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में इस्तेमाल हुई रकम, ठेकेदारों के कारोबार और दूसरे सरकारी निर्माण कार्यों से हुए भुगतान के बीच कहीं कोई वित्तीय संबंध तो नहीं है।

जौहर यूनिवर्सिटी में छह ठेकेदारों ने कराए थे कई निर्माण

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी के अलग-अलग हिस्सों में निर्माण कार्य कराने में करीब छह ठेकेदारों की भूमिका सामने आई है। इन ठेकेदारों ने विश्वविद्यालय परिसर में 28 से अधिक भवनों के निर्माण से जुड़े काम किए थे। इनमें शैक्षणिक भवन, प्रशासनिक भवन और अन्य जरूरी निर्माण शामिल बताए जा रहे हैं।अब ED इन निर्माण कार्यों से संबंधित ठेके, अनुबंध, निर्माण की लागत, भुगतान और संबंधित कंपनियों की वित्तीय गतिविधियों का मिलान कर रही है। एजेंसी यह भी देख रही है कि निर्माण कार्यों के लिए किस कंपनी या फर्म को काम दिया गया, उसका भुगतान किस खाते में हुआ और संबंधित रकम का इस्तेमाल आगे किस तरह किया गया।इस पूरी प्रक्रिया में ठेकेदारों और विश्वविद्यालय के बीच हुए वित्तीय लेनदेन को खास तौर पर देखा जा रहा है।

जौहर यूनिवर्सिटी के ठेकेदारों पर ED की नजर
जौहर यूनिवर्सिटी के ठेकेदारों पर ED की नजर

सपा शासन में मिले सरकारी ठेकों की भी पड़ताल

जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़ा है, जो जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में शामिल ठेकेदारों को प्रदेश के अलग-अलग शहरों में मिले थे। सूत्रों के अनुसार, कुछ ठेकेदारों ने लखनऊ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, नोएडा समेत कई जिलों में सरकारी विभागों के लिए निर्माण कार्य किए थे।ED अब यह रिकॉर्ड जुटा रही है कि इन ठेकेदारों को किन विभागों से काम मिला था, ठेके की कुल लागत कितनी थी और निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उन्हें कितने भुगतान किए गए।जांच एजेंसी भुगतान की प्रक्रिया और बैंक खातों के लेनदेन का भी अध्ययन कर रही है। इसके साथ ही संबंधित फर्मों और कंपनियों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

ठेके, भुगतान और बैंक खातों के बीच कड़ियां तलाश रही ED

जौहर यूनिवर्सिटी मामले में ED की जांच अब केवल विश्वविद्यालय की संपत्तियों या निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रह गई है। एजेंसी कथित तौर पर पूरे वित्तीय नेटवर्क को समझने की कोशिश कर रही है।इसके तहत निर्माण कार्यों से संबंधित बिल, भुगतान की रसीदें, अनुबंध, बैंक स्टेटमेंट और फर्मों के बीच हुए वित्तीय व्यवहार जैसे दस्तावेजों की जांच की जा रही है।जांच का उद्देश्य यह समझना है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में खर्च हुई रकम कहां से आई, किन लोगों या संस्थाओं के माध्यम से उसका भुगतान हुआ और निर्माण कार्य में शामिल ठेकेदारों की अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से उसका कोई संबंध था या नहीं। किसी भी वित्तीय लेनदेन को अपने आप में अपराध मानना उचित नहीं है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।

पहले की कार्रवाई में मिले दस्तावेजों से जोड़ियां जोड़ने की कोशिश

ED की पिछली कार्रवाई के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े लोगों के साथ कुछ ठेकेदारों के ठिकानों पर भी जांच की गई थी। इस दौरान कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड खंगाले गए थे। कुछ रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त किए जाने की बात भी सामने आई थी।अब जांच एजेंसी इन्हीं दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के आधार पर अलग-अलग वित्तीय गतिविधियों के बीच संबंध तलाश रही है। अधिकारियों की नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय के निर्माण कार्य, ठेकेदारों के बैंक खाते और दूसरे सरकारी प्रोजेक्ट से मिलने वाले भुगतान के बीच कोई संदिग्ध वित्तीय पैटर्न दिखाई देता है या नहीं।यही वजह है कि जांच में पुराने सरकारी निर्माण कार्यों का रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कई जिलों के विभागों से जुटाई जा सकती है जानकारी

सूत्रों के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने के साथ प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों से भी निर्माण कार्यों और ठेकों से संबंधित जानकारी जुटाई जा सकती है। इसमें टेंडर प्रक्रिया, कार्यादेश, निर्माण की स्वीकृत लागत, भुगतान और कार्य पूरा होने से जुड़े दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।अगर किसी ठेकेदार को अलग-अलग जिलों में कई सरकारी परियोजनाएं मिली थीं तो उन सभी परियोजनाओं का रिकॉर्ड जांच के दायरे में आने की संभावना है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि संबंधित फर्मों का कारोबार किस स्तर पर था और उनके वित्तीय लेनदेन का स्वरूप कैसा रहा।

आगे और नाम सामने आने की संभावना

जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण से जुड़े ठेकेदारों की अन्य व्यावसायिक और सरकारी गतिविधियों की पड़ताल से आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है। दस्तावेजों और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच के बाद उन कंपनियों, फर्मों या व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आ सकती है, जिनका निर्माण कार्यों या वित्तीय लेनदेन से कोई संबंध रहा हो।फिलहाल ED की जांच में मुख्य फोकस जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण कार्यों, उससे जुड़े ठेकेदारों, सरकारी ठेकों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों पर है।आजम खां से जुड़े जौहर यूनिवर्सिटी मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पुराने निर्माण कार्य और उनसे जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड भी जांच एजेंसियों के लिए अहम होते जा रहे हैं। आने वाले समय में दस्तावेजों की जांच के आधार पर क्या नए तथ्य सामने आते हैं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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