उत्तराखंड में 419 मदरसों की मान्यता लंबित, TET बना बड़ी बाधा

Editorial
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देहरादून उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता का मामला अभी भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। प्रदेश में मदरसा बोर्ड से पंजीकृत कुल 452 मदरसों में से 419 मदरसों को अब तक शिक्षा विभाग से मान्यता नहीं मिल सकी है। हालांकि, शिक्षा विभाग ने मान्यता के लिए आवेदन की समयसीमा को लेकर मदरसों को कुछ राहत दी है। विभाग का कहना है कि पहले से संचालित मदरसों के मामलों में 31 अगस्त के बाद ऑनलाइन आवेदन स्वीकार न करने संबंधी सामान्य व्यवस्था को उसी तरह लागू नहीं किया जा रहा है।मदरसों की मान्यता का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि शिक्षा विभाग की ओर से मान्यता के लिए निर्धारित नियमों में शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता, टीईटी और विद्यालय में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं से संबंधित कई शर्तें पूरी करना जरूरी है। मदरसा संचालकों की ओर से इन शर्तों को लेकर अपनी अलग-अलग समस्याएं बताई जा रही हैं।

452 में से 419 मदरसों को अब तक मान्यता नहीं

प्रदेश में मदरसा बोर्ड से पंजीकृत 452 मदरसों में से बड़ी संख्या में मदरसों को अभी शिक्षा विभाग की मान्यता नहीं मिली है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 419 मदरसों का मामला या तो लंबित है या उन्होंने अभी तक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त नहीं की है।शिक्षा विभाग की ओर से निजी विद्यालयों की तर्ज पर मदरसों को भी मान्यता देने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इसके लिए विभाग ने आवेदन, शुल्क और विलंब शुल्क से संबंधित व्यवस्था तय की है। सामान्य तौर पर मान्यता के लिए आवेदन करने की अवधि एक अप्रैल से 31 जुलाई तक निर्धारित की गई है, जबकि एक अगस्त से 31 अगस्त तक आवेदन करने पर विलंब शुल्क का प्रावधान है।इसके बाद ऑनलाइन आवेदन पर विचार नहीं करने की व्यवस्था लागू की गई थी। मदरसों को लेकर शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था में कुछ राहत दी है।

 उत्तराखंड में 419 मदरसों की मान्यता लंबित,
उत्तराखंड में 419 मदरसों की मान्यता लंबित

पहले से चल रहे मदरसों को आवेदन का मौका

देहरादून के मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जयसवाल के अनुसार, मदरसे पहले से संचालित हो रहे हैं। इसलिए मान्यता के लिए आवेदन के मामले में 31 अगस्त के बाद ऑनलाइन आवेदन नहीं लेने वाली व्यवस्था को इन पर उसी तरह लागू नहीं किया जा रहा है।मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जयसवाल ने कहा, “मदरसों की मान्यता के लिए शिक्षक का टीईटी होना अनिवार्य है। कक्षा एक से पांच तक के लिए टीईटी प्रथम और कक्षा छह से आठवीं तक के लिए टीईटी द्वितीय उत्तीर्ण होना चाहिए। शिक्षक की शैक्षिक योग्यता में किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती।”उन्होंने यह भी बताया कि देहरादून जिले में निरीक्षण के बाद सात मदरसों को मान्यता दी जा चुकी है, जबकि कुछ अन्य मदरसों के मामले अभी विचाराधीन हैं।

शिक्षक की योग्यता बनी सबसे बड़ी चुनौती

मदरसों की मान्यता के रास्ते में सबसे बड़ी बाधाओं में शिक्षकों की योग्यता का मुद्दा भी शामिल है। मदरसा संचालकों की ओर से बताया जा रहा है कि पहले मदरसा बोर्ड से संबंधित डिग्री और योग्यता के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति की जाती थी। लेकिन विद्यालयी शिक्षा की मान्यता के लिए अब निर्धारित शैक्षिक योग्यता और शिक्षक पात्रता परीक्षा की शर्तें पूरी करना जरूरी है।जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला कोषाध्यक्ष अब्दुल सत्तार के अनुसार, मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ विद्यालयी शिक्षा की व्यवस्था को लेकर शिक्षकों की दोहरी आवश्यकता सामने आ रही है। उनका कहना है कि धार्मिक शिक्षा और सामान्य विद्यालयी शिक्षा के लिए अलग-अलग योग्यता वाले शिक्षकों की व्यवस्था करना कई मदरसों के लिए चुनौती बन रहा है।इस व्यवस्था को लेकर मदरसा संचालकों का कहना है कि एक ओर उन्हें धार्मिक शिक्षा के लिए योग्य शिक्षक रखने होते हैं, वहीं दूसरी ओर सामान्य विषयों की शिक्षा के लिए निर्धारित योग्यता वाले शिक्षकों की जरूरत पड़ती है।

 उत्तराखंड में 419 मदरसों की मान्यता लंबित,
उत्तराखंड में 419 मदरसों की मान्यता लंबित,

टीईटी और शैक्षिक योग्यता पर विभाग का रुख स्पष्ट

शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की योग्यता को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जयसवाल के अनुसार मान्यता की प्रक्रिया में शिक्षक की योग्यता से संबंधित नियमों में छूट नहीं दी जा सकती।गोविंद राम जयसवाल के मुताबिक, “कक्षा एक से पांच तक के लिए टीईटी प्रथम और कक्षा छह से आठवीं तक के लिए टीईटी द्वितीय उत्तीर्ण होना चाहिए। शिक्षक की शैक्षिक योग्यता में किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती।”विभाग का यह बयान मदरसों की मान्यता प्रक्रिया में शिक्षक पात्रता की अहमियत को स्पष्ट करता है। यानी केवल मदरसा बोर्ड में पंजीकरण होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिक्षा विभाग से मान्यता लेने के लिए निर्धारित शैक्षिक मानकों को पूरा करना भी जरूरी है।

कक्षा कक्षों की संख्या भी जरूरी

मान्यता के लिए केवल शिक्षकों की योग्यता ही नहीं, बल्कि मदरसे में उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं को भी देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार कक्षा पांचवीं तक की मान्यता के लिए कम से कम पांच कक्षा कक्ष और एक अतिरिक्त कक्ष होना जरूरी है।इस शर्त के चलते भी कुछ मदरसों के सामने मान्यता लेने में व्यावहारिक समस्या आ रही है। मदरसा संचालकों को भवन, कक्षा कक्ष, शिक्षकों की योग्यता और अन्य निर्धारित मानकों को पूरा करना पड़ रहा है।शिक्षा विभाग की ओर से निरीक्षण के दौरान इन व्यवस्थाओं का परीक्षण किया जाता है। इसके बाद मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को मान्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।

देहरादून में सात मदरसों को मिली मान्यता

देहरादून जिले में शिक्षा विभाग की ओर से निरीक्षण के बाद सात मदरसों को मान्यता दिए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं, कुछ अन्य मदरसों के आवेदन और दस्तावेजों की जांच की जा रही है।इससे साफ है कि मान्यता की प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं है। जिन मदरसों की ओर से निर्धारित मानकों को पूरा किया जा रहा है, उनके मामलों में विभाग की ओर से निरीक्षण और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

मदरसा बोर्ड और शिक्षा विभाग की मान्यता अलग

मदरसों की मान्यता को लेकर एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मदरसा बोर्ड में पंजीकरण और शिक्षा विभाग से मान्यता को अलग-अलग प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। मदरसा बोर्ड से पंजीकृत संस्थानों को विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मानकों को पूरा करने की आवश्यकता पड़ रही है।इसी वजह से प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे मदरसे हैं जो मदरसा बोर्ड के रिकॉर्ड में पंजीकृत हैं, लेकिन शिक्षा विभाग से मान्यता की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं कर पाए हैं।

आगे भी जारी रहेगी जांच और निरीक्षण की प्रक्रिया

उत्तराखंड में मदरसों की मान्यता का मामला फिलहाल प्रक्रिया में है। शिक्षा विभाग की ओर से पहले से संचालित मदरसों को आवेदन के मामले में राहत दी गई है, लेकिन मान्यता के लिए निर्धारित शर्तों में छूट नहीं दी गई है।खास तौर पर शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता और टीईटी को लेकर विभाग का रुख स्पष्ट है। मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जयसवाल ने साफ कहा है कि शिक्षक की शैक्षिक योग्यता में किसी तरह की छूट नहीं दी जा सकती।ऐसे में आने वाले समय में मदरसों को मान्यता हासिल करने के लिए शिक्षकों की निर्धारित योग्यता, टीईटी, पर्याप्त कक्षा कक्ष और अन्य आवश्यक मानकों को पूरा करना होगा। शिक्षा विभाग की ओर से निरीक्षण के बाद ही संबंधित मदरसों के मान्यता संबंधी मामलों पर अंतिम प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

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