रिपोर्ट :विजय गुप्ता
लखनऊ भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से बढ़ते क्षेत्र और स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में हो रहे बदलाव के बीच राजधानी लखनऊ में भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो (BRE Summit) 2026 का क्षेत्रीय रोडशो आयोजित किया गया। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के सरकारी प्रतिनिधियों के साथ स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े उद्योग जगत, निवेशकों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया।लखनऊ में आयोजित यह रोडशो नवंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRE Summit 2026 से पहले देशभर में चल रही क्षेत्रीय रोडशो श्रृंखला का छठा चरण रहा। इससे पहले जयपुर, मुंबई, हैदराबाद, अहमदाबाद और बेंगलुरु में रोडशो आयोजित किए जा चुके हैं। लखनऊ कार्यक्रम में उत्तर भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार, निवेश की संभावनाओं और नई तकनीकों पर विशेष चर्चा हुई।
नवंबर में होगा BRE Summit 2026
भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026 का आयोजन 2 से 5 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली में किया जाएगा। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) असेंबली के 9वें सत्र और ग्रीन हाइड्रोजन पर चौथे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (ICGH) के साथ आयोजित होगा।समिट में दुनिया भर के नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, तकनीकी विशेषज्ञ और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े नवप्रवर्तक एक मंच पर जुटेंगे। इसका उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश, तकनीकी सहयोग और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देना है।

उत्तर प्रदेश ने दिखाई अपनी ताकत
लखनऊ रोडशो में उत्तर प्रदेश ने राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में हो रही प्रगति और निवेश की संभावनाओं को प्रमुखता से सामने रखा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 31 जुलाई 2026 तक उत्तर प्रदेश की स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 8,906 मेगावाट पहुंच चुकी है। इसमें सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी सबसे अधिक है और इसकी स्थापित क्षमता 6,024 मेगावाट बताई गई है।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के साथ निवेश, नवाचार और उद्योगों की भागीदारी के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।उन्होंने कहा कि BRE Summit 2026 उत्तर प्रदेश को अपनी बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा क्षमता और संभावनाओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक निवेशकों के सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच देगा। इससे निवेशकों और तकनीकी साझेदारों के साथ नए सहयोग विकसित करने में मदद मिल सकती है।

सौर ऊर्जा से लेकर ग्रीन हाइड्रोजन तक फोकस
अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) डॉ. आशीष कुमार गोयल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा, जैव ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। राज्य में पारेषण अवसंरचना को मजबूत करने और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के विस्तार पर भी जोर दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए तैयार की जा रही क्षमता आने वाले समय में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के विकास को गति दे सकती है। उन्होंने निवेशकों और तकनीकी साझेदारों को उत्तर प्रदेश में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
उत्तराखंड और बिहार ने भी रखा अपना पक्ष
लखनऊ रोडशो में उत्तराखंड और बिहार के प्रतिनिधियों ने भी अपने-अपने राज्यों में नवीकरणीय ऊर्जा की संभावनाओं को सामने रखा। उत्तराखंड की ऊर्जा क्षमता में जलविद्युत की महत्वपूर्ण भूमिका है। पहाड़ी राज्य होने के कारण वहां जलविद्युत के साथ अन्य स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों पर भी संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जा रहा है।वहीं बिहार ने सौर ऊर्जा, बायोमास और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को रेखांकित किया। बिहार सरकार के पावर जनरेशन कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक विशाल राज ने राज्य में ऊर्जा क्षेत्र में हो रहे बदलावों की जानकारी दी।उन्होंने बताया कि बिहार में बिजली की मांग और खपत बढ़ रही है। राज्य अब सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दे रहा है। उन्होंने करीब 8,400 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज के अवसरों का उल्लेख करते हुए निवेशकों को राज्य की विकास यात्रा में भागीदारी का न्योता दिया।
सरकार-उद्योग मिलकर बनाएंगे स्वच्छ ऊर्जा का रोडमैप
नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनुपम कुमार ने कहा कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में सरकार, उद्योग और वित्तीय संस्थानों की साझा भूमिका है। सरकार जहां नीति और नियामकीय ढांचा उपलब्ध कराएगी, वहीं उद्योग निवेश, तकनीक और नवाचार के जरिए इस बदलाव को गति देगा।उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थानों की भागीदारी भी जरूरी है, ताकि स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को आवश्यक वित्तीय समर्थन और बड़े स्तर पर विस्तार मिल सके।
रोडशो में दिखाई गई भारत की अक्षय ऊर्जा यात्रा
कार्यक्रम के दौरान भारत की अक्षय ऊर्जा यात्रा और BRE Summit & Expo 2026 से जुड़ी विशेष फिल्मों का प्रदर्शन भी किया गया। इनके जरिए भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलाव और नवंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले समिट की रूपरेखा को सामने रखा गया।इस दौरान NSEFI के सीईओ सुब्रह्मण्यम पुलिपाका ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति और अब तक की यात्रा पर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत शक्ति पंप्स के सीईओ एवं NSEFI की राष्ट्रीय संचालन परिषद के सदस्य रामकृष्ण सटलुरी के स्वागत संबोधन से हुई।कार्यक्रम के समापन पर भारतीय बायोगैस संघ के गौरव केडिया ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।
छह शहरों तक पहुंचा BRE Summit का रोडशो
BRE Summit 2026 को लेकर देशभर में आयोजित क्षेत्रीय रोडशो श्रृंखला का लखनऊ छठा पड़ाव रहा। इससे पहले 24 अगस्त को जयपुर, 27 अगस्त को मुंबई, 31 अगस्त को हैदराबाद, 3 सितंबर को अहमदाबाद और 8 सितंबर को बेंगलुरु में रोडशो आयोजित किए गए।लखनऊ रोडशो ने उत्तर भारत के तीन महत्वपूर्ण राज्यों को एक मंच पर लाकर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग और निवेश की संभावनाओं को सामने रखा। नवंबर में होने वाला BRE Summit 2026 अब इस अभियान का अगला बड़ा पड़ाव होगा, जहां भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए निवेश, तकनीक और वैश्विक साझेदारी को लेकर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है।लखनऊ में आयोजित BRE Summit 2026 रोडशो ने यह संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार जैसे राज्य भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहे हैं। सौर ऊर्जा, जलविद्युत, बायोमास, ग्रीन हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में बढ़ते अवसर आने वाले वर्षों में उत्तर भारत को नवीकरणीय ऊर्जा निवेश का महत्वपूर्ण केंद्र बना सकते हैं।
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