बिहार में स्वास्थ्य केंद्रों का किराया बढ़ा, अब मिलेंगे ₹1,500

Editorial
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पटना बिहार में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने किराये के भवनों में संचालित स्वास्थ्य उपकेंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के मासिक किराए में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। अब इन स्वास्थ्य संस्थानों के भवन किराए के लिए प्रति संस्थान 1,500 रुपये प्रतिमाह निर्धारित किए गए हैं। पहले इसके लिए 500 से 600 रुपये प्रति माह का प्रावधान था। सरकार के इस फैसले से लंबे समय से कम किराए की राशि के कारण परेशानी झेल रहे स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन में मदद मिलने की उम्मीद है।स्वास्थ्य विभाग की ओर से 14 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री निशांत के निर्देश पर किराया बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। संशोधित दर को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार से स्वीकृति मिलने की जानकारी भी विभाग ने दी है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए राज्य के सभी 38 जिलों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत कुल 6 करोड़ 40 लाख 80 हजार रुपये का बजट आवंटित किया गया है।

बिहार में स्वास्थ्य केंद्रों का किराया बढ़ा, अब मिलेंगे ₹1,500
बिहार में स्वास्थ्य केंद्रों का किराया बढ़ा, अब मिलेंगे ₹1,500

किराए में बढ़ोतरी से स्वास्थ्य केंद्रों को राहत

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य उपकेंद्र और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोगों को उनके घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण आबादी को प्राथमिक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। लेकिन किराये के भवनों में संचालित संस्थानों के लिए लंबे समय से निर्धारित कम किराया एक चुनौती बना हुआ था। पिछले कई वर्षों से भवन किराए की राशि में वृद्धि नहीं होने के कारण संबंधित संस्थानों के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए किराए की दर संशोधित करने का निर्णय लिया गया है।अब प्रत्येक पात्र स्वास्थ्य उपकेंद्र और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह की राशि निर्धारित की गई है। इससे भवन मालिकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत भुगतान करने और स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन को व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी।

पहले 500 से 600 रुपये था मासिक किराया

स्वास्थ्य विभाग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, किराये के भवनों में चलने वाले संबंधित स्वास्थ्य संस्थानों के लिए पहले 500 से 600 रुपये प्रतिमाह का प्रावधान था। नई व्यवस्था के तहत यह राशि बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रति माह कर दी गई है।इस बदलाव से पुराने प्रावधान की तुलना में किराया राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, पहले अलग-अलग संस्थानों के लिए 500 से 600 रुपये की राशि निर्धारित होने के कारण वास्तविक बढ़ोतरी संस्थान की पूर्व निर्धारित दर पर निर्भर करेगी।विभाग का कहना है कि संशोधित दर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वीकृत है। इससे संबंधित जिलों में किराए के भुगतान के लिए बजट का उपयोग निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार किया जाएगा।

सभी 38 जिलों के लिए 6.40 करोड़ रुपये से अधिक का बजट

इस निर्णय को लागू करने के लिए बिहार के सभी 38 जिलों के लिए कुल 6 करोड़ 40 लाख 80 हजार रुपये आवंटित किए गए हैं। यह राशि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उपलब्ध कराई गई है।आवंटित बजट का इस्तेमाल संबंधित जिला स्वास्थ्य समितियां जरूरत के अनुसार किराये के भवनों में संचालित स्वास्थ्य उपकेंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के किराए के भुगतान के लिए करेंगी।बजट आवंटन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्वास्थ्य केंद्रों के भवन मालिकों को निर्धारित किराया समय पर मिल सके और भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण संस्थानों के संचालन में बाधा न आए। यह पूरी राशि सभी जिलों के लिए आवंटित बजट है। इसे किसी एक जिले या प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र को मिलने वाली कुल राशि नहीं समझना चाहिए। संबंधित संस्थानों की संख्या और आवश्यकता के अनुसार भुगतान किया जाएगा।

हर महीने समय पर किराया देना होगा

स्वास्थ्य विभाग ने किराया भुगतान की प्रक्रिया को नियमित रखने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को नियमानुसार किराए के बिल तैयार करने होंगे।विभाग के निर्देश के मुताबिक, प्रत्येक महीने के अंतिम दिन तक खर्च से संबंधित रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य समिति को भेजनी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य भुगतान और खर्च का रिकॉर्ड समय पर तैयार करना है, ताकि बजट के उपयोग की निगरानी की जा सके।विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पर्याप्त बजट उपलब्ध होने के बावजूद किराया भुगतान में देरी होने पर संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। इसके साथ ही मामले की रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को भी भेजी जाएगी।इस निर्देश से यह संकेत मिलता है कि विभाग केवल किराया बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि भुगतान व्यवस्था में नियमितता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करना चाहता है।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की कोशिश

बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता लोगों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है। गांवों में स्वास्थ्य केंद्रों का सुचारु संचालन होने से लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूर जाने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है।किराये के भवनों में चल रहे स्वास्थ्य उपकेंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए मासिक किराया बढ़ाने का फैसला इसी दिशा में उठाया गया कदम है। समय पर किराया भुगतान होने से भवन मालिकों और स्वास्थ्य विभाग के बीच व्यवस्था सुचारु रखने में भी मदद मिल सकती है। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार के लिए भवनों के किराए के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता, दवाओं की आपूर्ति, जांच सुविधाओं और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। किराया बढ़ोतरी इन व्यवस्थाओं में से एक महत्वपूर्ण पहलू है।

बजट के इस्तेमाल और भुगतान पर रहेगी नजर

स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आवंटित राशि का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाए। बिल तैयार करने से लेकर खर्च की रिपोर्ट भेजने तक की प्रक्रिया में समयसीमा का पालन करना होगा।यदि बजट उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान में देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी को इसका कारण स्पष्ट करना होगा। विभाग की इस व्यवस्था से किराया भुगतान की निगरानी और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।बिहार सरकार ने किराये के भवनों में संचालित स्वास्थ्य उपकेंद्रों और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए मासिक किराया बढ़ाकर 1,500 रुपये निर्धारित किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में सभी 38 जिलों के लिए 6.40 करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया गया है। अब समय पर भुगतान और बजट के प्रभावी इस्तेमाल के जरिए इस फैसले को जमीन पर लागू करना स्वास्थ्य विभाग के सामने अहम जिम्मेदारी होगी।

 

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