कौशाम्बी उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में गांव के बच्चों की एक गुहार चर्चा में है। बच्चों ने जिला प्रशासन से गांव में रोशनी की व्यवस्था कराने की अपील की है। बच्चों का कहना है कि गांव के कई बिजली के खंभों पर लाइट नहीं होने के कारण शाम होते ही रास्तों पर अंधेरा छा जाता है। ऐसे में उन्हें घर से बाहर निकलने में डर लगता है।मामला मंझनपुर क्षेत्र के चकअहमदीपुर म्योहर गांव का बताया जा रहा है। बच्चों ने अपनी परेशानी सीधे जिलाधिकारी यानी DM तक पहुंचाने की कोशिश की है। बच्चों की अपील का संदेश सामने आने के बाद गांव की बुनियादी सुविधाओं और सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बच्चों ने DM से हाथ जोड़कर लगाई गुहार
गांव के बच्चों ने अपनी परेशानी बताते हुए जिलाधिकारी से मदद की अपील की। बच्चों की ओर से कहा गया कि गांव में लगे बिजली के खंभों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। शाम ढलने के बाद रास्ते अंधेरे में डूब जाते हैं।बच्चों ने DM को संबोधित करते हुए कहा कि ‘DM अंकल, गांव के किसी खंभे में लाइट नहीं है।’ बच्चों ने अपनी समस्या बताते हुए प्रशासन से गांव में स्ट्रीट लाइट लगवाने की मांग की है।बच्चों की इस अपील में उनकी रोजमर्रा की परेशानी साफ नजर आती है। उनका कहना है कि अंधेरा होने के बाद घर से बाहर निकलना आसान नहीं रहता और रास्ते में डर महसूस होता है।
शाम होते ही अंधेरे में डूब जाते हैं रास्ते
ग्रामीण इलाकों में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था लोगों की सुरक्षा और आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए रात के समय रास्तों पर पर्याप्त रोशनी होना जरूरी है।चकअहमदीपुर म्योहर गांव में बच्चों की शिकायत के मुताबिक, शाम होने के बाद कई स्थानों पर पर्याप्त रोशनी नहीं रहती। ऐसे में लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।बच्चों का कहना है कि जब अंधेरा ज्यादा हो जाता है तो वे घर से बाहर निकलने से बचते हैं। जरूरी काम होने पर भी रास्ते को लेकर डर बना रहता है।
‘अंधेरे में बाहर निकलने में लगता है डर’
बच्चों ने अपनी परेशानी को बेहद सरल शब्दों में प्रशासन के सामने रखा। उनका कहना है कि गांव में रोशनी नहीं होने के कारण अंधेरा होने के बाद घर से बाहर निकलने में डर लगता है।बच्चों की इस अपील ने गांव की समस्या को सीधे प्रशासन के सामने पहुंचा दिया है। आमतौर पर गांवों में स्ट्रीट लाइट की समस्या को लेकर ग्रामीण संबंधित विभाग या स्थानीय स्तर पर शिकायत करते हैं, लेकिन इस मामले में बच्चों की ओर से सीधे DM से गुहार लगाए जाने के कारण यह मामला चर्चा में आया है।
गांव में स्ट्रीट लाइट की मांग
ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि गांव में लगे बिजली के खंभों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था कराई जाए। इससे रात के समय लोगों को आवाजाही में सुविधा मिलेगी और बच्चों को भी अंधेरे के कारण होने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है।गांव में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त होने से राहगीरों को भी सुविधा मिलेगी। इसके अलावा घरों से बाहर निकलने वाले लोगों को रात के समय रास्तों पर अंधेरे की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।बच्चों की अपील के बाद अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन इस समस्या का संज्ञान लेकर संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देगा।
बिजली के खंभे हैं, लेकिन रोशनी की समस्या
बच्चों की शिकायत का केंद्र गांव में मौजूद बिजली के खंभे और उन पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होना है। सवाल यह है कि जिन स्थानों पर बिजली के खंभे मौजूद हैं, वहां स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था क्यों नहीं है और यदि लाइटें लगी हैं तो वे काम कर रही हैं या नहीं।इसका वास्तविक कारण प्रशासनिक जांच या संबंधित विभाग के निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा। जरूरत पड़ने पर खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत कराई जा सकती है या नए प्रकाश उपकरण लगाए जा सकते हैं।
बच्चों की आवाज बनी उम्मीद
इस पूरे मामले की खास बात यह है कि अपनी समस्या को लेकर गांव के बच्चों ने खुद आवाज उठाई है। बच्चों की ओर से DM से की गई अपील बताती है कि सार्वजनिक सुविधाओं की कमी का असर सीधे उनके रोजमर्रा के जीवन पर पड़ रहा है।बच्चों का यह कहना कि ‘अंधेरे में घर से बाहर निकलने में डर लगता है’, प्रशासन के लिए समस्या की गंभीरता समझने का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।अब लोगों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि गांव में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था बेहतर होती है तो बच्चों समेत ग्रामीणों को रात के समय काफी सुविधा मिल सकती है।
प्रशासन के सामने अब कार्रवाई की चुनौती
चकअहमदीपुर म्योहर गांव के बच्चों की शिकायत सामने आने के बाद संबंधित विभाग के सामने सबसे पहले वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने की जरूरत होगी। किन खंभों पर लाइट नहीं है, कितनी लाइटें खराब हैं और कितने स्थानों पर नई लाइट की आवश्यकता है, इसका आकलन किया जा सकता है।इसके बाद उपलब्ध सरकारी व्यवस्था के अनुसार खराब लाइटों की मरम्मत या आवश्यक स्थानों पर नई स्ट्रीट लाइट लगाने की कार्रवाई की जा सकती है।कौशाम्बी के मंझनपुर क्षेत्र के चकअहमदीपुर म्योहर गांव के बच्चों की DM से की गई यह अपील अब चर्चा में है। बच्चों की मांग सीधी है—गांव की सड़कों और रास्तों पर पर्याप्त रोशनी हो, ताकि अंधेरा होने के बाद उन्हें घर से बाहर निकलने में डर न लगे। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है।
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