15 महीने से मेडिकल बिल लंबित, कर्मचारियों पर आरोप

Editorial
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अलीगढ़ कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के अलीगढ़ स्थित सासनी गेट कार्यालय में मेडिकल रिइम्बर्समेंट बिल के निस्तारण में कथित देरी और कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। आशा सिंह ने अपने पति शैलेंद्र सिंह के इलाज पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति में लगभग 15 महीने की देरी होने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि घुटने की पटेला यानी घुटने की टोपी की हड्डी टूटने के बाद निजी अस्पताल में इलाज कराया गया था। इसके बाद मेडिकल रिइम्बर्समेंट के लिए जरूरी बिल और दस्तावेज ESIC कार्यालय में जमा किए गए, लेकिन लंबे समय बाद भी भुगतान नहीं हुआ।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिल की स्थिति पूछने के लिए कार्यालय पहुंचने पर काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों ने कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया और पैसे की मांग की। शिकायतकर्ता ने संबंधित कर्मचारियों के रूप में संजय शर्मा और अमरनाथ के नाम का उल्लेख किया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित कर्मचारियों तथा ESIC प्रशासन का पक्ष उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

15 महीने से मेडिकल बिल लंबित, कर्मचारियों पर आरोप
15 महीने से मेडिकल बिल लंबित, कर्मचारियों पर आरोप

15 महीने से भुगतान का इंतजार, बिल की प्रक्रिया पर सवाल

आशा सिंह के अनुसार, उनके पति शैलेंद्र सिंह के घुटने की पटेला हड्डी टूटने के कारण निजी अस्पताल में उपचार कराना पड़ा था। इलाज पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति प्राप्त करने के लिए आवश्यक मेडिकल बिल और संबंधित दस्तावेज अलीगढ़ स्थित ESIC कार्यालय में जमा किए गए थे।शिकायतकर्ता का दावा है कि दस्तावेज जमा किए जाने के बाद लगभग 15 महीने बीत गए, लेकिन मेडिकल रिइम्बर्समेंट की राशि अब तक प्राप्त नहीं हुई। इस दौरान परिवार भुगतान की स्थिति जानने के लिए कार्यालय से संपर्क करता रहा।शिकायत में यह भी कहा गया है कि हाल ही में उन्हें जानकारी मिली कि उनका बिल आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारी या कार्यालय को भेजा ही नहीं गया। यदि दस्तावेज जमा होने के बाद वास्तव में बिल निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे नहीं बढ़ाया गया, तो यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है।बिल किस तारीख को जमा किया गया था, उसकी प्राप्ति रसीद क्या है, फाइल वर्तमान में किस अधिकारी के पास है और भुगतान में देरी का आधिकारिक कारण क्या है, इसकी पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड से होनी बाकी है।

बिल की स्थिति पूछने पर दुर्व्यवहार का आरोप

शिकायतकर्ता ने सासनी गेट स्थित ESIC कार्यालय के काउंटर पर कार्यरत कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई है।  जब वह अपने मेडिकल बिल और भुगतान की स्थिति जानने के लिए कार्यालय पहुंचीं, तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने कथित तौर पर उनके साथ बदतमीजी की।शिकायत में संजय शर्मा और अमरनाथ नाम के कर्मचारियों का उल्लेख करते हुए उनकी भूमिका की जांच कराने की मांग की गई है। आशा सिंह का आरोप है कि बिल के संबंध में पूछताछ करने पर पैसे की मांग भी की गई।यदि जांच में किसी कर्मचारी द्वारा आधिकारिक प्रक्रिया के तहत काम करने या फाइल आगे बढ़ाने के बदले अनुचित रूप से पैसे मांगने की पुष्टि होती है, तो यह गंभीर मामला होगा। ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए, ताकि तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय हो सके।, पैसे मांगने और दुर्व्यवहार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। संबंधित कर्मचारियों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है, जिससे मामले के सभी पहलुओं को निष्पक्ष रूप से समझा जा सके।

ESIC की जिम्मेदारी और मेडिकल रिइम्बर्समेंट की प्रक्रिया

कर्मचारी राज्य बीमा निगम यानी ESIC, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्य करता है। इसकी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत पात्र बीमित कर्मचारियों और उनके परिवारों को निर्धारित नियमों के अनुसार चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।कुछ परिस्थितियों में निर्धारित नियमों और पात्रता के अधीन चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी हो सकता है। हालांकि, प्रत्येक मेडिकल रिइम्बर्समेंट का भुगतान संबंधित योजना, उपचार की प्रकृति, आवश्यक दस्तावेजों और लागू नियमों के अनुसार तय होता है।इसीलिए किसी बिल के निस्तारण में देरी होने पर संबंधित कार्यालय को उसकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि दस्तावेज अधूरे हैं, कोई आपत्ति है या अतिरिक्त जानकारी की जरूरत है, तो आवेदक को नियमानुसार इसकी जानकारी देना महत्वपूर्ण है।आशा सिंह की शिकायत में भी मांग की गई है कि यदि मेडिकल बिल में कोई कमी या आपत्ति है, तो इसकी सूचना लिखित रूप में उपलब्ध कराई जाए। इससे शिकायतकर्ता को यह समझने में मदद मिलेगी कि भुगतान में देरी किस वजह से हो रही है और आगे कौन-सी प्रक्रिया पूरी करनी है।

शिकायत में जांच और भुगतान की मांग

आशा सिंह ने सक्षम अधिकारी से पूरे मामले की जांच कराने का अनुरोध किया है। शिकायत में कहा गया है कि सबसे पहले मेडिकल रिइम्बर्समेंट बिल के लगभग 15 महीने तक लंबित रहने के कारण का पता लगाया जाए।इसके साथ ही यह जांचने की मांग की गई है कि बिल जमा होने के बाद उसे आगे की प्रक्रिया के लिए क्यों नहीं भेजा गया। शिकायतकर्ता ने संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने और दुर्व्यवहार तथा पैसे मांगने के आरोपों पर उचित कार्रवाई की मांग भी की है।शिकायत में यह भी अनुरोध किया गया है कि मेडिकल रिइम्बर्समेंट बिल को तत्काल नियमानुसार आगे बढ़ाया जाए और यदि राशि देय है तो उसका भुगतान कराया जाए। इसके अतिरिक्त, शिकायत पर की गई कार्रवाई और बिल की वर्तमान स्थिति के बारे में लिखित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।उपलब्ध विवरण से यह स्पष्ट नहीं है कि शिकायत सक्षम अधिकारी के पास औपचारिक रूप से जमा हो चुकी है या इस पर कोई जांच शुरू की गई है। इसलिए प्रशासन की ओर से कार्रवाई होने या भुगतान के संबंध में कोई निष्कर्ष निकालना अभी उचित नहीं होगा।

प्रशासनिक पारदर्शिता से दूर हो सकती है परेशानी

मेडिकल रिइम्बर्समेंट जैसे मामलों में लंबे समय तक स्थिति स्पष्ट न होने से आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से इलाज पर खर्च करने के बाद प्रतिपूर्ति की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होता है कि उनका आवेदन किस स्तर पर है।ऐसी परिस्थितियों में फाइल की स्थिति, दस्तावेजों की उपलब्धता, लंबित आपत्तियों और भुगतान की संभावित प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है। इससे आवेदक को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा भी बना रहता है।अलीगढ़ के इस मामले में भी अब मुख्य सवाल यही है कि मेडिकल बिल वास्तव में किस स्तर पर लंबित है और देरी के पीछे क्या कारण हैं। साथ ही, शिकायत में लगाए गए दुर्व्यवहार और पैसे मांगने के आरोपों की जांच किस प्रकार की जाती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।

अब ESIC प्रशासन के जवाब पर नजर

आशा सिंह ने अपनी शिकायत में सक्षम अधिकारी से हस्तक्षेप करने और नियमानुसार न्याय दिलाने का अनुरोध किया है। अब मामले में बिल के रिकॉर्ड की जांच, संबंधित कर्मचारियों का पक्ष और ESIC प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।यदि बिल में कोई कमी नहीं है और प्रतिपूर्ति नियमों के तहत देय है, तो उसका समयबद्ध निस्तारण शिकायतकर्ता के हित में होगा। वहीं, यदि कोई दस्तावेज या प्रक्रिया लंबित है, तो उसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। पैसे मांगने और दुर्व्यवहार के आरोपों पर भी निष्पक्ष जांच के आधार पर निर्णय लिया जाना जरूरी है।

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