लखनऊ लखनऊ विश्वविद्यालय के कैलाश हॉस्टल की मेस में भोजन की गुणवत्ता को लेकर छात्राओं का आक्रोश बुधवार देर रात तक जारी रहा। खाने में कीड़े मिलने की शिकायत के बाद बड़ी संख्या में छात्राएं शाम करीब साढ़े पांच बजे कुलपति कार्यालय पहुंचीं। कुलपति और कुलसचिव के मौके पर नहीं मिलने के बाद छात्राओं ने कार्यालय के बाहर धरना शुरू कर दिया। देर रात करीब 1:30 बजे तक छात्राओं का प्रदर्शन चलता रहा। इस दौरान तीन छात्राओं की तबीयत बिगड़ने और उनके बेहोश होने की भी सूचना सामने आई। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल की मेस बंद करने का आदेश जारी किया।
- खाने में कीड़े मिलने की शिकायत के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन
- रात तक जारी रहा धरना, तीन छात्राओं की तबीयत बिगड़ी
- छात्राओं ने मेस में गंदगी और खराब भोजन का लगाया आरोप
- प्रोवोस्ट ने भी माना, शिकायत के बाद कुछ दिन सुधरती है व्यवस्था
- ‘एक कचौड़ी दो समोसा, मेस वालों पर नहीं भरोसा’ के लगाए नारे
- नई कंपनी को मेस का ठेका मिलने के बाद बढ़ा विवाद
- मेस बंद होने से बढ़ सकती है छात्रों की परेशानी
खाने में कीड़े मिलने की शिकायत के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन
छात्राओं का आरोप है कि कैलाश हॉस्टल की मेस में भोजन की गुणवत्ता लंबे समय से खराब है। बुधवार को खाने में कीड़े मिलने की शिकायत के बाद छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा। छात्राओं का कहना था कि पिछले करीब एक महीने से उन्हें मेस के भोजन को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।बड़ी संख्या में छात्राएं शाम करीब 5:30 बजे विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय पहुंचीं। वहां कुलपति और कुलसचिव के मौजूद नहीं होने पर छात्राओं ने कार्यालय के बाहर ही नारेबाजी शुरू कर दी और धरने पर बैठ गईं। छात्राओं ने कहा कि हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता से समझौता नहीं किया जा सकता।

रात तक जारी रहा धरना, तीन छात्राओं की तबीयत बिगड़ी
मामला देर रात तक शांत नहीं हुआ। रात करीब 10:30 बजे तक कुलपति के मौके पर नहीं पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारी छात्राएं उनके आवास की ओर जाने लगीं। छात्राओं ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के गेट नंबर तीन पर ताला लगा दिया गया था। वहां गार्ड भी मौजूद नहीं थे। इसके बाद छात्राएं गेट नंबर चार की ओर पहुंचीं, लेकिन वहां भी ताला लगा मिला।छात्राओं का कहना था कि वे देर रात तक विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन कर रही थीं, लेकिन उनकी शिकायत सुनने के लिए कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच रहा था। रात करीब 12 बजे तक 70 से अधिक छात्राएं परिसर में मौजूद थीं।प्रदर्शन के दौरान तीन छात्राओं की तबीयत बिगड़ने और उनके बेहोश होने की सूचना सामने आई। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन में भी हलचल बढ़ी और देर रात हॉस्टल की मेस बंद करने का आदेश जारी किया गया।
छात्राओं ने मेस में गंदगी और खराब भोजन का लगाया आरोप
प्रदर्शन कर रही छात्राओं का आरोप है कि मेस में साफ-सफाई की व्यवस्था ठीक नहीं है। उनका कहना है कि भोजन में लगातार समस्या सामने आ रही है। छात्राओं ने यह भी कहा कि पिछले दिनों कुलपति ने हॉस्टल का निरीक्षण किया था और व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए थे, लेकिन इसके बावजूद भोजन की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।छात्राओं ने मेस व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब हॉस्टल की मेस में रहने वाली छात्राओं को नियमित रूप से भोजन करना है तो उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
प्रोवोस्ट ने भी माना, शिकायत के बाद कुछ दिन सुधरती है व्यवस्था
प्रदर्शन के दौरान हॉस्टल की प्रोवोस्ट डॉ. बबिता भी मौके पर मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि मेस के भोजन की गुणवत्ता में कुछ समय के लिए सुधार होता है, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर स्थिति खराब हो जाती है। उन्होंने बताया कि मेस संचालक से कई बार शिकायत की गई, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।मौके पर चीफ प्रोवोस्ट प्रो. आशीष अवस्थी और प्रोवोस्ट ओपी शुक्ला भी मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान एनएसयूआई के छात्र नेता प्रिंस प्रकाश और सपा लोहिया वाहिनी के अभिषेक श्रीवास्तव बाबू भी मौके पर पहुंचे।
‘एक कचौड़ी दो समोसा, मेस वालों पर नहीं भरोसा’ के लगाए नारे
प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने मेस के भोजन की गुणवत्ता को लेकर नारे भी लगाए। छात्राओं ने व्यंग्यात्मक अंदाज में ‘एक कचौड़ी दो समोसा, मेस वालों पर नहीं भरोसा’ जैसे नारे लगाए। छात्राओं का कहना था कि उनकी मांग केवल बेहतर भोजन और साफ-सफाई की है और विश्वविद्यालय प्रशासन को इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए।
नई कंपनी को मेस का ठेका मिलने के बाद बढ़ा विवाद
विश्वविद्यालय की मेस व्यवस्था को लेकर पिछले करीब एक महीने से लगातार विरोध की स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है। बताया गया है कि कई वर्षों से मेस में भोजन उपलब्ध कराने वाले संचालक को कुछ समय पहले हटाकर नई कंपनी को ठेका दिया गया था। इसके बाद से ही मेस की व्यवस्था को लेकर छात्र-छात्राओं की शिकायतें और प्रदर्शन सामने आने लगे। विश्वविद्यालय से जुड़े एक तबके की ओर से इन प्रदर्शनों के पीछे अन्य कारण होने की बात भी कही जा रही है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में फिलहाल मुख्य विवाद मेस के भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर है।
मेस बंद होने से बढ़ सकती है छात्रों की परेशानी
देर रात चीफ प्रोवोस्ट की ओर से हॉस्टल में मेस बंद करने का आदेश जारी किए जाने के बाद अब छात्रों के सामने भोजन की वैकल्पिक व्यवस्था का सवाल भी खड़ा हो गया है। छात्राओं के प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मेस व्यवस्था को लेकर उठी शिकायतों का समाधान करना और हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।फिलहाल छात्राओं के प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मेस व्यवस्था को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर बनी हुई है। छात्राओं की मांग है कि भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए, ताकि उन्हें दोबारा ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
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