जिम्बाब्वे के अनुभवी बल्लेबाज और विकेटकीपर ब्रेंडन टेलर ने वनडे क्रिकेट में एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हरारे में खेले जा रहे पहले वनडे में मैदान पर उतरते ही टेलर ने भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का एक खास रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। टेलर अब पुरुष वनडे क्रिकेट में सबसे लंबे करियर वाले खिलाड़ी बन गए हैं।टेलर की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। संन्यास के बाद उन्होंने क्रिकेट में वापसी की और अब एक बार फिर जिम्बाब्वे की टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जो लंबे समय तक याद किया जाएगा।
सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड टूटा
ब्रेंडन टेलर ने साल 2004 में वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया था। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वनडे में उतरने के साथ ही उनके वनडे करियर की अवधि करीब 22 साल हो गई। इसी के साथ उन्होंने सचिन तेंदुलकर के लंबे समय तक कायम रहे रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।सचिन तेंदुलकर ने 1989 में वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया था और 2012 में अपना आखिरी वनडे मुकाबला खेला। उनका वनडे करियर करीब 22 साल 91 दिन का रहा था।टेलर ने इस आंकड़े को पार करते हुए पुरुष वनडे क्रिकेट में सबसे लंबे करियर का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। यह उपलब्धि किसी भी खिलाड़ी के लिए खास है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में दो दशक से अधिक समय तक लगातार बने रहना अपने आप में बड़ी चुनौती है।

सबसे लंबे वनडे करियर वाले खिलाड़ियों में टेलर सबसे आगे
ब्रेंडन टेलर के रिकॉर्ड ने वनडे क्रिकेट के लंबे करियर वाले खिलाड़ियों की सूची में भी बदलाव कर दिया है। इस सूची में अब टेलर सबसे ऊपर हैं, जबकि सचिन तेंदुलकर दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।इसके बाद श्रीलंका के दिग्गज बल्लेबाज सनथ जयसूर्या का नाम आता है, जिनका वनडे करियर भी 21 साल से अधिक लंबा रहा। पाकिस्तान के जावेद मियांदाद और जिम्बाब्वे के सीन विलियम्स भी इस सूची में शामिल हैं।इस उपलब्धि की खास बात यह है कि टेलर ने अपने करियर के दौरान अलग-अलग दौर के खिलाड़ियों और क्रिकेट की बदलती शैली का सामना किया। 2000 के दशक से लेकर मौजूदा दौर तक वनडे क्रिकेट में काफी बदलाव आया है और इतने लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टिके रहना आसान नहीं रहा है।

वापसी के बाद हासिल किया बड़ा मुकाम
ब्रेंडन टेलर का करियर हमेशा सीधा नहीं रहा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया था और इसके बाद कुछ समय तक क्रिकेट से दूर रहे। इसी दौरान उन्होंने इंग्लैंड के काउंटी क्रिकेट में भी अपना अनुभव आजमाया।टेलर ने नॉटिंघमशायर के साथ करार किया था, लेकिन वह इस अनुबंध को पूरा नहीं कर सके। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूरी बनाए रखी। करीब दो साल से ज्यादा समय तक क्रिकेट से दूर रहने के बाद उन्होंने जिम्बाब्वे की टीम में वापसी की।उनकी वापसी के बाद क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें एक बार फिर इस अनुभवी बल्लेबाज पर टिक गईं। अब वनडे क्रिकेट में सबसे लंबे करियर का रिकॉर्ड अपने नाम करके उन्होंने अपनी वापसी की कहानी में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ दिया है।

जिम्बाब्वे के सबसे सफल बल्लेबाजों में शामिल
ब्रेंडन टेलर सिर्फ लंबे वनडे करियर के लिए ही नहीं, बल्कि जिम्बाब्वे के लिए उनके शानदार प्रदर्शन के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने अपनी टीम के लिए लंबे समय तक विकेटकीपर बल्लेबाज की भूमिका निभाई और कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में टीम को संभाला।उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, टेलर ने वनडे क्रिकेट की 205 पारियों में 6,704 रन बनाए हैं। जिम्बाब्वे के लिए वनडे में उनसे ज्यादा रन सिर्फ एंडी फ्लावर के नाम हैं। फ्लावर ने 208 पारियों में 6,786 रन बनाए थे।इस आंकड़े से अंदाजा लगाया जा सकता है कि टेलर ने जिम्बाब्वे के बल्लेबाजी क्रम में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह टीम के लिए सिर्फ रन बनाने वाले खिलाड़ी नहीं रहे, बल्कि कई मौकों पर नेतृत्व की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
तीनों फॉर्मेट में कर चुके हैं जिम्बाब्वे की कप्तानी
ब्रेंडन टेलर ने जिम्बाब्वे की कप्तानी भी की है। वह टीम के उन खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं जिन्होंने क्रिकेट के तीनों प्रमुख अंतरराष्ट्रीय फॉर्मेट में जिम्बाब्वे का नेतृत्व किया।कप्तानी के दौरान टेलर को टीम के प्रदर्शन के साथ-साथ युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की चुनौती भी संभालनी पड़ी। उनके अनुभव का फायदा जिम्बाब्वे क्रिकेट को लंबे समय तक मिला।उनकी बल्लेबाजी की बात करें तो वह खास तौर पर वनडे क्रिकेट में जिम्बाब्वे के लिए लगातार प्रभावी रहे। विकेटकीपिंग और बल्लेबाजी के दोहरे योगदान ने उन्हें टीम के अहम खिलाड़ियों में शामिल किया।
2015 विश्व कप में भारत के खिलाफ भी किया था कमाल
ब्रेंडन टेलर के करियर का एक यादगार अध्याय 2015 वनडे विश्व कप भी रहा। उस टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की थी और दो शतक लगाए थे।इनमें से एक शतक उन्होंने भारत के खिलाफ मुकाबले में बनाया था। विश्व कप में भारत के खिलाफ उस प्रदर्शन ने टेलर को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में और अधिक पहचान दिलाई।दिलचस्प बात यह है कि उसी विश्व कप के दौरान भारत के खिलाफ मैच के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया था। बाद में परिस्थितियां बदलीं और उन्होंने फिर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की।
सचिन का रिकॉर्ड तोड़ना टेलर के लिए बड़ी उपलब्धि
सचिन तेंदुलकर का नाम क्रिकेट इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में लिया जाता है। ऐसे में उनके नाम दर्ज किसी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। टेलर का रिकॉर्ड हालांकि बल्लेबाजी के आंकड़ों से नहीं, बल्कि वनडे करियर की अवधि से जुड़ा है।टेलर ने अपने लंबे करियर में जिम्बाब्वे क्रिकेट के कई दौर देखे हैं। टीम में बदलाव से लेकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बदलते स्वरूप तक, उन्होंने कई पीढ़ियों के खिलाड़ियों के साथ खेला है।अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वनडे में मैदान पर उतरने के साथ ही उनका नाम वनडे क्रिकेट के इतिहास में एक नए रिकॉर्ड के साथ दर्ज हो गया है।
रिकॉर्ड से ज्यादा खास है लंबी क्रिकेट यात्रा
ब्रेंडन टेलर की यह उपलब्धि सिर्फ सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ने तक सीमित नहीं है। यह उनके करीब दो दशक से ज्यादा लंबे क्रिकेट सफर का परिणाम है। उतार-चढ़ाव, संन्यास, क्रिकेट से दूरी और फिर वापसी के बाद टेलर ने एक बार फिर साबित किया कि अनुभव और निरंतरता अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कितनी अहम होती है।जिम्बाब्वे क्रिकेट के लिए भी यह गौरव का क्षण है। देश के सबसे सफल बल्लेबाजों में शामिल टेलर अब वनडे क्रिकेट में सबसे लंबे करियर वाले खिलाड़ी बन चुके हैं। उनका यह रिकॉर्ड आने वाले समय में क्रिकेट इतिहास के खास पन्नों में दर्ज रहेगा।
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