लखनऊ उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बीते वर्षों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। प्रदेश में मेडिकल शिक्षा और इलाज की सुविधाओं का लगातार विस्तार हुआ है। आज यूपी में 85 मेडिकल कॉलेज और 2 एम्स (AIIMS) सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों और एम्स की बढ़ती संख्या से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।पहले गंभीर बीमारी या विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज के लिए मरीजों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। खासकर पूर्वांचल, बुंदेलखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों के मरीजों को लखनऊ, दिल्ली या अन्य बड़े चिकित्सा केंद्रों तक जाना पड़ता था। अब मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के साथ जिलों और आसपास के क्षेत्रों में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ी है।
85 मेडिकल कॉलेजों से बढ़ी मेडिकल शिक्षा की क्षमता
उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में शामिल है। बड़ी आबादी के कारण यहां डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की मांग भी अधिक है। ऐसे में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ना केवल इलाज के लिहाज से ही नहीं, बल्कि मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।नए मेडिकल कॉलेजों के संचालन से एमबीबीएस सहित चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़े हैं। इससे प्रदेश के युवाओं को अपने ही राज्य में मेडिकल की पढ़ाई करने के ज्यादा विकल्प उपलब्ध हुए हैं। मेडिकल कॉलेजों के साथ अस्पतालों का संचालन होने से मरीजों को भी उपचार की सुविधाएं मिलती हैं।इसका सीधा असर स्वास्थ्य व्यवस्था के उस मॉडल पर पड़ता है, जिसमें मेडिकल शिक्षा, डॉक्टरों की उपलब्धता और मरीजों के इलाज की सुविधाएं एक साथ विकसित की जाती हैं।

दो AIIMS ने बढ़ाया भरोसा
उत्तर प्रदेश में दो एम्स का संचालन भी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। एम्स जैसे संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के साथ आधुनिक जांच और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।गंभीर बीमारियों और जटिल मामलों के इलाज के लिए बड़े चिकित्सा संस्थानों की भूमिका काफी अहम होती है। ऐसे में प्रदेश में दो एम्स का संचालन मरीजों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं का विकल्प देता है।एम्स और मेडिकल कॉलेजों के विस्तार का एक बड़ा फायदा यह भी है कि मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
छोटे शहरों और जिलों तक पहुंची विशेषज्ञ चिकित्सा
उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों के विस्तार का सबसे बड़ा असर प्रदेश के जिलों में देखने को मिल रहा है। पहले जिन क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की कमी रहती थी, वहां मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से उपचार का ढांचा मजबूत किया जा रहा है।मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों में विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध होने से स्थानीय स्तर पर मरीजों को इलाज मिल सकता है। इससे मरीजों और उनके परिवारों का समय और यात्रा का खर्च भी बच सकता है।खासकर ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है, क्योंकि गंभीर स्थिति में मरीज को तत्काल बड़े शहर ले जाने की आवश्यकता कई मामलों में कम हो सकती है।
डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर
स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केवल अस्पतालों का निर्माण पर्याप्त नहीं होता। अस्पतालों में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारी और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता भी जरूरी है।मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने से भविष्य में प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने का आधार तैयार होता है। मेडिकल शिक्षा के विस्तार के साथ प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मानव संसाधन तैयार करने की क्षमता भी बढ़ती है।इससे आने वाले वर्षों में सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद की जा सकती है।
मरीजों को मिल सकता है बड़ा फायदा
मेडिकल कॉलेज और एम्स केवल इलाज के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे मेडिकल रिसर्च, प्रशिक्षण और विशेषज्ञता के महत्वपूर्ण केंद्र भी बनते हैं। इन संस्थानों में अलग-अलग बीमारियों के इलाज के साथ चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीक और उपचार पद्धतियों पर भी काम किया जाता है।उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इन संस्थानों का नेटवर्क मजबूत होने से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।इसके अलावा, जिला स्तर पर चिकित्सा संस्थानों के मजबूत होने से लखनऊ और अन्य बड़े शहरों के प्रमुख अस्पतालों पर मरीजों का दबाव भी कम किया जा सकता है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बदल रही यूपी की तस्वीर
उत्तर प्रदेश में 85 मेडिकल कॉलेज और दो एम्स का संचालन राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के विस्तार को दर्शाता है। मेडिकल शिक्षा और इलाज की सुविधाओं को एक साथ बढ़ाने से प्रदेश में स्वास्थ्य क्षेत्र का बुनियादी ढांचा मजबूत करने की दिशा में काम हो रहा है।इस बदलाव का उद्देश्य सिर्फ बड़े शहरों तक आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को सीमित रखना नहीं, बल्कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बनाना है।आने वाले समय में इन संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों, आधुनिक जांच सुविधाओं, बेहतर अस्पताल प्रबंधन और मरीजों के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवाओं को और मजबूत करना बड़ी चुनौती और जरूरत होगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव
उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और एम्स की बढ़ती संख्या को स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा सकता है। 85 मेडिकल कॉलेज और 2 AIIMS का संचालन प्रदेश में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की तस्वीर पेश करता है।अगर इन संस्थानों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता, आधुनिक उपकरण, दवाओं की नियमित आपूर्ति और गुणवत्तापूर्ण इलाज सुनिश्चित किया जाता है, तो इसका सीधा लाभ करोड़ों लोगों को मिल सकता है। प्रदेश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों के लिए यह विस्तार आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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