मायावती का बड़ा फैसला: भतीजी दीपिका आनंद को मिलेगा बसपा मिशन में मौका

Editorial
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लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने पार्टी और अपने परिवार को लेकर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। मायावती ने स्पष्ट किया है कि उनके भाई आनंद कुमार के बेटों को अब बसपा में किसी छोटे-बड़े राजनीतिक पद की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय आनंद कुमार की बेटी और कानून की पढ़ाई कर रहीं दीपिका आनंद को पार्टी के मिशन से जुड़े कार्यों में आगे बढ़ने का अवसर दिया जाएगा।मायावती का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में बसपा सुप्रीमो के इस फैसले को पार्टी में युवा चेहरों और नई पीढ़ी को आगे लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

मायावती का बड़ा फैसला
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दीपिका आनंद को आगे बढ़ाने का ऐलान

मायावती ने कहा कि उनके लिए बसपा का मिशन सर्वोपरि है। इसी वजह से अब उनके भाई आनंद कुमार के बेटों के बजाय उनकी बेटी दीपिका आनंद पार्टी के कार्यों में आगे आएंगी। उन्होंने बताया कि दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं और आगे चलकर आनंद कुमार जरूरत के मुताबिक अपनी जिम्मेदारियां उन्हें सौंप सकते हैं।मायावती ने यह भी साफ किया कि आनंद कुमार के दोनों बेटों या भविष्य में उनके बच्चों को पार्टी की राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। उनके मुताबिक, यदि दीपिका इस जिम्मेदारी के लिए तैयार नहीं होती हैं तो पार्टी के दलित वर्ग से किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को आम सहमति से जिम्मेदारी दी जा सकती है।यानी मायावती ने एक तरफ परिवार के भीतर से दीपिका को आगे बढ़ाने का रास्ता खोला है, वहीं दूसरी तरफ परिवार के अन्य सदस्यों को राजनीतिक लाभ से दूर रखने की बात भी कही है।

मायावती का बड़ा फैसला
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परिवारवाद पर मायावती का स्पष्ट रुख

मायावती ने अपने फैसले को बसपा संस्थापक कांशीराम की विचारधारा से जोड़ते हुए परिवारवाद से दूरी बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि कांशीराम परिवारवाद के खिलाफ रहे और उनकी शिष्या होने के नाते वह भी इसी सिद्धांत पर कायम हैं।मायावती के मुताबिक, उन्होंने अपने सगे भाई-बहनों और उनके परिवार के युवा सदस्यों को सांसद, विधायक, मंत्री या अन्य राजनीतिक लाभ के पदों से दूर रखा है। उनका कहना है कि पार्टी के मिशन और बहुजन समाज के हित को किसी भी व्यक्तिगत रिश्ते से ऊपर रखा जाना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि अपने भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखने की जरूरत उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों की वजह से पड़ी। आनंद लंबे समय से उनकी देखभाल और पार्टी से जुड़ी जिम्मेदारियों में सहयोग करते रहे हैं। लेकिन अब उनके परिवार के अन्य सदस्यों को इसका राजनीतिक लाभ मिले, यह पार्टी और आंदोलन के हित में सही नहीं होगा।

मायावती का बड़ा फैसला
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केवल एक व्यक्ति को राजनीतिक अवसर देने की बात

बसपा सुप्रीमो ने कहा कि संगठन में और भविष्य में सरकार बनने की स्थिति में भी परिवार के केवल एक व्यक्ति को ही राजनीतिक अवसर दिया जाएगा। उनकी आड़ में परिवार के अन्य सदस्यों को किसी तरह का लाभ नहीं दिया जाएगा।मायावती का कहना है कि इससे पार्टी परिवारवाद से मुक्त रहेगी और सर्वसमाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों को सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के आंदोलन से जोड़ने का अवसर मिलेगा।उनके इस बयान को बसपा की आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी लंबे समय से अपने संगठन को मजबूत करने और नए सामाजिक समीकरण तैयार करने पर जोर दे रही है।

युवाओं और जेन-जी को तरजीह

मायावती ने बसपा संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की नीति पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि देशभर, खासकर उत्तर प्रदेश में युवाओं को पार्टी संगठन में अधिक जिम्मेदारी देने की प्रक्रिया जारी है।उन्होंने दावा किया कि जेन-जी को लगभग 50 प्रतिशत तक संगठन में भागीदारी देने की दिशा में काम किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों में भी सर्वसमाज से जुड़े कर्मठ और युवा चेहरों को उम्मीदवार बनाने में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।मायावती ने पार्टी की पिछली सरकारों के कामकाज का जिक्र करते हुए कहा कि बसपा सरकारों में बुनियादी जरूरतों के साथ जेन-जी और जेन-अल्फा की जरूरतों पर भी काम किया गया। उनके मुताबिक, इस दौरान स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, छात्रावास, ट्रेनिंग सेंटर और पार्क जैसी संस्थाओं का निर्माण कराया गया।

2027 से पहले बसपा की नई रणनीति?

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा समेत सभी दल अपने-अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में मायावती का युवा चेहरों को आगे बढ़ाने और परिवारवाद से दूरी का संदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।दीपिका आनंद को पार्टी के मिशन से जोड़ने का फैसला बसपा में नई पीढ़ी की भूमिका को लेकर भी चर्चा पैदा कर सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि दीपिका को भविष्य में संगठन में औपचारिक तौर पर कौन सी जिम्मेदारी दी जाएगी।

निष्कासित नेताओं की वापसी पर भी साफ संदेश

मायावती ने पार्टी से निष्कासित किए गए नेताओं को वापस लेने को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं को भी खारिज किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोधी दलों, संगठनों और सोशल मीडिया पर चलने वाले कथित दुष्प्रचार से सावधान रहने को कहा।उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित किए गए लोगों की वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही खबरें गलत हैं। मायावती ने कहा कि ऐसे लोगों को वापस नहीं लिया जाएगा।मायावती का दीपिका आनंद को आगे बढ़ाने का फैसला, परिवारवाद पर उनका रुख और युवाओं को संगठन में अधिक भागीदारी देने की रणनीति यूपी की राजनीति में बसपा की आगामी दिशा का संकेत देती है। अब देखना होगा कि पार्टी इस फैसले को संगठनात्मक स्तर पर किस तरह लागू करती है और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इसका राजनीतिक असर कितना दिखाई देता है।

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