लद्दाख पर बैठक बेनतीजा, सोनम वांगचुक का तंज; 19 सितंबर से पदयात्रा

Editorial
8 Min Read

नई दिल्ली लद्दाख के राजनीतिक अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच हाल में हुई बैठक के बाद पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने निराशा जताई है। वांगचुक के मुताबिक, बैठक में लद्दाख से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि बैठक में अगर कुछ अच्छा था तो सिर्फ चाय।बैठक के बाद अब सोनम वांगचुक ने आंदोलन के अगले चरण का ऐलान कर दिया है। उन्होंने बताया कि 19 से 24 सितंबर तक लद्दाख में पदयात्रा निकाली जाएगी। वांगचुक ने संकेत दिया है कि यदि केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता है तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।

केंद्र के साथ बैठक के बाद बढ़ी हलचल

लद्दाख के भविष्य और वहां के राजनीतिक अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार और स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत लंबे समय से चल रही है। इसी क्रम में बुधवार को केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई।बैठक में लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेश के रूप में राजनीतिक अधिकार बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, फिलहाल इन मांगों पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी।केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से लद्दाख के नेताओं को प्रस्तावित राजनीतिक ढांचे से जुड़े कई प्रमुख मुद्दों पर विचार करने और उन पर निष्कर्ष तक पहुंचने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब आठ से दस महत्वपूर्ण विषयों पर आगे चर्चा की जानी है।

सोनम वांगचुक ने बैठक पर कसा तंज

बैठक के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह लद्दाख के मुद्दों को लेकर दिल्ली आए थे और गृह मंत्रालय के साथ बैठक में शामिल हुए, लेकिन उनके मुताबिक बैठक से कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया।वांगचुक ने अपने बयान को तीखा बनाने के लिए जसपाल सिंह भट्टी के एक कार्यक्रम की क्लिप का भी जिक्र किया। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि बैठक में अगर कुछ अच्छा था तो सिर्फ चाय।उन्होंने यह भी बताया कि अगली बैठक अगले महीने होने की बात कही गई है। हालांकि, वांगचुक का कहना है कि लद्दाख के लोगों को केवल एक जायज और स्पष्ट आश्वासन की उम्मीद थी, जो उन्हें फिलहाल नहीं मिला।

लद्दाख पर बैठक बेनतीजा, सोनम वांगचुक का तंज
लद्दाख पर बैठक बेनतीजा, सोनम वांगचुक का तंज

लद्दाख के लिए लोकतांत्रिक ढांचे की मांग

सोनम वांगचुक और लद्दाख के कई संगठनों की प्रमुख मांगों में क्षेत्र के लिए मजबूत लोकतांत्रिक ढांचे की स्थापना शामिल है। उनका कहना है कि लद्दाख में विधानसभा का गठन होना चाहिए, जिससे स्थानीय लोगों को अपने क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में प्रत्यक्ष भूमिका मिल सके।लद्दाख के लिए राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ जमीन, पर्यावरण और स्थानीय संसाधनों की सुरक्षा भी प्रमुख मुद्दों में शामिल है। आंदोलन से जुड़े नेताओं का तर्क है कि लद्दाख की भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियां बेहद संवेदनशील हैं। ऐसे में क्षेत्र के विकास और संसाधनों से जुड़े बड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है।वांगचुक की ओर से यह मांग भी उठाई गई है कि जब तक लद्दाख में पर्याप्त लोकतांत्रिक ढांचा स्थापित नहीं होता, तब तक ऐसे बड़े प्रशासनिक फैसलों से बचा जाए जिनका असर क्षेत्र की जमीन, पर्यावरण और भविष्य पर पड़ सकता है।

19 से 24 सितंबर तक पदयात्रा का ऐलान

बैठक से निराशा के बाद सोनम वांगचुक ने आंदोलन के अगले चरण की घोषणा कर दी है। उनके मुताबिक, 19 सितंबर से 24 सितंबर के बीच लद्दाख में बड़ी पदयात्रा निकाली जाएगी।वांगचुक ने लोगों से इस पदयात्रा में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि इस दौरान केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन मिल जाता है तो पदयात्रा को लद्दाख के शहीदों को समर्पित किया जाएगा।अगर सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं आती है तो आंदोलन को और बड़ा करने की चेतावनी दी गई है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में लद्दाख का मुद्दा एक बार फिर सड़क से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक चर्चा का विषय बन सकता है।

राजनीतिक ढांचे पर क्या है गतिरोध?

लद्दाख के राजनीतिक भविष्य को लेकर मुख्य बहस उसके प्रशासनिक और लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर है। बैठक में लद्दाख को राज्य का दर्जा देने या विधानसभा की शक्तियों वाले केंद्र शासित प्रदेश के रूप में बदलाव की मांग पर फिलहाल सहमति नहीं बनी।इसके बावजूद बातचीत का रास्ता बंद नहीं हुआ है। केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित राजनीतिक व्यवस्था को लेकर कई बिंदुओं पर चर्चा और विचार-विमर्श की बात सामने आई है।एक संभावित मॉडल पर भी चर्चा हुई है, जिसमें निर्वाचित निकायों को विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियां देने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। यदि इस दिशा में सहमति बनती है तो यह लद्दाख के स्थानीय प्रशासन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है।

अब केंद्र की अगली प्रतिक्रिया पर नजर

लद्दाख को लेकर केंद्र और स्थानीय प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का अगला दौर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ सरकार राजनीतिक ढांचे पर आगे चर्चा की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ सोनम वांगचुक ने आंदोलन का अगला कार्यक्रम घोषित कर दिया है।अब सबकी नजर 19 सितंबर से शुरू होने वाली पदयात्रा पर है। यदि इससे पहले केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच किसी मुद्दे पर ठोस सहमति या आश्वासन सामने आता है, तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है। वहीं, अगर बातचीत से कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकलता है तो वांगचुक के संकेत के मुताबिक आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है।फिलहाल लद्दाख के राजनीतिक अधिकार, विधानसभा की मांग, जमीन और पर्यावरण की सुरक्षा जैसे मुद्दे केंद्र में बने हुए हैं। आने वाले दिनों में सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि इस गतिरोध का समाधान बातचीत के जरिए निकलता है या आंदोलन एक बार फिर तेज होता है।

Read on:http://लखनऊ लुलु मॉल में Tea Board का खास आयोजन, VIP मेहमानों ने चखी भारतीय चाय

Advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

Share This Article
Leave a Comment