नई दिल्ली कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दोनों राज्यों के बीच पानी की मात्रा और पुराने बकाये को लेकर मतभेद बना हुआ है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार ने अदालत को बताया कि वह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देशों के मुताबिक तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ रहा है और कई मौकों पर तय मात्रा से अधिक पानी छोड़ा गया है।वहीं तमिलनाडु सरकार ने कर्नाटक पर पर्याप्त पानी नहीं छोड़ने का आरोप लगाते हुए अपने हिस्से के पानी की मांग दोहराई। मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों से संबंधित ताजा आंकड़े रिकॉर्ड पर रखने को कहा है।
कर्नाटक ने बताया- तय मात्रा से ज्यादा छोड़ा पानी
सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि 25 अगस्त के निर्देश के अनुसार राज्य को तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ना था। कर्नाटक के अनुसार उसने निर्धारित मात्रा से अधिक पानी छोड़ा।अदालत को बताया गया कि पहले दिन कर्नाटक ने करीब 10,727 क्यूसेक पानी छोड़ा। इसके बाद 30 अगस्त को 9,888 क्यूसेक और 31 अगस्त की सुबह आठ बजे तक करीब 11,547 क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका था। कर्नाटक का कहना है कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों का पालन कर रहा है।

तमिलनाडु ने उठाया पानी के पुराने बकाये का मुद्दा
तमिलनाडु की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने अदालत में कहा कि राज्य को निर्धारित मात्रा में पानी नहीं मिल रहा है। उन्होंने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के सामने पुराने पानी के बकाये का मुद्दा भी उठाया।तमिलनाडु का कहना है कि इससे पहले कर्नाटक को 12 अगस्त से 15 दिनों तक प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था। बाद में पानी छोड़ने की मात्रा घटाकर 9,000 क्यूसेक कर दी गई।तमिलनाडु ने तर्क दिया कि कम बारिश वाले साल में पानी की उपलब्धता पहले से ही चुनौती बनी हुई है। ऐसे में राज्य को उसके हिस्से का पानी मिलना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों से क्या कहा?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के तर्क सुने। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि कावेरी जल विनियमन समिति हर 15 दिन में दोनों राज्यों की स्थिति की समीक्षा कर रही है और संबंधित पक्षों को सुनने के बाद आवश्यक निर्देश जारी कर रही है।अदालत ने दोनों राज्यों से पानी की उपलब्धता और अब तक छोड़े गए पानी से संबंधित ताजा आंकड़े रिकॉर्ड पर रखने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के फैसले को उचित प्रक्रिया के तहत चुनौती दी जानी चाहिए।
कर्नाटक ने सूखे की स्थिति का दिया हवाला
कर्नाटक सरकार ने सुनवाई के दौरान अपने राज्य के कुछ हिस्सों में सूखे की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। राज्य की ओर से कहा गया कि कावेरी नदी बेसिन के कुछ जिले भी गंभीर जल संकट से प्रभावित हैं।कर्नाटक का पक्ष है कि राज्य में पानी की उपलब्धता और स्थानीय जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। दूसरी ओर तमिलनाडु अपने हिस्से के पानी और पिछले बकाये को लेकर लगातार मांग कर रहा है। यही वजह है कि दोनों राज्यों के बीच विवाद केवल वर्तमान जल प्रवाह तक सीमित नहीं है, बल्कि पुराने बकाये और जल उपलब्धता की स्थिति भी इसमें अहम भूमिका निभा रही है।
जुलाई से जारी है पानी छोड़ने को लेकर खींचतान
कावेरी जल विवाद में पानी छोड़ने को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार निर्देश जारी होते रहे हैं। जानकारी के मुताबिक 28 जुलाई को कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था।इसके बाद 12 अगस्त से प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण ने भी इस निर्देश को बरकरार रखा था। इसके बाद पानी की मात्रा को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद और बढ़ गया।तमिलनाडु सरकार ने इसी विवाद के बीच 3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और आरोप लगाया कि उसे समिति की ओर से तय मात्रा के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा है।
अब 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को तय की है। तब तक दोनों राज्यों को जल उपलब्धता, छोड़े गए पानी और संबंधित परिस्थितियों के ताजा आंकड़े अदालत के सामने रखने होंगे।कावेरी जल विनियमन समिति की 15-15 दिन में होने वाली समीक्षा भी जारी रहेगी। ऐसे में अगली सुनवाई में दोनों राज्यों के नए आंकड़े और पानी के पुराने बकाये का मुद्दा महत्वपूर्ण हो सकता है।कावेरी जल विवाद लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच संवेदनशील मुद्दा रहा है। नदी के पानी पर दोनों राज्यों की कृषि और अन्य जरूरतें काफी हद तक निर्भर हैं। इसलिए बारिश, जलाशयों में पानी की उपलब्धता और तय हिस्सेदारी के आधार पर हर साल यह विवाद फिर सामने आता रहा है। अब सभी की नजरें 15 सितंबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
read on:https://news7hindi.com/india-gdp-growth-7-8-percent-pm-modi-exceptional-achievement/
advertisement visit our office:http://3RD FLOOR, lekhraj market, bansal Complex, Lucknow, Uttar Pradesh 226016

