लखनऊ जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानसिक मजबूती, सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी संदेश के साथ लखनऊ में अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की ओर से ‘राइज एबव: ए डायलॉग ऑन इनर स्ट्रेंथ’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान आध्यात्मिक मार्गदर्शक सिस्टर बीके शिवानी ने आंतरिक शक्ति और सकारात्मक दृष्टिकोण का महत्व समझाया, जबकि चिकित्सा विशेषज्ञों ने थायरॉइड संबंधी समस्याओं, आईसीयू में गंभीर मरीजों की देखभाल और कैंसर की समय पर पहचान जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य विषयों पर अपने विचार साझा किए।कार्यक्रम का आयोजन अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, लखनऊ ने फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन (एफएलओ) लखनऊ की चेयरपर्सन सिमरन साहनी और उनकी कार्यकारिणी समिति की सहभागिता से किया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को मानसिक मजबूती के साथ अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और जीवन की चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझने के लिए प्रेरित करना रहा।

सिस्टर बीके शिवानी ने समझाया आंतरिक शक्ति का महत्व
कार्यक्रम में सिस्टर बीके शिवानी ने कहा कि जीवन में परिस्थितियां हमेशा व्यक्ति की इच्छा के अनुसार नहीं होतीं, लेकिन उनका सामना किस सोच और दृष्टिकोण के साथ किया जाए, यह काफी हद तक व्यक्ति के अपने हाथ में होता है। उन्होंने मन को शांत रखने, विचारों को समझने और भावनाओं में संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों में धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखना व्यक्ति को बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है। वास्तविक शक्ति केवल बाहरी परिस्थितियों को बदलने में नहीं, बल्कि अपने भीतर स्थिरता विकसित करने में भी है। जब व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को समझना सीखता है, तो चुनौतियों का सामना अधिक संतुलित तरीके से कर सकता है।सिस्टर बीके शिवानी के अनुसार, सकारात्मक सोच का अर्थ समस्याओं को नजरअंदाज करना नहीं, बल्कि उनका सामना सही दृष्टिकोण और धैर्य के साथ करना है। मानसिक मजबूती विकसित करने से व्यक्ति रोजमर्रा के जीवन में आने वाली कठिनाइयों को समझने और उनसे निपटने के लिए बेहतर तरीके अपना सकता है।

थायरॉइड और आईसीयू देखभाल पर डॉ. मयंक सोमानी ने रखे विचार
कार्यक्रम में अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के एमडी एवं सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उचित चिकित्सा देखभाल की जरूरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से थायरॉइड की समस्याओं में नियमित जांच और समय पर उपचार के महत्व को रेखांकित किया।उन्होंने कहा कि कई बार लोग स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को तब तक गंभीरता से नहीं लेते, जब तक उनका असर दैनिक जीवन पर दिखाई देने नहीं लगता। ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच और लक्षणों के प्रति जागरूक रहना जरूरी है। थायरॉइड से संबंधित समस्याओं में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जांच और उपचार से स्थिति को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है।डॉ. सोमानी ने गंभीर मरीजों के उपचार में गहन चिकित्सा इकाई यानी आईसीयू की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि आईसीयू में मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाती है और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाती है। गंभीर अवस्था में मरीज की स्थिति में होने वाले बदलावों पर समय रहते ध्यान देना महत्वपूर्ण होता है।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सही समय पर उचित चिकित्सा देखभाल मरीज के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। लोगों को बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

कैंसर की समय पर पहचान से उपचार संबंधी निर्णय लेने में मदद
कार्यक्रम में अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप के ऑन्कोलॉजी नेटवर्क के सीईओ एवं क्लिनिकल हेड डॉ. हरित चतुर्वेदी ने कैंसर के प्रति जागरूकता और समय पर जांच की आवश्यकता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कैंसर के उपचार में बीमारी का प्रकार, उसकी अवस्था और समय पर हुई पहचान महत्वपूर्ण होती है।उन्होंने बताया कि समय पर जांच होने से चिकित्सकों को बीमारी की स्थिति समझने और उपलब्ध उपचार विकल्पों के बारे में निर्णय लेने में मदद मिलती है। शरीर में किसी असामान्य बदलाव या लंबे समय तक बने रहने वाले लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।डॉ. चतुर्वेदी ने कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बीमारी की पहचान और उपचार की प्रक्रिया में चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह महत्वपूर्ण होती है। स्वास्थ्य संबंधी संकेतों को समझना और जरूरत पड़ने पर जांच कराना लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रेरित कर सकता है।
एफएलओ लखनऊ ने बताया ऐसे संवाद का महत्व
एफएलओ लखनऊ की चेयरपर्सन सिमरन साहनी ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम लोगों को जीवन की चुनौतियों को नए नजरिये से देखने और अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने का अवसर देते हैं। उन्होंने मानसिक मजबूती से जुड़े आध्यात्मिक विचारों के साथ स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर चर्चा को भी महत्वपूर्ण बताया। ऐसे संवाद लोगों को अपने जीवन और स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग बनाने में मदद कर सकते हैं। मानसिक संतुलन, सकारात्मक सोच और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा होने से लोगों को अपने दैनिक जीवन में बेहतर विकल्प अपनाने की प्रेरणा मिलती है।कार्यक्रम में आध्यात्मिक मार्गदर्शन और चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुभवों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया, ताकि जीवन की चुनौतियों और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को व्यापक दृष्टिकोण से समझा जा सके।
मानसिक मजबूती और शारीरिक स्वास्थ्य का साझा संदेश
‘राइज एबव’ सत्र में मानसिक मजबूती और शारीरिक स्वास्थ्य के बीच संबंध पर विशेष ध्यान दिया गया। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जीवन को बेहतर बनाने के लिए आंतरिक शक्ति विकसित करने के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूक रहना भी जरूरी है।सकारात्मक सोच और भावनात्मक संतुलन कठिन परिस्थितियों से निपटने में मदद कर सकते हैं, जबकि नियमित स्वास्थ्य जांच, लक्षणों के प्रति सतर्कता और समय पर चिकित्सकीय सलाह शारीरिक स्वास्थ्य की देखभाल में महत्वपूर्ण हैं।अपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल और एफएलओ लखनऊ की सहभागिता से आयोजित इस कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य, आध्यात्मिक विचारों और चिकित्सा जागरूकता को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया। सत्र का मुख्य संदेश यही रहा कि बेहतर जीवन के लिए मन की मजबूती और शरीर की सेहत, दोनों पर ध्यान देना आवश्यक है।
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