मुरादाबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में चल रहे सेवा पखवाड़े के तहत मुरादाबाद के कुंदरकी क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के साथ संवाद और बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बैंक सखी, समूह सखी, बीसी सखी और बिजली सखी समेत विभिन्न भूमिकाओं में काम कर रहीं महिलाओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान कुंदरकी विधायक ठाकुर रामवीर सिंह ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को लेकर अपनी बात रखी।विधायक ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने का एक माध्यम बताया।

बाइट में विधायक ने रखी अपनी बात
बाइट—ठाकुर रामवीर सिंह, कुंदरकी विधायक, मुरादाबाद
विधायक ठाकुर रामवीर सिंह ने कहा कि नारी शक्ति को आगे बढ़ाए बिना विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करना संभव नहीं होगा। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं से अपील की कि वे अपने गांवों में जाकर अधिक से अधिक गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को समूहों से जोड़ने का प्रयास करें।उनके मुताबिक, महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।विधायक ने कहा कि गांवों में काम कर रहीं बैंक सखी, समूह सखी, बीसी सखी और बिजली सखी जैसी महिलाएं सरकारी योजनाओं और ग्रामीण परिवारों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभा सकती हैं।
गांव-गांव महिलाओं को समूहों से जोड़ने की अपील
बैठक में विधायक ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं से कहा कि वे अपने आसपास की ऐसी महिलाओं की पहचान करें जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या रोजगार के अवसर तलाश रही हैं। उन्हें समूहों से जोड़कर सरकारी योजनाओं और उपलब्ध आर्थिक सहायता की जानकारी देने पर जोर दिया गया।स्वयं सहायता समूहों का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उन्हें आजीविका के अवसरों से जोड़ना है। विभिन्न योजनाओं के तहत पात्र समूहों को चरणबद्ध तरीके से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था है। उपलब्ध विवरण के अनुसार कुछ योजनाओं में समूह गठन के बाद ₹2,500 का स्टार्टिंग फंड, इसके बाद ₹30 हजार का रिवॉल्विंग फंड और आगे ₹1.50 लाख तक की सहायता का प्रावधान बताया गया है।विधायक ने इसी तरह की सहायता को महिलाओं के लिए रोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर बताया।
‘महिलाएं सिर्फ लाभार्थी नहीं, भागीदार बनें’
कार्यक्रम के दौरान विधायक ने महिलाओं को लेकर यह संदेश दिया कि वे केवल योजनाओं की लाभार्थी बनकर न रहें, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाएं छोटे स्तर पर कारोबार शुरू कर सकती हैं और अपनी आय के स्रोत विकसित कर सकती हैं।उन्होंने दावा किया कि समूहों से जुड़कर कई महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उनके मुताबिक, महिलाओं की आर्थिक मजबूती का असर परिवार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
महिलाओं को योजनाओं की जानकारी दी गई
बैठक में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को समूहों के संचालन, आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी भी दी गई। विधायक ने कहा कि यदि किसी महिला को सरकारी योजना का लाभ लेने या रोजगार से जुड़ने में किसी तरह की परेशानी आती है तो वह अपनी समस्या उनके सामने रख सकती है।उन्होंने क्षेत्र की गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को संबंधित स्तर पर उठाने का प्रयास किया जाएगा।
विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा महिला सशक्तीकरण
विधायक रामवीर सिंह ने अपने संबोधन में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा। उन्होंने कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।केंद्र सरकार भी विकसित भारत@2047 के विजन में महिलाओं की भागीदारी और आर्थिक स्वावलंबन पर जोर देती रही है। हालिया सरकारी संचार में स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की योजनाओं को इस व्यापक लक्ष्य से जोड़ा गया है।ऐसे में कुंदरकी में आयोजित बैठक में भी महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को प्रमुख विषय बनाया गया।
रोजगार से जुड़ी महिला ने साझा किया अनुभव
कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से रोजगार हासिल करने वाली महिला ने भी अपनी बात रखी।
बाइट—स्वयं सहायता समूह से रोजगार हासिल करने वाली महिला
महिला ने समूह से जुड़ने के बाद मिले अवसरों और रोजगार के अनुभव को साझा किया। उनका अनुभव कार्यक्रम में मौजूद अन्य महिलाओं के लिए भी महत्वपूर्ण रहा। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के अनुभव यह बताते हैं कि समूह स्तर पर मिलने वाली आर्थिक और संस्थागत मदद का इस्तेमाल अलग-अलग आजीविका गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
बैठक का मुख्य संदेश महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर केंद्रित रहा। विधायक ने कहा कि यदि गांवों की अधिक से अधिक महिलाएं संगठित होकर रोजगार से जुड़ेंगी तो इसका फायदा उनके परिवारों के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा।सेवा पखवाड़े के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी ने ग्रामीण स्तर पर महिला समूहों की भूमिका को सामने रखा। विधायक ने महिलाओं से अपील की कि वे अपने आसपास की जरूरतमंद महिलाओं को भी इस प्रक्रिया से जोड़ें।कार्यक्रम के दौरान विधायक का जोर इस बात पर रहा कि 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य में महिलाओं को सक्रिय भागीदार बनाया जाए और स्वयं सहायता समूहों के जरिए उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने के प्रयास किए जाएं।
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