बदायूं उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हजारों लोगों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। आरोप है कि करीब 35 हजार लोगों को निवेश और आर्थिक लाभ का भरोसा देकर लगभग 800 करोड़ रुपये की रकम जुटाई गई। बड़ी संख्या में लोगों की मेहनत की कमाई फंसने की बात सामने आने के बाद यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।बताया जा रहा है कि कथित ठगी के इस मामले में बड़ी संख्या में लोगों को अलग-अलग योजनाओं में पैसा लगाने के लिए तैयार किया गया। लोगों को निवेश की गई रकम पर बेहतर रिटर्न और आर्थिक लाभ का भरोसा दिलाया गया। शुरुआत में निवेशकों को भरोसा दिलाने के लिए भुगतान किए जाने की बात भी सामने आ रही है। इसके बाद जब लोगों ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की तो कथित तौर पर उन्हें अलग-अलग कारण बताकर टालने का आरोप लगाया गया।
35 हजार लोगों की रकम फंसने का दावा
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा प्रभावित लोगों की संख्या और कथित रकम का है। दावा किया जा रहा है कि करीब 35 हजार लोग इस पूरे मामले से प्रभावित हुए हैं और इनसे लगभग 800 करोड़ रुपये की रकम जुटाई गई। अगर यह आंकड़े जांच में सही पाए जाते हैं तो यह बदायूं में सामने आए बड़े आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों में शामिल हो सकता है।कथित तौर पर अलग-अलग इलाकों से लोगों ने अपनी बचत और मेहनत की कमाई इस उम्मीद में लगाई कि उन्हें तय समय के बाद बेहतर रिटर्न मिलेगा। कई लोगों ने अपनी जमा पूंजी का हिस्सा निवेश किया, जबकि कुछ लोगों के परिवारों की आर्थिक योजनाएं भी इस रकम के फंसने से प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

निवेश के नाम पर भरोसा जीतने का आरोप
कथित ठगी के मामलों में अक्सर लोगों को आकर्षक रिटर्न का लालच देकर निवेश के लिए प्रेरित किया जाता है। बदायूं के इस मामले में भी इसी तरह लोगों को जोड़ने का आरोप सामने आया है। बताया जा रहा है कि पहले लोगों के बीच भरोसा बनाया गया और इसके बाद अधिक से अधिक लोगों को योजना से जोड़ने का प्रयास किया गया।लोगों का आरोप है कि जब तक भुगतान और लेनदेन सामान्य तरीके से चलता रहा, तब तक किसी को बड़े स्तर पर गड़बड़ी का अंदाजा नहीं हुआ। लेकिन रकम वापस मिलने में परेशानी शुरू होने के बाद निवेशकों के बीच चिंता बढ़ने लगी। धीरे-धीरे अधिक लोगों के सामने आने के बाद मामले का कथित दायरा भी बड़ा होता चला गया।
रकम वापस नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
ठगी के आरोपों के सामने आने के बाद सबसे बड़ी चिंता उन लोगों की है जिनकी रकम कथित तौर पर फंस गई है। पीड़ितों को आशंका है कि उनकी वर्षों की बचत वापस मिल पाएगी या नहीं। कई परिवारों के लिए बड़ी रकम का फंसना आर्थिक संकट का कारण बन सकता है।लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ितों की रकम वापस दिलाने की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाए जाएं।
जांच में सामने आ सकता है पूरा नेटवर्क
करीब 800 करोड़ रुपये की कथित रकम और 35 हजार लोगों से जुड़े होने के दावे के कारण जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े हो सकते हैं। पैसा किस माध्यम से जुटाया गया, लोगों को किस आधार पर निवेश के लिए तैयार किया गया, रकम कहां-कहां ट्रांसफर हुई और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे—इन सभी बिंदुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी।जांच के दौरान बैंक खातों, लेनदेन, निवेश से जुड़े दस्तावेजों, रसीदों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सकती है। यदि बड़ी संख्या में लोगों से रकम जुटाए जाने की पुष्टि होती है तो मामले की जांच का दायरा भी बढ़ सकता है।
पीड़ितों को कार्रवाई का इंतजार
बदायूं में कथित 800 करोड़ रुपये की ठगी का यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें हजारों लोगों के प्रभावित होने का दावा किया जा रहा है। अब लोगों की नजर पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर है। पीड़ित चाहते हैं कि मामले की पूरी सच्चाई सामने आए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।फिलहाल इस मामले में सामने आए 35 हजार लोगों और 800 करोड़ रुपये के आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही मानी जानी चाहिए। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह बदायूं में बड़े स्तर पर सामने आया आर्थिक धोखाधड़ी का मामला हो सकता है। आने वाले दिनों में जांच के आगे बढ़ने के साथ इस कथित ठगी से जुड़े नेटवर्क, रकम के लेनदेन और जिम्मेदार लोगों को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
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