सिद्धार्थनगर पुलिस की अनूठी पहल: मिशन शक्ति केंद्र ने बचाए 384 उजड़ते परिवार, 13 महिला पुलिसकर्मी सम्मानित

Editorial
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सिद्धार्थनगर जनपद में पारिवारिक कलह और टूटते रिश्तों के बीच सिद्धार्थनगर पुलिस ने इंसानियत और संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने कई घरों को बिखरने से बचा लिया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) सिद्धार्थनगर, डॉ. अभिषेक महाजन की पहल पर ‘मिशन शक्ति केंद्र’ और ‘महिला परामर्श केंद्र’ ने काउंसलिंग के जरिए ऐसे 384 परिवारों को फिर से एक कर दिया है, जिनके रिश्ते तलाक या कानूनी मुकदमों की कगार पर पहुंच चुके थे। इस सराहनीय और अनुकरणीय कार्य के लिए महिला थाना प्रभारी सहित 13 तेजतर्रार महिला पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है।

सिद्धार्थनगर पुलिस की अनूठी पहल
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सिद्धार्थनगर पुलिस की अनूठी पहल

क्या है पूरा मामला? पुलिस सभागार में गूंजी खुशियां

पुलिस लाइन स्थित सभागार में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान जनपद के विभिन्न पारिवारिक मामलों में आपसी सुलह-समझौते के बाद फिर से एक हुए दंपतियों और उनके परिजनों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक महाजन ने न सिर्फ परिवारों को सम्मानित किया, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना भी की।संबोधित करते हुए एसएसपी डॉ. अभिषेक महाजन ने दो टूक शब्दों में कहा कि अदालती चक्करों और कानूनी लड़ाइयों से बेहतर है कि आपसी बातचीत और समझाइश से रिश्तों को बचाया जाए। उन्होंने कहा कि “परिवार समाज की धुरी हैं, यदि परिवार टूटते हैं तो समाज और आने वाली पीढ़ी कमजोर होती है।” सिद्धार्थनगर पुलिस का मिशन शक्ति केंद्र इसी उद्देश्य के साथ काम कर रहा है कि हर उजड़ते आशियाने को फिर से बसाया जा सके।

मिशन शक्ति केंद्र: 384 परिवारों की टूटी उम्मीदों को दिया नया जीवन

पारिवारिक विवाद अक्सर अहं (Ego), गलतफहमियों और छोटी-छोटी बातों के कारण विकराल रूप ले लेते हैं। सिद्धार्थनगर के महिला परामर्श केंद्र और मिशन शक्ति केंद्र ने पिछले कुछ समय में अद्भुत कार्यकुशलता का परिचय दिया है।केंद्र की टीम ने लगातार काउंसलिंग सत्र आयोजित किए, दोनों पक्षों की बातों को गहराई से सुना और उन्हें आपसी मतभेद भुलाकर नए सिरे से जीवन शुरू करने के लिए प्रेरित किया। इसका परिणाम यह रहा कि 384 परिवारों को कानूनी दांव-पेच और हमेशा के लिए अलग होने से बचा लिया गया।जब ये परिवार पुलिस सभागार में एक-दूसरे का हाथ थामे पहुंचे, तो वहां का माहौल बेहद भावुक और प्रेरणादायक था। जिन जोड़ों के रिश्ते टूटने की कगार पर थे, उन्होंने भविष्य में प्रेम और विश्वास के साथ मिलजुलकर रहने का संकल्प लिया।

इन 13 महिला पुलिसकर्मियों के जज्बे को सलाम

इस पूरे अभियान को धरातल पर सफल बनाने और परिवारों को जोड़ने में महिला थाने की टीम की भूमिका सबसे अहम रही। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए निम्नलिखित अधिकारियों और कर्मियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया:

  • भाग्यवती पांडेय (प्रभारी निरीक्षक, महिला थाना एवं मिशन शक्ति केंद्र प्रभारी)

  • इसके साथ ही महिला थाने की 13 समर्पित महिला पुलिसकर्मियों को उनकी संवेदनशीलता, कार्यकुशलता और सेवाभाव के लिए सम्मानित किया गया।

इस दौरान कार्यक्रम में अपर पुलिस अधीक्षक प्रशांत कुमार प्रसाद, क्षेत्राधिकारी लाइन विश्वजीत सौरयान (IPS), प्रतिसार निरीक्षक सहित जनपद के तमाम पुलिस अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे, जिन्होंने पूरी टीम की पीठ थपथपाई।

क्यों खास है सिद्धार्थनगर पुलिस की यह पहल?

  1. कानूनी बोझ से राहत: अदालतों में लंबित पारिवारिक मुकदमों का बोझ कम हुआ है और मामलों का निपटारा कम समय में सौहार्दपूर्ण तरीके से हुआ है।

  2. सकारात्मक संदेश: पुलिस की छवि केवल कानून और डंडे तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समाज के रक्षक के साथ-साथ ‘सुधारक’ की भूमिका भी निभा रही है।

  3. महिला सशक्तिकरण: महिला पुलिसकर्मियों के नेतृत्व में चले इस अभियान ने साबित कर दिया है कि संवेदनशीलता और संवाद के बल पर बड़े से बड़े विवाद को सुलझाया जा सकता है।

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