लखनऊ भारतीय हथकरघा की समृद्ध विरासत, पारंपरिक शिल्प और आधुनिक फैशन के खूबसूरत संगम के साथ राजधानी लखनऊ में ‘कॉटन एंड सिल्क फैब प्रदर्शनी 2026’ का शुभारंभ हुआ। कैसरबाग स्थित ऐतिहासिक सफेद बारादरी में आयोजित इस प्रदर्शनी में देश के विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक मास्टर बुनकरों के उत्पाद लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। यहां बनारसी सिल्क से लेकर चंदेरी, कांचीपुरम, तसर, इक्कत और पैठानी जैसे पारंपरिक वस्त्रों की विविधता देखने को मिल रही है। प्रदर्शनी में भारतीय संस्कृति, हस्तशिल्प और बदलते फैशन की झलक एक ही जगह दिखाई दे रही है।शारदीय नवरात्रि के अवसर पर आयोजित यह प्रदर्शनी केवल कपड़ों की खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की पारंपरिक बुनकरी कला को पहचान दिलाने और कारीगरों की मेहनत को सम्मान देने का एक प्रयास भी है। इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों के बुनकरों को साझा मंच उपलब्ध कराना और भारतीय सिल्क तथा हैंडलूम की विरासत को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।

सफेद बारादरी में पारंपरिक हथकरघा की खास रौनक
कैसरबाग की सफेद बारादरी में सजी कॉटन एंड सिल्क फैब प्रदर्शनी में पारंपरिक भारतीय परिधानों की आकर्षक श्रृंखला प्रस्तुत की गई है। अलग-अलग राज्यों की बुनकरी और कपड़ों की खास पहचान को यहां करीब से देखने का अवसर मिल रहा है। पारंपरिक डिजाइन, बारीक कारीगरी और कपड़ों की विविधता प्रदर्शनी को खास बना रही है।प्रदर्शनी में बनारसी, चंदेरी, तसर, कांचीपुरम, इक्कत और पैठानी जैसे प्रसिद्ध हैंडलूम उत्पाद शामिल हैं। इनके साथ जयपुरी बगरू प्रिंट के वस्त्र भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। इन परिधानों में भारतीय शिल्प परंपरा की विविधता दिखाई देती है। हर क्षेत्र की अपनी बुनाई तकनीक, रंगों का चयन और डिजाइन शैली होती है, जो इन वस्त्रों को अलग पहचान देती है।लखनऊ जैसे सांस्कृतिक शहर में इस तरह की प्रदर्शनी पारंपरिक परिधानों और हस्तशिल्प में रुचि रखने वाले लोगों के लिए एक खास अवसर उपलब्ध कराती है। यहां लोग अलग-अलग क्षेत्रों की कपड़ा परंपराओं को एक ही स्थान पर देख सकते हैं।

बनारसी से कांचीपुरम तक, एक मंच पर देशभर की बुनकरी
कॉटन एंड सिल्क फैब प्रदर्शनी की प्रमुख विशेषता देश के विभिन्न हिस्सों के पारंपरिक वस्त्रों की मौजूदगी है। बनारसी सिल्क अपनी बारीक बुनाई और पारंपरिक डिजाइन के लिए पहचानी जाती है, जबकि चंदेरी के हल्के और आकर्षक वस्त्रों की अपनी अलग पहचान है। कांचीपुरम सिल्क दक्षिण भारतीय परिधान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वहीं, इक्कत और पैठानी जैसे वस्त्र अपनी विशिष्ट डिजाइन शैली और शिल्प कौशल के लिए जाने जाते हैं।प्रदर्शनी में इन पारंपरिक वस्त्रों के साथ आधुनिक पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किए गए डिजाइन भी देखने को मिल रहे हैं। इससे पारंपरिक कला और आज के फैशन के बीच तालमेल की झलक मिलती है। प्राकृतिक रेशों से तैयार वस्त्रों की विस्तृत श्रृंखला भी प्रदर्शनी का हिस्सा है।इसके अलावा कश्मीरी प्योर क्रेप साड़ियां, शुद्ध सिल्क साड़ियां और विभिन्न आधुनिक डिजाइनों के पारंपरिक परिधान भी प्रदर्शित किए गए हैं। इससे ग्राहकों को अलग-अलग अवसरों और पसंद के अनुरूप वस्त्रों के विकल्प देखने का मौका मिल रहा है।

100 से अधिक मास्टर बुनकरों के उत्पाद शामिल
इस प्रदर्शनी में देशभर से आए 100 से अधिक मास्टर बुनकरों द्वारा तैयार किए गए उत्पाद शामिल किए गए हैं। हथकरघा उद्योग में बुनकरों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। कपड़े की बुनाई से लेकर डिजाइन और बारीक कारीगरी तक, प्रत्येक चरण में उनके कौशल और अनुभव की जरूरत होती है।ऐसे आयोजनों के माध्यम से बुनकरों को अपने उत्पादों को ग्राहकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। इससे पारंपरिक उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने और हस्तनिर्मित वस्त्रों की पहचान को मजबूत करने में मदद मिल सकती हैआज के दौर में फैशन के विकल्प तेजी से बदल रहे हैं। इसके बावजूद पारंपरिक सिल्क और कॉटन हैंडलूम की मांग अपनी सांस्कृतिक पहचान, कारीगरी और विविध डिजाइन के कारण बनी हुई है। कॉटन एंड सिल्क फैब प्रदर्शनी इसी परंपरा को आधुनिक पसंद के साथ जोड़ने का प्रयास करती दिखाई देती है।
गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा
प्रदर्शनी के आयोजक मानस आचार्य और जावेद मकसूद ने बताया कि आयोजन का उद्देश्य देश की गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाना और विभिन्न राज्यों के बुनकरों को एक साझा मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय सिल्क और हैंडलूम की समृद्ध परंपरा को जन-जन तक पहुंचाना भी इस आयोजन का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।लखनऊ अपनी सांस्कृतिक विविधता, तहजीब और आपसी सौहार्द के लिए जाना जाता है। ऐसे में सफेद बारादरी जैसे ऐतिहासिक स्थल पर विभिन्न राज्यों की बुनकरी परंपराओं का एक साथ प्रस्तुत होना सांस्कृतिक आदान-प्रदान का अवसर भी देता है। अलग-अलग क्षेत्रों से आए उत्पाद भारतीय संस्कृति की विविधता को सामने रखते हैं। प्रदर्शनी के जरिए पारंपरिक शिल्प को प्रोत्साहित करने के साथ ही बुनकरों की कला और मेहनत के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
बुनकरों की कला को सम्मान देने की अपील
आयोजक जावेद मकसूद ने लखनऊवासियों और प्रदेश के लोगों से प्रदर्शनी में पहुंचकर भारतीय हथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बुनकरों की कला और मेहनत को सम्मान देना जरूरी है, ताकि पारंपरिक शिल्प की पहचान बनी रहे और इसे आगे बढ़ाने के प्रयासों को प्रोत्साहन मिले।उन्होंने सभी प्रदेशवासियों और लखनऊवासियों को शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं भी दीं। नवरात्रि के अवसर पर आयोजित यह प्रदर्शनी पारंपरिक भारतीय परिधानों और हस्तशिल्प को करीब से देखने का अवसर प्रदान कर रही है।
परंपरा और आधुनिक फैशन का अनूठा संगम
कॉटन एंड सिल्क फैब प्रदर्शनी 2026 में पारंपरिक हथकरघा उत्पादों के साथ आधुनिक डिजाइन का मेल देखने को मिल रहा है। बनारसी, चंदेरी, कांचीपुरम, तसर, इक्कत और पैठानी जैसे वस्त्र भारतीय बुनकरी की विविधता को प्रदर्शित करते हैं। वहीं, आधुनिक डिजाइन और प्राकृतिक रेशों से तैयार कपड़े बदलती फैशन पसंद की झलक पेश करते हैं।, कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी में आयोजित यह प्रदर्शनी भारतीय हथकरघा की विरासत, बुनकरों के हुनर और सांस्कृतिक सौहार्द को एक मंच पर लाने का प्रयास है। आयोजकों की अपील है कि लोग प्रदर्शनी में पहुंचकर पारंपरिक उत्पादों को देखें और देश की समृद्ध बुनकरी परंपरा को प्रोत्साहित करें।
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